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*केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा की एक ऐतिहासिक पहल*

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01 May 26
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*केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा की एक ऐतिहासिक पहल*

*राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों में मधुमेह की स्क्रीनिंग और प्रबंधन के लिए 'गाइडेंस डॉक्यूमेंट'और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का विमोचन किया*

 

नीति गोपेन्द्र भट्ट 

 

नई दिल्ली । केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए गुरुवार को चण्डीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) 2.0 के अंतर्गत बच्चों में मधुमेह (डायबिटीज मेलिटस) की स्क्रीनिंग और प्रबंधन के लिए 'गाइडेंस डॉक्यूमेंट' (परिचालन दिशानिर्देश ) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का विमोचन किया ।

 

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की बच्चों में डायबिटीज़ मेलिटस के लिए तकनीकी विशेषज्ञ समूह और स्वास्थ्य संवर्धन के लिए तकनीकी विशेषज्ञ समूह (टेग) की कार्यकारी सदस्य:

डॉ. स्मिता जोशी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है जब पहली बार, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, ने टाइप-1 डायबिटीज़ बच्चों की स्क्रीनिंग और उनके प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति जारी की है। यह सिर्फ़ एक नीति नहीं है बल्कि भारत सरकार की मधुमेह से पीड़ित बच्चों को मुफ़्त इंसुलिन और स्वास्थ्य शिक्षा उपलब्ध उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता है।

 

डॉ जोशी ने डायबिटीज़ बच्चों की देखभाल के लिए भारत सरकार द्वारा एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति जारी करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का आभार जताया है ।

 

डॉ जोशी ने बताया कि भारत में पहले राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम(आरबीएसके)

के अन्तर्गत कोई स्क्रीनिंग नहीं होती थी।

साथ ही गैर संचारी रोगों के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनसीडी) के तहत बच्चों की टाइप-1 डायबिटीज़ की देखभाल के लिए कोई समर्पित व्यवस्था भी नहीं थी लेकिन अब यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति जारी होने से 

पूरे भारत में आँगनवाड़ियों और स्कूलों में बच्चॉ को स्क्रीनिंग की जाएगी। साथ ही सभी  ज़िला अस्पतालों में इनको समर्पित उपचार   तथा एनसीडी के तहत बच्चों के लिए डायबिटीज़ क्लीनिक की सुविधा भी उपलब्ध होगी। 

उन्होंने कहा कि यह सचमुच एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।विशेष कर तब, जब कई विकसित देश भी अभी तक मुफ़्त इंसुलिन और शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालाँकि यह भी एक तथ्य है कि विश्व में मधुमेह से पीड़ित सबसे अधिक बच्चे भारत में है और इसके बाद अमेरिका का दूसरा स्थान है।

 

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह नगर के निकट रहने वाली गुजरात की दो बहनें डॉ. स्मिता जोशी और डॉ. शुक्लाबेन रावल, टाइप-1 वाले डायबिटीज़ बच्चों के लिए पिछले आठ वर्षों से स्वयं की सामाजिक ज़िम्मेदारी के ध्येय वाक्य के साथ इस मिशन के लिए स्वयं को समर्पित कर रात दिन सेवा कार्य में जुटी हुई है। उन्होंने इसके लिए भारत के 16 राज्यों में और राष्ट्रीय स्तर पर जोरदार बच्चों के मधुमेह के निदान, देखभाल और उपचार के लिए जोरदार वकालत की तथा अपने स्वयं के वाहन और खर्चे से कश्मीर से कन्याकुमारी तक जागरूकता अभियान भी चलाया है। साथ ही उन्होंने एक वैश्विक अभियान का नेतृत्व करते हुए अमेरिका के सैन फ़्रांसिस्को से अटलांटा तक की सात हजार किमी की यात्रा भी की है। इसके अलावा भारत के कई राज्यों में पीड़ित बच्चों को मुफ़्त ग्लूकोमीटर और स्ट्रिप्स उपलब्ध कराकर उनके जीवन को बचाने का प्रयास भी किया है। उन्होंने इस अभियान के लिए कभी किसी से कोई दान स्वीकार नहीं किया। दोनों बहनों के भागीरथी प्रयासों से कई राज्यों ने सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ दी और गुजरात और राजस्थान सरकारों ने बच्चों में मधुमेह के निदान और उपचार के लिये सर्वप्रथम अपने-अपने राज्य में पहल शुरू की है ।


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