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मेवाड़ की होली ‘परम्परा और आस्था का अद्भुत संगम’

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02 Mar 26
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मेवाड़ की होली ‘परम्परा और आस्था का अद्भुत संगम’

उदयपुर | मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी, महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन ने मेवाड़ की गौरवशाली एवं शताब्दियों पुरानी परम्पराओं का अनुपम निर्वहन करते हुए पण्डितों के वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पारम्परिक विधि-विधान से होलिका दीपन किया। मेवाड़ अंचल में इसका विशेष सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है।

सिटी पैलेस उदयपुर के ऐतिहासिक माणक चौक में आयोजित इस वर्ष का यह महोत्सव प्राचीन राजपरम्पराओं के अनुरूप साधारण रुप से अत्यंत श्रद्धा एवं गरिमा के साथ मनाया गया। जिसमें डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ राजसी वेशभूषा में अपने लवाजमे के साथ माणक चौक पधारे, जहाँ पैलेस गार्ड द्वारा “महाराणा सल्यूट” प्रदान किया गया।
वैदिक रीति से सम्पन्न होलिका पूजन में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विधिवत पूजा-अर्चना कर होलिका को ओढ़नी ओढ़ाई तथा पुष्पमाला, श्रीफल आदि अर्पित किए। तत्पश्चात् राजपरिवार के सदस्यों के साथ परिक्रमा कर विधिवत अग्नि प्रज्वलित की।

इस पावन अवसर पर मेवाड़ क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों एवं मठों से पधारे साधु-संतों और महंतों का विशेष सम्मान किया गया। उनका माल्यार्पण कर श्रीफल आदि भेंट किए गए। संत-महंतों ने मेवाड़ की सुख-समृद्धि और उन्नति के लिए आशीर्वचन प्रदान करते हुए “आसका” प्रदान की।

महोत्सव के दौरान पारम्परिक ‘गैर’ नृत्य का आयोजन हुआ, जिसमें लोक कलाकारों ने मेवाड़ी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की और फुल फाग खेली गई।

आस्था और संस्कृति के साथ यह परम्परा, मेवाड़ की प्राचीन राजमर्यादा का भी प्रतीक है। उसी श्रद्धा और गरिमा के साथ आज भी जीवंत है, जो मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत की निरंतरता का सशक्त प्रमाण है।


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