कुराबड़। राजस्थान विद्यापीठ महाविद्यालय, कुराबड़ में हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी सप्ताह का उत्साह एवं उमंग के साथ शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिंदी भाषा के महत्व, उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा दैनिक जीवन में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम अधिकारी एवं हिंदी व्याख्याता डॉ. निर्मला सालवी ने बताया कि समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. एम. एल. जणवा ने की, जबकि महाविद्यालय प्रशासक डॉ. वृत्तिका गुर्जर मुख्य अतिथि एवं अर्पित सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. वृत्तिका गुर्जर ने हिंदी दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 सितंबर, 1949 को भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।
उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने, हिंदी की गौरवशाली परंपरा को समझने और भाषा के प्रति सम्मान एवं प्रेम को अभिव्यक्त करने का अवसर है।
उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रयोग में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. एम. एल. जणवा ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को हिंदी को दैनिक व्यवहार एवं उपयोग की भाषा बनाना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक कार्य में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर बल देते हुए कहा कि भाषा के प्रति सम्मान और उसका नियमित उपयोग ही हिंदी को और अधिक सशक्त बनाएगा।
कार्यक्रम के अगले चरण में सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता में शारदा सुथार ने प्रथम, मुन्ना कुंवर ने द्वितीय तथा मीना कुंवर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई।
समारोह के अंत में डॉ. कुणाल आमेटा ने सभी अतिथियों, विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। हिंदी सप्ताह के आयोजन से महाविद्यालय परिसर में हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता, सम्मान एवं गौरव की भावना का संचार हुआ।