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गुमनाम शहीदों की गाथा लेकर कश्मीर से कटरा तक पहुंचे मनोज आंचलिया व डॉ. सीमा वेद, हजारों लोगों में जगाया राष्ट्रभक्ति का जज्बा

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10 Jun 26
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गुमनाम शहीदों की गाथा लेकर कश्मीर से कटरा तक पहुंचे मनोज आंचलिया व डॉ. सीमा वेद, हजारों लोगों में जगाया राष्ट्रभक्ति का जज्बा


उदयपुर। देश के गुमनाम शहीदों एवं स्वतंत्रता संग्राम की ज्ञात-अज्ञात घटनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर मनोज आंचलिया एवं डॉ. सीमा वेद ने जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों में दस दिवसीय जनजागरण अभियान चलाकर राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई। इस दौरान उन्होंने ऐतिहासिक कपड़े के रोल पर अंकित शहीदों की वीरगाथाओं को सैकड़ों लोगों के बीच प्रदर्शित कर स्वतंत्रता सेनानियों के अद्वितीय योगदान से अवगत कराया।
वृक्षम अमृतम सेवा संस्थान के अध्यक्ष गोपेश शर्मा ने बताया कि जम्मू के अखनूर में भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रभारी विजय कुमार गुप्ता ‘विनय’ की उपस्थिति में शहीदों के इतिहास पर आधारित विशेष प्रस्तुति दी गई। वहीं श्रीनगर के पहलगाम स्थित बैसरन शहीद स्मारक पर हालिया आतंकी हमले में शहीद हुए 26 लोगों को श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
अभियान के दौरान श्रीनगर के लाल चौक मे असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर रामेश्वरम शर्मा की उपस्थिति में लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक ऐसे क्रांतिकारियों के बारे में जानकारी दी गई, जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में दबकर रह गया। इनमें विनायक देशपांडे, गोविंद चरण कर, महादेव देसाई, प्रफुल्ल चाकी, निर्मल जीवन घोष, अंबिका चक्रवर्ती, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, राव तुलाराम और मुकुंदी लाल सहित अनेक वीर सेनानी शामिल रहे।
कटरा में श्री माता वैष्णो देवी मार्ग पर घोड़ा संचालकों एवं स्थानीय नागरिकों की मौजूदगी में आजादी के संघर्ष से जुड़ी प्रेरक और रोमांचकारी घटनाओं का वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो उठे। अभियान के तहत देशनोक, अमृतसर, पठानकोट, श्री महावीरजी, तिजारा, श्रीनगर, गुलमर्ग, सोनमर्ग और जोजिला दर्रा सहित कई ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचकर शहीदों की अनसुनी गाथाओं को जन-जन तक पहुंचाया गया।
उदयपुर लौटने पर वृक्षम अमृतम सेवा संस्थान द्वारा मनोज आंचलिया एवं डॉ. सीमा वेद का भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष गोपेश शर्मा, सचिव यशवंत त्रिवेदी, उपाध्यक्ष अनिल पारीक, निलेश महेश उपाध्याय तथा शालिनी उपाध्याय सहित संस्थान के पदाधिकारियों ने स्मृति चिन्ह एवं उपरणा भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
यह अभियान न केवल गुमनाम शहीदों के बलिदान को सम्मान देने का प्रयास है, बल्कि नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, इतिहास बोध और देशभक्ति की भावना को सशक्त बनाने की प्रेरणादायी पहल भी है।


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