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नारी शक्ति का बहुआयामी दस्तावेज: ‘महिला सशक्तिकरण’ पर एक गंभीर विमर्श

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27 Feb 26
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नारी शक्ति का बहुआयामी दस्तावेज: ‘महिला सशक्तिकरण’ पर एक गंभीर विमर्श

समावेशी विकास और सशक्त राष्ट्र-निर्माण के वर्तमान वैश्विक विमर्श में नारी सशक्तिकरण अब केवल सामाजिक बहस का विषय नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और लोकतांत्रिक सुदृढ़ता का केंद्रीय आधार बन चुका है। इसी व्यापक और समकालीन दृष्टि को केंद्र में रखकर एडिशन पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित डॉ. संजय कुमार राय, सोनी राय की पुस्तक “महिला सशक्तिकरण: सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आयाम” एक गंभीर, शोधपरक और विश्लेषणात्मक कृति के रूप में सामने आती है।
यह पुस्तक महिला सशक्तिकरण के बहुआयामी स्वरूप को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से लेकर आधुनिक संवैधानिक प्रावधानों, नीतिगत सुधारों और वैश्विक परिदृश्य तक क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करती है। लेखकों ने स्पष्ट किया है कि सशक्तिकरण केवल अधिकारों की समानता तक सीमित अवधारणा नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिरता, आर्थिक प्रगति और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती की अनिवार्य शर्त है।
महिला सशक्तिकरण: सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आयाम में शिक्षा को सशक्तिकरण की आधारशिला माना गया है। डॉ. संजय कुमार राय के अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न केवल आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल का विकास भी करती है। आर्थिक आत्मनिर्भरता को महिलाओं की गरिमा और सामाजिक सम्मान से जोड़ा गया है, वहीं राजनीतिक सहभागिता को लोकतंत्र की वास्तविक सफलता का मानदंड बताया गया है। पुस्तक यह स्थापित करती है कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की समान भागीदारी के बिना लोकतांत्रिक ढांचा अधूरा है।
स्वास्थ्य अधिकार, कानूनी जागरूकता और डिजिटल सशक्तिकरण जैसे समकालीन आयामों को भी विस्तार से विश्लेषित किया गया है। विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित वर्ग की महिलाओं के समक्ष उपस्थित चुनौतियाँ—अशिक्षा, आर्थिक निर्भरता, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक रूढ़ियाँ—पुस्तक को जमीनी यथार्थ से जोड़ती हैं। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि सामाजिक परिवर्तन के लिए केवल नीतियाँ पर्याप्त नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सामुदायिक सहभागिता भी आवश्यक है।
डॉ. संजय कुमार राय, जो एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और रणनीतिक नवोन्मेषक हैं, अपने तकनीकी अनुभव और शोधपरक दृष्टिकोण के माध्यम से विषय को विश्लेषणात्मक गहराई प्रदान करते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल रूपांतरण और उभरती प्रौद्योगिकियों में दो दशकों से अधिक का अनुभव उनके तर्कों को ठोस आधार देता है। वहीं, सोनी राय की पत्रकारिता पृष्ठभूमि और सामाजिक संवेदनशीलता पुस्तक में मानवीय आयाम जोड़ती है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में उनके अनुभव से पुस्तक का कथ्य अधिक जीवंत और व्यावहारिक बनता है।
पिछले 15 वर्षों से अफ्रीका में सक्रिय सामाजिक पहलों से जुड़ी सोनी राय ने वंचित समुदायों के साथ कार्य करते हुए जो अनुभव अर्जित किए हैं, वे पुस्तक की दृष्टि को वैश्विक संदर्भ प्रदान करते हैं। इस प्रकार यह कृति केवल सैद्धांतिक विमर्श तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वास्तविक सामाजिक परिदृश्य से संवाद स्थापित करती है।
शैली की दृष्टि से पुस्तक सरल, सुव्यवस्थित और तथ्याधारित है। शोधपरक संदर्भों और विश्लेषणात्मक प्रस्तुति के कारण यह अकादमिक जगत, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होती है। साथ ही, यह सामान्य पाठकों को भी महिला सशक्तिकरण की जटिलताओं और संभावनाओं से परिचित कराती है।
समग्र रूप में “महिला सशक्तिकरण: सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक आयाम” समानता, गरिमा और न्याय पर आधारित समाज की स्थापना की दिशा में एक विचारोत्तेजक दस्तावेज है। यह पुस्तक न केवल विमर्श को समृद्ध करती है, बल्कि पाठकों को सक्रिय सामाजिक भागीदारी के लिए प्रेरित भी करती है।
 


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