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भारत में कृषि का संकट सिर्फ समाज का संकट नहीं सभ्यता का संकट है - श्री पी साईनाथ

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11 May 26
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 भारत में कृषि का संकट सिर्फ समाज का संकट नहीं सभ्यता का संकट है - श्री पी साईनाथ

उदयपुर, जाने माने पत्रकार मेगसेसे पुरस्कार विजेता श्री पी साईनाथ ने रविवार को अशोक नगर स्थित विज्ञान समिति भवन में पांचवां प्रो आर एन व्यास स्मृति व्याख्यान दिया | “ भारतीय कृषि : असमानता का संकट” विषय पर केन्द्रित इस व्याख्यान में उन्होंने कहा कि भारत में कृषि का संकट मात्र समाज का संकट नहीं सभ्यता का संकट है | उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में किसानो की संख्या गिर रही है |


जापान में अगले पंद्रह सालों में कोई किसान नहीं रहेगा |वहां किसानो की औसत आयु 65- 70 वर्ष हो गयी है | इसलिए जापान को दुसरे देशों से लोगों को जापान में बसने की अनुमति देनी पड रही है | भारत में कहा जाता है कि 55 प्रतिशत जनसँख्या किसान है | किन्तु वास्तविकता इस से अलग है | मुख्य किसान जो साल में 180 दिन कृषि का कार्य करते हैं वे मात्र 8 प्रतिशत हैं | उसमे यदि सीमान्त किसानो की संख्या जोड़ें तो वह अठारह प्रतिशत है और सभी प्रकार के भूमिहीन किसान मिलकर यह संख्या 42 प्रतिशत हो जाती है | उन्होंने बताया कि 1961 से 1991 तक भारत में किसानो की संख्या बढ़ी किन्तु 1991 के बाद इसमें लगातार गिरावट आ रही है |


उन्होंने बताया कि सन 2000 के बाद बीस वर्षों में 150 लाख किसान खेती छोड़ चुके हैं | इस समय प्रतिदिन दो हज़ार किसान खेती छोड़ रहे हैं | इसका मुख्य कारण उत्पादन लागत में वृद्धि और कृषि उत्पादों का मूल्य निर्धारण बाज़ार के भरोसे छोड़ देना है | भारत सरकार की नीतियां पश्चिमी देशों की तरह निजी परिवार आधारित कृषि को समाप्त कर कॉर्पोरेट कृषि को बढ़ावा देने की है | इस से विस्थापन का संकट उत्पन्न हुआ है और कृषि की स्वायत्तता समाप्त हुई है | शहरीकरण बढ रहा है | ब्राजील जो 50 वर्ष पहले मात्र 12 प्रतिशत शहरी था उसमे अब मात्र 12 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र बचा है | अमरीका, यूरोपियन यूनियन और कनाडा जैसे देशों में भी किसानो की संख्या कम हो रही है | कनाडा में पिछले पचास सालों में किसानो की संख्या 65 प्रतिशत घट गयी है | सिर्फ अफ्रीका एक अपवाद है | उन्होंने कहा कि ये लोग कहाँ गए | इनकी जगह कौन आया ? उन्होंने बताया कि ये लोग मजदूर बन गए और इनका स्थान कॉर्पोरेट ने ले लिया | ग्रामीण ऋणन्ग्रस्तता के कारण लाखों किसान आत्म हत्या करने पर विवश हुए और किसानो की बेटियाँ वेश्यावृति पर मजबूर हुई | उन्होंने कहा कि किसानो और कृषि को बचाना देश की सभ्यता को बचाने के लिए बेहद ज़रूरी है | इसके लिए किसानो के समर्थन में गैर कृषक संगठनो और लोगो को संगठित होकर सामने आना पड़ेगा | संसद और विधान सभाओं में दस दिन के विशेष सत्र सिर्फ कृषि पर केन्द्रित आयोजित करने के लिए दबाव बनाना पड़ेगा जिसमे किसानो की भी भागीदारी हो यह सुनिश्चित करना पड़ेगा | उन्होंने कहा कि हाल में लगाये गए ट्रम्प टेरिफ के किसानो पर पड़े प्रभावों पर कोई चर्चा नहीं कर रहा है | कपास के किसानो पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है और उन्हें लागत मूल्य से कम कीमत पर कपास बेचना पद रहा है | मोदी सरकार ने कपास पर ड्यूटी एकतरफा 11 प्रतिशत कम कर दी | यह कपास किसानो पर आपराधिक आक्रमण है | इसी तरह से तमिलनाडु के चमड़ा उद्योग और आन्ध्र प्रदेश के सी फ़ूड उद्यूग पर भी भारी टेरिफ से असर पड़ा है | बीज के व्यापार पर बहु राष्ट्रिय कंपनियों का कब्ज़ा हो गया है | खाद की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है जिस से किसानो का सारा संसार उजाड़ रहा है | श्री पी साईनाथ ने आम नागरिकों से आव्हान किया कि वे सीधे किसानो से उत्पाद खरीदे और उनकी मदद करें | कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विद्या सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष श्री अजय मेहता ने कहा कि विश्व में हिंसा बढ़ रही है | विकास के इस मॉडल ने लोगों की आजीविका छीन ली है | नैतिकता का सवाल पीछे छूट गया है और मुनाफ़ा ही एक मात्र देवता है | उन्होंने महात्मा गाँधी के द्वारा लिखी पुस्तक हिन्द स्वराज का उल्लेख किया और उनके विकास के विचारों को प्रासंगिक बताया | कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्द लेखिका और समाज कर्मी डॉ कुसुम मेघवाल ने की | कार्यक्रम के प्रारम्भ में संयोजक प्रो हेमेन्द्र चण्डालिया ने प्रो आर एन व्यास का जीवन परिचय दिया और उनके अकादमिक एवं सामाजिक योगदान का उल्लेख किया | डॉ हिमांशु पंड्या ने मुख्य वक्ता का परिचय दिया और शंकर लाल चौधरी ने स्वागत उद्बोधन दिया | कार्यक्रम में डॉ हेमेन्द्र चण्डालिया की पुस्तक “द पॉवर ऑफ़ पेन” का अतिथियों ने लोकार्पण किया | डॉ. इति व्यास और डॉ. शंकर लाल वर्मा ने प्रो आर एन व्यास के सम्बन्ध में अपने संस्मरण सुनाये | धन्यवाद डॉ. मिनाक्षी जैन ने ज्ञापित किया | डॉ फरहत बनो , डॉ चन्द्र देव ओला और डॉ अलोक मिश्र ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये | कार्यक्रम में सुखाडिया विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ.वी सी गर्ग, नीलिमा खेतान, रमेश नंदवाना , प्रो सुधा चौधरी , राजेश सिंघवी , अरुण व्यास , सौरभ नरुका, रियाज़ हुसैन , मन्ना राम डांगी , आनंद भरद्वाज , हिम्मत सेठ , शान्ति लाल भंडारी , डी एस पालीवाल , कोटा से रवि जैन , भीलवाड़ा से व्यास परिवार के सदस्य श्रीमती मनोरमा व्यास, दिनेश व्यास, प्रो एल आर पटेल, बी एल जनवा, अशोक जैन मंथन , एपवा की अनेक सदस्य, विद्यार्थी , पत्रकार बुद्धिजीवी और समाजकर्मी उपस्थित थे | कार्यक्रम में समिति से जुड़े प्रो बी सी मेहता,प्रो नरेश भार्गव, प्रो आर एम् लोढ़ा और प्रो आर एस राठौर जिनका गत एक वर्ष में स्वर्गवास हो गया उन्हें स्मरण किया गया |


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