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सूर्या गायत्री के दिव्य सुरों से भक्तिरस में सराबोर हुआ गीतांजली विश्वविद्यालय का सभागार

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11 Jan 26
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सूर्या गायत्री के दिव्य सुरों से भक्तिरस में सराबोर हुआ गीतांजली विश्वविद्यालय का सभागार

 

उदयपुर।AIM for Seva एवं आर्ष विद्या तीर्थ की रजत जयंती समारोह के पावन अवसर पर उदयपुर स्थित गीतांजली विश्वविद्यालय का ऑडिटोरियम कल सायं एक अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति का साक्षी बना। शाम 6:30 बजे सुप्रसिद्ध युवा भक्ति गायिका सूर्या गायत्री द्वारा प्रस्तुत “रामं भजे” वैदिक एवं भक्ति-प्रधान भजन संध्या ने पूरे सभागार को श्रद्धा, शांति और भक्तिरस से ओत-प्रोत कर दिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना “महागणपतिम्” के साथ हुआ, जिसने वातावरण को पवित्रता और मंगलभाव से भर दिया। जैसे ही सूर्या गायत्री के स्वर गूंजे, श्रोता मानो सांसारिकता से ऊपर उठकर आध्यात्मिक लोक में प्रवेश कर गए।

इस गरिमामयी संध्या की अध्यक्षता गीतांजली ग्रुप के चेयरमैन श्री जे.पी. अग्रवाल ने की। कार्यक्रम में गीतांजली ग्रुप के वरिष्ठ पदाधिकारी श्री बी.आर. अग्रवाल, एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर श्री अंकित अग्रवाल, AIM for Seva एवं आर्ष विद्या तीर्थ से जुड़े पूज्य संतगण, आचार्यगण, शिक्षाविद् तथा शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी की उपस्थिति ने इस आयोजन की गरिमा और आध्यात्मिक ऊँचाई को और अधिक सुदृढ़ किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री जे.पी. अग्रवाल ने कहा कि AIM for Seva एवं आर्ष विद्यातीर्थ द्वारा सुदूर एवं वंचित अंचलों के बच्चों को संस्कारयुक्त, सर्वांगीण शिक्षा प्रदान करने का कार्य अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होती है जब उसमें सेवा-भाव समाहित हो, और गीतांजली विश्वविद्यालय इसी मूल दर्शन के साथ निरंतर कार्य कर रहा है।




वेद-पाठ एवं स्तोत्र-पाठ करते बच्चों को देखकर उन्हें गहन आत्मिक प्रसन्नता का अनुभव हुआ। उन्होंने इस आयोजन को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों का उत्सव बताया। साथ ही AIM for Seva की 25 वर्षों की सेवा-यात्रा के लिए आदरणीय बापना साहब, पूज्य स्वामी जी तथा सभी अतिथियों का हृदय से साधुवाद किया।
सूर्या गायत्री की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर स्थापना के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री द्वारा भी उनके भजनों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की गई है। ऐसे भजन समाज को सही दिशा देने और सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं, विशेषकर आज के सोशल मीडिया युग में, जब भ्रामक सूचनाओं की भरमार है—ऐसे में इस प्रकार के आयोजनों का महत्व और भी बढ़ जाता है।

 

सूर्या गायत्री : भक्ति, साधना और साध्य की प्रेरणादायक यात्रा

26 जनवरी 2006 को केरल के कोझिकोड ज़िले के शांत ग्राम परम्मेरी में जन्मीं सूर्या गायत्री ने अल्पायु में ही भक्ति एवं आध्यात्मिक संगीत के क्षेत्र में वैश्विक पहचान स्थापित की है। उनके पिता श्री पी. वी. अनिल कुमार, कोझिकोड आकाशवाणी के प्रतिष्ठित कलाकार हैं, जबकि माता श्रीमती पी. के. दिव्या एक संवेदनशील कवयित्री हैं। पारिवारिक संस्कार और संगीत साधना ने सूर्या गायत्री के स्वर में गहराई और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम रचा है।

भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाडा एवं क़तर जैसे देशों में अपनी प्रस्तुतियाँ दे चुकी सूर्या गायत्री के संगीत जीवन का एक ऐतिहासिक क्षण तब आया, जब माननीय प्रधानमंत्री द्वारा उनके गाए गए “श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन” भजन को सोशल मीडिया पर साझा किया गया। यह भजन आज भी श्रीराम मंदिर में गूंजता है और श्रद्धालुओं को भावविभोर करता है।

गीतांजली विश्वविद्यालय के मंच पर सूर्या गायत्री ने महागणपतिम्, रामं भजे, ठुमक चलत रामचंद्र, राम को देख कर, श्रीरामचंद्र कृपालु, सीतापति संकीर्तन, रघुवर तुमको, मेरे घर राम आए हैं, भारत देश तथा हनुमान चालीसा जैसे भजनों का अत्यंत भावपूर्ण, शास्त्रीय एवं ओजस्वी गायन प्रस्तुत किया। प्रत्येक रचना पर श्रोताओं की तन्मयता और तालियों की गूंज इस बात का प्रमाण थी कि यह संध्या केवल संगीत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बन चुकी थी।

गीतांजली विश्वविद्यालय : सेवा, संस्कृति और समाज का सशक्त स्तंभ

पिछले 18 वर्षों से दक्षिण राजस्थान में सक्रिय गीतांजली विश्वविद्यालय एवं गीतांजली ग्रुप उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शिक्षा, समाजसेवा एवं सांस्कृतिक-आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध रहा है। चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के साथ इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से विश्वविद्यालय समाज के समग्र विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह भजन संध्या उसी सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त उदाहरण रही।

विश्वविद्यालय का स्पष्ट विज़न है—
“उच्च गुणवत्ता की शिक्षा एवं अनुसंधान को सुदृढ़ करना, आत्मविश्वासी एवं आत्मनिर्भर पेशेवरों का निर्माण करना तथा किफायती एवं उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराना।”
इसी दृष्टि के अनुरूप गीतांजली विश्वविद्यालय सेवा-प्रधान गतिविधियों में निरंतर सहभागिता करता रहा है।

सेवा और संस्कार का जीवंत संदेश

इस अवसर पर AIM for Seva एवं आर्ष विद्यापीठ के सेवा प्रकल्पों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। पूज्य स्वामी ब्रह्मपरमानंद जी ने संस्था की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छात्रालयों में केवल देह का पोषण नहीं, बल्कि चित्त का शोधन भी होता है। यहाँ विद्या केवल ज्ञान नहीं रहती, बल्कि संस्कार बनकर विद्यार्थियों के जीवन में उतरती है।
AIM for Seva के चीफ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफिसर श्री सिरनी जी, जो विशेष रूप से अमेरिका से पधारे, ने बताया कि संस्था देश के 17 राज्यों में 91 छात्रावास संचालित कर रही है, जिनसे प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। राजस्थान में जयपुर और उदयपुर में छात्रावास तथा उदयपुर में विद्यालय परियोजना इस सेवा-भाव का जीवंत उदाहरण हैं।

उदयपुर की पुण्य धरा पर आयोजित यह वैदिक-भक्ति संध्या श्रद्धा, साधना और संस्कृति का एक अनुपम संगम रही। देश के विभिन्न तीर्थस्थलों से पधारे संतों एवं आचार्यों की उपस्थिति ने इस आयोजन को श्रुति-स्मृति परंपरा का सजीव रूप प्रदान किया।
यह आयोजन निश्चय ही गीतांजली विश्वविद्यालय, AIM for Seva एवं आर्ष विद्या तीर्थ के सेवा-संकल्प का एक अविस्मरणीय अध्याय बनकर सदैव स्मरणीय रहेगा।


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