इस थैरेपी को प्राकृतिक और पारंपरिक यूनानी चिकित्सा का हिस्सा माना गया था । लेकिन इसे यूनानी चिकित्सक के मार्गदर्शन का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए । यूनानी चिकित्सा में जमीन या मिट्टी में शरीर को डुबोकर की जाने वाली मुख्य थेरेपी को सोयल थैरेपी , मड थेरेपी , मिट्टी थैरेपी या पेलोथेरेपी कहते हैं, एक प्राकृतिक उपचार विधि है जिसमें त्वचा पर साफ, खनिज युक्त मिट्टी का लेप लगाकर की जाती हैं। मड थेरेपी सभी उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त है और अधिक उम्र के लोगों को फ़ायदा पहुँचा सकती है । चिकित्सा के लिए पहले साफ और उपजाऊ मिट्टी की शुद्धता, खनिज सामग्री और सूक्ष्मजीव सुरक्षा की जांच की जाती है ताकि पारंपरिक स्पा अनुप्रयोगों से परे सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित की जा सके।
निम्न मिट्टियां उपयोग में लाई जाती हैं __
1. काली मिट्टी__खनिजों से भरपूर, काली मिट्टी का उपयोग इसके चिकित्सीय फ़ायदों के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। यह रक्त संचार में सुधार करने, जोड़ों के दर्द को कम करने और त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए बेहतरीन है।
2. फुलर अर्थ (मुल्तानी मिट्टी)__इस प्रकार की मिट्टी का उपयोग आमतौर पर त्वचा की देखभाल में इसके तेल सोखने और सफ़ाई करने वाले गुणों के कारण किया जाता है। यह मुंहासे ठीक करने, त्वचा को चमकदार बनाने और सूजन कम करने में मदद करता है।
3. क्ले मड (मिट्टी)__ मिट्टी से बनी मड अपनी डिटॉक्स करने वाली खूबियों के लिए जानी जाती है। यह शरीर से ज़हरीले पदार्थ निकालने, त्वचा को कसने और सूजन को शांत करने में असरदार है।
मड थेरेपी की कई तकनीकें__
1. मड पैक्स__ मड पैक्स शरीर के खास हिस्सों, जैसे चेहरे, आँखों और पेट पर लगाए जाते हैं, ताकि सिरदर्द से राहत मिले, त्वचा की सेहत बेहतर हो और पाचन ठीक रहे।
2. मड बाथ__मड बाथ में पूरे शरीर को थेरेपी वाली मिट्टी में डुबोया जाता है, जिससे शरीर की गहराई से सफाई होती है, आराम मिलता है और त्वचा को पोषण मिलता है।
3. मड रैप्स__ मड रैप्स में शरीर को मिट्टी की एक परत से ढका जाता है, जिससे त्वचा टोन होती है, अतिरिक्त तेल निकल जाता है और आराम मिलता है।
मड थेरेपी के पीछे का विज्ञान और मड थेरेपी कैसे काम करती है?_ मिट्टी में गर्मी को रोककर रखने की बहुत ज़्यादा क्षमता होती है, जिसकी वजह से यह खून का बहाव बढ़ाने, दर्द से राहत देने और सूजन कम करने में असरदार होती है। मिट्टी में मौजूद खनिज त्वचा में समा जाते हैं, जिससे शरीर को अंदर से पोषण मिलता है। मिट्टी में ज़रूरी मिनरल्स होते हैं जो त्वचा के अंदर तक पहुँचते हैं और प्राकृतिक रूप से ठीक होने में मदद करते हैं। मिट्टी में निम्न मुख्य तत्व होते हैं_
1. मैग्नीशियम – तनाव और मांसपेशियों के खिंचाव को कम करता है।
2. सिलिका – त्वचा की लोच बढ़ाता है और बुढ़ापे के लक्षणों को कम करता है।
3. कैल्शियम – हड्डियों को मज़बूत बनाता है और रक्त संचार को बेहतर करता है।
4. आयरन – ऑक्सीजन पहुँचाने में मदद करता है और ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है।
5. सोडियम और पोटेशियम – शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखते हैं और कोशिकाओं के काम करने की क्षमता को बेहतर करते हैं।
मिट्टी थेरेपी के प्रमुख लाभ और उपयोग__
1. दर्द और सूजन में राहत__शरीर के तापमान को संतुलित करके उसे ठंडा करके सूजन , जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की अकड़न और गठिया और वात रोग के लक्षण कम करने में असरदार है। मिट्टी में मौजूद खनिज और इसकी ऊष्मा धारण क्षमता जोड़ों के दर्द,स्पॉन्डिलाइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस में फायदेमंद है।
2. विषहरण __यह मड थेरेपी ज़हरीले तत्वों और त्वचा के अतिरिक्त तेल को सोख लेती है, जिससे त्वचा साफ़ होती है और अंदरूनी अंग भी शुद्ध होते हैं और शरीर से पर्यावरण के प्रदूषण को हटाने में बहुत असरदार है साथ ही यह चयापचय को तेज करने में मदद करती है।
3. त्वचा का स्वास्थ्य__यह मड थेरेपी त्वचा को नमी और पोषण देती है, साथ ही मुँहासे, दाग-धब्बे और रूखेपन को भी कम करती है। इसका नियमित इस्तेमाल करने से त्वचा चमकदार और जवां दिखती है। यह अशुद्धियों को दूर करके और त्वचा और अंगों को फिर से ताज़ा करके शरीर की प्राकृतिक रूप से ठीक होने की प्रक्रिया को बढ़ावा देती है। मिट्टी का लेप त्वचा की बीमारियों को कम करने और त्वचा को निखारने में सहायक है।
4. पाचन में सुधार__ पेट पर मिट्टी की पट्टी लगाने से कब्ज, गैस और पेट दर्द से तुरंत राहत मिल सकती है।5. तनाव और चिंता __यह थेरेपी दिमाग को सुकून देती हैं और तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, मानसिक थकान को दूर करता है, और संपूर्ण सेहत को बेहतर बनाता है।
6. रक्त संचार बढ़ाता है__रक्त प्रवाह को तेज़ करके ऊतकों तक बेहतर ऑक्सीजन पहुँचने में मदद करती है। यह रक्तचाप को सही स्तर पर बनाए रखने में भी सहायक है।
उपचार की विधि__
1. मिट्टी का चयन__ साफ-सुथरी, कंकड़-पत्थर रहित और उपजाऊ मिट्टी का उपयोग करें या जमीन के 10 सेमी नीचे से ली गई मिट्टी हो।
2. पेस्ट तैयार करना__ मिट्टी को पानी में भिगोकर एक गाढ़ा पेस्ट (लेई) बनाते हैं।
लगाने की विधि __इस पेस्ट को शरीर के प्रभावित हिस्से (पेट, जोड़, या पूरे शरीर) पर मिट्टी को 1-2 इंच की परत में लगाया जाता है। पेस्ट को लगाने के बाद 5-10 मिनट में गर्म पानी से त्वचा को साफ़ करके धोना चाहिए, फ़िर मरीज़ को 20-45 मिनट आराम कराते हैं । आराम के समय हर्बल चाय पिलाना चाहिए ।
मड थेरेपी कितनी बार और कब करानी चाहिए?__इस थैरेपी को मौसमी के अनुरूप करते हैं जैसे __पित्त को संतुलित करने वाले (शीतल) मिट्टी के उपचार ग्रीष्म ऋतु के लिए उपयुक्त हैं, कफ को संतुलित करने वाले (गर्म) उपचार शीत ऋतु के स्वास्थ्य के लिए सहायक होते हैं। सेशन की आवृत्ति शारीरिक बनावट, स्वास्थ्य लक्ष्यों और स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करती है। कुछ व्यक्तियों को किसी विशेष रिट्रीट या चिकित्सीय कार्यक्रम के दौरान साप्ताहिक सेशन से लाभ होता है; जबकि अन्य को निरंतर सहायता के लिए दो सप्ताह में एक बार या महीने में एक बार सेशन पर्याप्त लगते हैं।
मड थेरेपी सेशन के बाद के परहेज़__थेरेपी के बाद 2-4 घंटे तक ज़ोरदार व्यायाम, ठंडे वातावरण में जाने और भारी भोजन से बचना चाहिए। आराम और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से उपचार के बाद ऊतकों का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
सावधानी__ यह एक प्राकृतिक और पारंपरिक यूनानी चिकित्सा है, लेकिन किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के लिए किसी यूनानी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेना चाहिए । मिट्टी से उपचार आमतौर पर सुरक्षित रहता है, फ़िर भी तीव्र बुखार, गंभीर निर्जलीकरण, खुले घाव या कुछ रक्त वाहिका संबंधी समस्याओं में इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। वात असंतुलन वाले व्यक्तियों को उपचार के बाद त्वचा में अधिक सूखापन महसूस हो सकता है और उन्हें तेल आधारित उपचार की आवश्यकता हो सकती है। गर्भवती महिलाओं और गर्मी के प्रति संवेदनशील व्यक्तियों को बचना चाहिए।