उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के अनुसंधान निदेशालय अर्न्तगत संचालित अखिल भारतीय समन्वित सिंचाई जल प्रबंधन अनुसंधान परियोजना के द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, वल्लभनगर में "कृषि में जल उत्पादकता बढाने के लिए एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण" का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परियोजना प्रभारी डॉ. के.के. यादव ने किसानों को भूजल बैंक बनाने हेतु भूजल पुनर्भरण स्थानों की पहचान कर विभिन्न भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण करने एवं उपलब्ध सिंचाई जल के बहु-स्तरीय उपयोग के साथ-साथ सिंचाई जल की गुणवत्ता का महत्व भी बताया। कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तौडगढ़ के प्रभारी डॉ. मनी राम ने मृदा परीक्षण करवाकर आवश्यक मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करके कम जल से ज्यादा पैदावार लेने के तरीकों के बारे में बताया। प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय, उदयपुर के डॉ. मनजीत सिंह ने भूजल पुनर्भरण संरचनाओं से सिल्ट निकलकर उनके रख रखाव के तरीकों के साथ साथ फव्वारा एवं ड्रिप पद्वति से सिंचाई द्वारा जल बचत करने की विधियों को विस्तार से बताते हुए फसलों की पैदावर बढाने के नवीन तरीकों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उद्यानिकी के प्रोफेसर एवं क्षेत्रीय निदेशक अनुसन्धान डॉ. श्रीधर सिंह लखावत ने सिंचाई जल प्रबंधन परियोजना द्वारा किये जा रहे अनुसंधान कार्यों की प्रशंसा करते हुए मेवाड़ के किसानों की जोत एवं सिंचाई जल की उपलब्धता के अनुसार सिंचाई प्रबंधन हेतु अनुसन्धान करने पर जोर दिया। उन्होंने फलोत्पादन हेतु ड्रिप फर्टिगेशन पद्वति से सिंचाई विषय पर किसानों को जानकारी दी एवं बताया कि मेवाड़ में फलोत्पादन की अपार संभावनाएं हैं जिससे पोषण सुरक्षा के साथ साथ किसानों को अच्छी खासी आमदनी भी होगी। वल्लभनगर कृषि अनुसन्धान उप केंद्र के तकनिकी सहायक श्री धनपाल कोठरी ने भी रबी एवं खरीफ मौसम में बीजोत्पादन एवं फसलों की वैज्ञानिक खेती की नवीनतम जानकारी दी ।