जहाँ साधारण ब्रोंकोस्कोपी नहीं पहुँचा पाती, वहाँ EBUS समाधान देता है
EBUS क्या है?
एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड ब्रोंकोस्कोपी (EBUS) एक एडवांस्ड, मिनिमली इनवेसिव और अत्यधिक सटीक तकनीक है, जिसमें ब्रोंकोस्कोप के सिरे पर अल्ट्रासाउंड लगा होता है।
इसकी मदद से डॉक्टर उन लिम्फ नोड्स और घावों (lesions) तक भी पहुँच सकते हैं जो एयरवे (श्वास नली) के बाहर होते हैं—जहाँ सामान्य ब्रोंकोस्कोपी नहीं पहुँच पाती।
EBUS क्यों ज़रूरी है?
सामान्य ब्रोंकोस्कोपी केवल एयरवे के अंदर की जगह दिखाती है।
कई बार कैंसर, TB या लिम्फ नोड्स की बीमारी एयरवे के बाहर होती है, इसलिए सामान्य ब्रोंकोस्कोपी में दिखती ही नहीं।
EBUS की अल्ट्रासाउंड तकनीक ऐसे ‘छिपे हुए’ घावों को भी स्पष्ट दिखा देती है,
जिससे सटीक निदान संभव हो जाता है।
गीतांजली में EBUS से मिले जीवन बदलने वाले परिणाम
1. कई मरीजों में सामान्य ब्रोंकोस्कोपी से लंग कैंसर का पता नहीं चला था
लेकिन EBUS Bronchoscopy से:
बीमारी सही स्टेज पर पकड़ में आई
तुरंत इलाज शुरू हो पाया
मरीज अब उपचार के साथ स्थिर और बेहतर हैं
2. दो मरीजों में फेफड़ों की टीबी छिपी हुई थी
साधारण जांचों में टीबी दिखाई नहीं दे रही थी,
पर EBUS से लिम्फ नोड्स में छुपी TB मिल गई
→ अब दोनों मरीजों का TB उपचार चल रहा है और वे तेजी से सुधार पर हैं।
EBUS किन बीमारियों का पता लगा सकता है?
शुरुआती चरण का लंग कैंसर
ट्यूबरकुलोसिस (TB)
सारकॉइडोसिस
लिम्फोमा
अन्य कई जटिल फेफड़ों और श्वसन तंत्र की बीमारियाँ
लंग कैंसर के स्टेजिंग में भी बेहद उपयोगी
EBUS की मदद से यह पता चलता है कि बीमारी कितनी फैली है—
जो सही इलाज का रास्ता तय करता है।
भारत में बहुत कम केंद्रों पर उपलब्ध – और अब गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में भी
यह उन्नत तकनीक अभी केवल कुछ चुनिंदा बड़े केंद्रों पर उपलब्ध है,लेकिन अब गीतांजली हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक उपयोग की जा रही है और ही कई जटिल व कठिन मामलों का निदान कर चुके हैं।