उदयपुर | जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कंप्यूटर विज्ञान एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा एआई-हैकेथॉन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में तीन चरणों, जिनमें प्रथम चरण में बहु-विकल्पीय प्रश्न, द्वितीय में संक्षिप्त उत्तर प्रश्न और तृतीय में प्रॉब्लम सोल्विंग द्वारा प्रतिभागियों का मूल्यांकन हुआ।
मुख्य वक्ता के रूप में कुलपति प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान युग में 'री-स्किल' और 'अप-स्किल' करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि हमें उन पुराने कौशलों को भूलना होगा जो अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। प्रो. सारंगदेवोत ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि हम एआई का सही और प्रभावी उपयोग करें, तो भारत की जीडीपी में क्रांतिकारी वृद्धि देखने को मिलेगी। उन्होंने व्यक्तिगत शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में एआई की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विश्वविद्यालय को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाते हैं।
कुल प्रमुख एवं कुलाधिपति श्री बी.एल. गुर्जर ने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें तकनीक के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नवाचार और तकनीक के सही उपयोग से विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं।
प्रारम्भ में कम्प्यूटर विज्ञान और आईटी विभाग की निदेशक प्रो. मंजू मांडोत ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने विभाग द्वारा तकनीक के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी।
इस हैकेथॉन में आयोजन सचिव डॉ. चंद्रेश कुमार छ्तलानी द्वारा बनाए गए सॉफ्टवेयर द्वारा पहले दो चरण आयोजित किये गए। उन्होंने बताया कि हैकेथॉन में पांच श्रेणियों में प्रश्न और समस्याएं दी गयीं थी, जिनमें स्वास्थ्य, पर्यावरण, शिक्षा, फिनटेक, गवर्नेंस सम्मिलित थे।
कार्यक्रम के अंत में सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह वितरित किए गए।
इस अवसर पर डॉ. मनीष श्रीमाली ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में डॉ. भारत सिंह देवडा, डॉ. गौरव गर्ग, डॉ. प्रदीप सिंह शक्तावत, डॉ. भरत सुखवाल, डॉ. दिलीप चौधरी, निजी सचिव कृष्णकांत कुमावत, डॉ. राजेंद्र वैरागी, डॉ. ललित सालवी, डॉ. विकास डांगी, दुर्गाशंकर सहित कार्यकर्ता और प्रतिभागी उपस्थित थे।