उदयपुर । को मात्स्यकी महाविद्यालय एवं प्रसार शिक्षा निदेशालय, उदयपुर के सयंुक्त तत्वाधान पौधारोपण हरियालो राजस्थान कार्यक्रम के तहत माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा गोद ग्राम हींता में पौधरोपण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर डॉ. मनोहर लाल औझा, सह आचार्य द्वारा मुख्य अतिथि प्रो. रामेश्वर लाल सोनी, निदेशक प्रसार शिक्षा, मात्स्यकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ लक्ष्मी नारायण महावर, राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डॉ. सुमन ताकर, कृषि विज्ञान केन्द्र, वल्लभनगर प्रभारी डॉ. मनीराम चैधरी, छात्र छात्राओं एवं समस्त उपस्थित ग्राम वासियोें का राजकीय पौधशाला, हींता पर स्वागत उद्बोधन में हरियालों राजस्थान कार्यक्रम की जानकारी दी।
मात्स्यकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता ने बढ़ती हुई जनसंख्या, आवासीय भुमि, वायु प्रदुषण, सड़क निर्माण, औद्योगिक विकास के कारण धरती माता का श्रृंगार-हरियाली आवरण तेज गति से खत्म होता जा रहा है।
जिसमे पर्यावरण में तापक्रम का बढ़ना, वर्षा की अनिश्चितता, रेगिस्तान की वृद्धि होना, कृषि उत्पादन में कमी एवं ऑक्सीजन जलस्तर की कमी होने पर जन जीवन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
इसलिए अपने क्षैत्र में अधिक से अधिक छांयादार फूल एवं फलदार पौधे लगाकर पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का सामुदायिक दायित्व है। वृक्षों से फूल-फल-पत्ती एवं छाल मानव जीवन मंे लकड़ी, गौंद, औषधि, आहार एंव रंग के रूप में उत्पाद बनाकर व्यवसाय किया जाता है।
इस अवसर पर 200 जामुन के पैड़ का रोपण किया गया है।
प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. रामेश्वर लाल सोनी द्वारा जन्म से लेकर बचपन, युवा अवस्था से लेकर वृद्धावस्था पर लकड़ी के महत्व को बताते हुए अपने उद्बोधन में बताया की प्रत्येक नागरिक को अपने जन्म दिन, शादी की सालगिरह, बच्चों के मुण्डन संस्कार पर फलदार एंव औषधि उपयोगी वृक्ष लगाने चाहिए।
साथ मंे उन्हे अपने बच्चे की तरह देखरेख करते हुए सिंचाई, सहारा एवं सुरक्षा करनी चाहिए। जिससे धरती माता का श्रृंगार आवरण मानव जीवन, पशु पक्षी के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करता रहेगा।
अन्त में डॉ सुमन ताकर ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।