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गोविन्द देव मन्दिर कॉरिडोर योजना : जयपुर के वैभवपूर्ण धरोहर को संवारने का प्रयास

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27 Feb 26
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गोविन्द देव मन्दिर कॉरिडोर योजना : जयपुर के वैभवपूर्ण धरोहर को संवारने का प्रयास

जयपुर स्थित गोविंद देव जी मंदिर के विकास के लिए प्रस्तावित कॉरिडोर योजना एक महत्वपूर्ण धार्मिक और शहरी विकास परियोजना है। यह जयपुर के वैभव पूर्ण धरोहर को संवारने का प्रयास भी है। राजस्थान विधानसभा में इस विषय पर पूछे गए प्रश्नों के जवाब में नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भजन लाल सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों का सुनियोजित विकास करना चाहती है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले। 

गोविंद देव जी मंदिर जयपुर का प्रमुख आस्था केंद्र है, जहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहाँ भारी भीड़ रहती है। ऐसे में मंदिर क्षेत्र में यातायात, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को विकसित करने के लिए कॉरिडोर बनाने की योजना सामने आई है। विधानसभा में मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि सरकार धार्मिक स्थलों के विकास को पर्यटन और शहरी व्यवस्थापन से जोड़कर देख रही है। उन्होंने संकेत दिया कि इस प्रकार की परियोजनाएँ शहरों के सुनियोजित विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा दोनों के लिए आवश्यक हैं। इससे मंदिर क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा सकेगा और अव्यवस्थित यातायात तथा भीड़ की समस्या को भी कम किया जा सकेगा। गोविंद देव जी मंदिर कॉरिडोर योजना की अवधारणा पहले भी सामने आ चुकी है। मंदिर परिसर के विकास के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये तक की परियोजना की घोषणा की जा चुकी है, जिसे उज्जैन के महाकाल और वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने की बात कही गई थी। 

इस कॉरिडोर के बनने से श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुँचने में सुविधा होगी और मंदिर परिसर अधिक सुव्यवस्थित बनाया जा सकेगा। इसके अंतर्गत चौड़े मार्ग, बेहतर प्रवेश द्वार, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग सुविधा और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य शामिल किए जा सकते हैं। इससे जयपुर के परकोटा क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है।विधानसभा में दिए गए जवाब से यह स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास से जोड़कर देख रही है। जयपुर पहले से ही विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख शहर है। यदि गोविंद देव जी मंदिर का व्यवस्थित विकास होता है तो धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और हस्तशिल्प क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है।
हालांकि इस योजना के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियाँ भी हैं। गोविंद देव जी मंदिर जयपुर के पुराने शहर क्षेत्र में स्थित है, जहाँ संकरी गलियाँ और ऐतिहासिक भवन बड़ी संख्या में मौजूद हैं। ऐसे में कॉरिडोर निर्माण के दौरान विरासत संरक्षण और स्थानीय व्यापारियों के हितों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होगा। किसी भी प्रकार का विकास कार्य स्थानीय लोगों की सहमति और उचित पुनर्वास व्यवस्था के साथ किया जाना चाहिए। राजनीतिक दृष्टि से भी यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विधानसभा में इस विषय पर चर्चा से यह स्पष्ट है कि धार्मिक स्थलों के विकास को लेकर जनप्रतिनिधियों में व्यापक रुचि है। मंत्री खर्रा के जवाब से यह संकेत मिला कि सरकार इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के पक्ष में है।कुल मिलाकर गोविंद देव जी मंदिर कॉरिडोर योजना जयपुर के धार्मिक और शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि इसे सुनियोजित ढंग से लागू किया जाता है तो इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और जयपुर की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी। विधानसभा में मंत्री झाबर सिंह खर्रा द्वारा दिया गया जवाब इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार इस परियोजना को गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहती है।

राजस्थान में धार्मिक पर्यटन के विकास को गति देने के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न प्रमुख तीर्थस्थलों पर कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में पहल की है। हाल ही में राज्यपाल के अभिभाषण में भी कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के विकास और कॉरिडोर निर्माण की योजनाओं का उल्लेख किया गया। इन प्रस्तावों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना, पर्यटन को बढ़ावा देना तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। राज्यपाल के अभिभाषण में प्रमुख धार्मिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की नीति पर जोर दिया गया। इस क्रम में जयपुर के गोविन्ददेव जी मंदिर के लिए प्रस्तावित कॉरिडोर का उल्लेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह योजना मंदिर परिसर के सुव्यवस्थित विकास, श्रद्धालुओं की सुविधा और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। अभिभाषण में यह संकेत दिया गया कि राज्य सरकार केवल एक मंदिर तक सीमित न रहकर विभिन्न प्रमुख तीर्थस्थलों का समग्र विकास करना चाहती है। इसी नीति के तहत कई अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी कॉरिडोर अथवा विशेष विकास योजनाएँ प्रस्तावित की गई हैं।

खाटू श्यामजी मंदिर कॉरिडोर

सीकर जिले का खाटूश्यामजी मंदिर देश के प्रमुख कृष्ण भक्त तीर्थों में से एक है। यहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। भीड़ और यातायात व्यवस्था को देखते हुए यहाँ कॉरिडोर अथवा विशेष विकास योजना की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। राज्यपाल के अभिभाषण में इस तीर्थ के विकास का उल्लेख धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।

सालासर बालाजी मंदिर कॉरिडोर

चूरू जिले के सालासर बालाजी मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यहाँ पार्किंग, आवागमन और सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता को देखते हुए कॉरिडोर या विकास योजना प्रस्तावित है। इससे विशेष रूप से हनुमान भक्तों को लाभ मिलेगा।

बेणेश्वर धाम विकास योजना

डूंगरपुर स्थित बेणेश्वर धाम आदिवासी समाज का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। यहाँ प्रतिवर्ष विशाल मेला आयोजित होता है। राज्यपाल के अभिभाषण में इस क्षेत्र के विकास को धार्मिक पर्यटन से जोड़कर देखा गया है। कॉरिडोर या समग्र विकास योजना से दक्षिणी राजस्थान में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर विकास योजना

बांसवाड़ा का त्रिपुरा सुंदरी मंदिर शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्यपाल के अभिभाषण में इस तीर्थ के विकास का उल्लेख धार्मिक पर्यटन के विस्तार के रूप में किया गया।

राज्यपाल के अभिभाषण से यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को राज्य के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार मान रही है। राजस्थान में ऐतिहासिक पर्यटन पहले से मजबूत है, लेकिन धार्मिक पर्यटन को और विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।धार्मिक कॉरिडोर बनने सेश्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी। यातायात और भीड़ प्रबंधन सुधरेगा।स्थानीय व्यापार को लाभ मिलेगाके नए अवसर पैदा होंगे।अभिभाषण में विभिन्न धार्मिक कॉरिडोरों के प्रस्ताव राजस्थान में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं। गोविंद देव जी मंदिर सहित खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी और बेणेश्वर धाम जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों के विकास से राज्य का धार्मिक पर्यटन मजबूत होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार राजस्थान को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है।


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