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“संग्रहालय मानव सभ्यता की आत्मा और एकता के जीवंत सेतु हैं” - डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़

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18 May 26
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“संग्रहालय मानव सभ्यता की आत्मा और एकता के जीवंत सेतु हैं” - डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़

उदयपुर । अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 2026 के अवसर पर आई.सी.ओ.एम. की थीम “विभाजित दुनिया को संग्रहालय एकजुट करते हैं” के अंतर्गत महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर के सिटी पैलेस संग्रहालय द्वारा “आर्ट इन डायलॉग: यूनाइटिंग द वॉइसेज़” शीर्षक से विशेष आयोजन किया गया।

इस अवसर पर फाउण्डेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अपने संदेश में कहा कि “संग्रहालय केवल धरोहरों के संरक्षक नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की आत्मा और एकता के जीवंत सेतु हैं। वे इतिहास, कला और संस्कृति के माध्यम से विभाजित विश्व को संवाद, समझ और सद्भाव का संदेश देते हैं। संग्रहालय नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और पहचान से जोड़ते हुए उन्हें समावेशी, शांतिपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण भविष्य निर्माण की प्रेरणा प्रदान करते हैं। संग्रहालय दिवस पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि ये ज्ञान और संस्कृति के पावन केंद्र मानवता को सदैव एकसूत्र में बांधते रहेंगे।”

फाउण्डेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि इस आयोजन में कला, संवाद और सृजन के प्रमुख प्रतिभागी कलाकारों में चित्तौड़गढ़ की दिव्या बंगड़, अहमदाबाद की जया सोलंकी, आबू रोड के डॉ. महेश कुमावत तथा जयपुर के दुर्गेश अटल एवं के. कृष्णा कुंदारा शामिल हुए। फाउण्डेशन के उद्देश्यों के अनुरूप इस विशेष पहल के तहत विभिन्न क्षेत्रों एवं विविध कला माध्यमों से जुड़े कलाकारों को एक साझा मंच प्रदान किया गया, जहाँ कला के माध्यम से सृजन, संवाद एवं सार्थक विचार-विमर्श का वातावरण निर्मित हुआ। उन्होंने कहा कि यह प्रेरणादायी गतिविधि इस विचार को सशक्त करती है कि “कला सीमाओं से परे एक ऐसी सार्वभौमिक भाषा है, जो विभिन्न स्वरों, समुदायों और कहानियों को एक साझा कैनवास पर जोड़ती है।”
 


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