उदयपुर: 33 साल के एक व्यक्ति की दाहिनी किडनी में कई बड़े स्टैगहॉर्न स्टोन थे। वह क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से भी जूझ रहा था और उसकी किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो गई थी।
पारस हेल्थ उदयपुर में उसका सफल इलाज किया गया। डॉक्टरों ने पथरी (स्टोन) निकालने के लिए सिंगल स्टेज, सिंगल ट्रैक्ट PCNL (परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी) की।
इस प्रक्रिया के दौरान एक ही ट्रैक्ट से 500 से ज्यादा स्टोन के टुकड़े निकाले गए। इस मुश्किल प्रक्रिया को पारस हेल्थ उदयपुर के यूरोलॉजी डायरेक्टर डॉ. विश्वास बाहेती ने किया।
मरीज़ को बाइलेटरल रीनल कैलकुली की समस्या भी थी। इस बीमारी के होने का मतलब दोनों किडनी में पथरी होना है।
इससे पहले एक दूसरे हॉस्पिटल में PCNL प्रक्रिया हो चुकी थी। यहां यूरोलॉजी टीम के तहत एक हाई-रिस्क सर्जरी कैंडिडेट के तौर पर भर्ती किया गया था।
मरीज की किडनी की हालत गंभीर रूप से खराब थी। उसे गंभीर एनीमिया भी था और उसका हीमोग्लोबिन करीब 6 g/dL था।
जरूरत पड़ने पर उसे इंटरमिटेंट हीमोडायलिसिस भी दिया जाता था। ऐसे में सर्जरी के बाद डायलिसिस की जरूरत पड़ने का खतरा भी था।
जांच में सामने आया कि दाहिनी किडनी के सभी कैलीस में पथरी मौजूद थी। कैलीस किडनी के वे हिस्से होते हैं, जहां यूरिन इकट्ठा होकर आगे बढ़ता है।
मरीज़ की हालत को देखते हुए टीम ने सबसे पहले राइट-साइडेड PCN (परक्यूटेनियस नेफ्रोस्टॉमी) के ज़रिए यूरिन ड्रेनेज बनाया। इसमें त्वचा के ज़रिए सीधे किडनी में एक ट्यूब डाली जाती है ताकि सामान्य फ्लो में रुकावट होने पर यूरिन निकल सके। इसके बाद बाइलेटरल यूरेटरिक स्टेंटिंग की गई। इसमें यूरिन फ्लो बनाए रखने के लिए दोनों यूरेटर्स में पतली ट्यूब डाली गईं।
इसके बाद टीम ने PCNL (परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी) को अंजाम दिया। यह एक न्यूनतम चीरफाड़ वाली प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में त्वचा के जरिए एक छोटा सा रास्ता बनाकर किडनी तक पहुंचा गया, जिससे पथरी तक सीधे पहुंचकर उसे छोटे टुकड़ों में तोड़ा जा सका। इस तकनीक की मदद से सर्जिकल टीम ने एक ही स्टेज में और एक ही एक्सेस रूट के माध्यम से किडनी में मौजूद पथरी को पूरी तरह निकाल दिया।
पारस हेल्थ उदयपुर के यूरोलॉजी डॉयरेक्टर डॉ विश्वास बाहेती ने बताया, “यह एक जटिल केस था क्योंकि मरीज़ को क्रोनिक किडनी डिजीज थी, उसकी किडनी की कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित थी और हीमोग्लोबिन का स्तर 6 g/dL था।
उसका पहले भी PCNL हो चुका था। बीच-बीच में वह हीमोडायलिसिस ले रहा था।
इस कारण सर्जरी से जुड़े ख़तरे बढ़ गए थे। हमने किडनी तक पहुंचने के लिए केवल एक ट्रैक्ट का इस्तेमाल करते हुए सिंगल-स्टेज प्रक्रिया को चुना, ताकि कम से कम एक्सेस के साथ पथरी को पूरी तरह साफ किया जा सके।
मरीज की स्थिति और जोखिम को देखते हुए यह एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी, लेकिन सर्जरी के बाद उसे हीमोडायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी।”
प्रक्रिया के बाद मरीज में काफी अच्छा सुधार देखने को मिला और वह तीसरे दिन हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो गया। डिस्चार्ज के समय उसे कोई भी दिक्कत नहीं थी। अब वह स्वस्थ है, काम कर रहा है और अब उसे हीमोडायलिसिस कराने की जरूरत नहीं है।
मरीज़ ने बताया, “मेरी बीमारी मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए बहुत ही बड़ी चिंता की बात थी क्योंकि मुझे पहले से ही गंभीर किडनी की समस्याएं थी और मैं इसका इलाज एक बार करा चुका था।
मैं डॉ. विश्वास बहेती और पारस हेल्थ उदयपुर की टीम का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे इलाज़ की प्रक्रिया समझाया और पूरी प्रक्रिया में मेरा साथ दिया।
मुझे जो देखभाल मिली, उससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा, और मुझे राहत है कि मैं ठीक हो गया हूं और अपने सामान्य रूटीन में वापस आ गया हूं।”
यह मामला दिखाता है कि गंभीर रूप से कमजोर किडनी वाले हाई रिस्क मरीज में भी सिंगल स्टेज, सिंगल ट्रैक्ट PCNL के जरिए किडनी तक कम एक्सेस (पहुंच) बनाकर ज्यादा मात्रा में पथरी को साफ किया जा सकता है।