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मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में औद्योगिक परिदृश्य में आ रहा अभूतपूर्व बदलाव

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26 Feb 26
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जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश को निवेश एवं उद्योग में अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की मंशा है कि प्रदेश में उद्योगों के लिए बेहतर आधारभूत संरचनाएं, विश्व स्तरीय औद्योगिक पार्कों का विकास, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सहित विभिन्न नवाचारों से राजस्थान को देश में उद्योग का प्रमुख डेस्टिनेशन बनाया जाए। इसी क्रम में सरकार द्वारा औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 लाई जाएगी। इस नीति का मंत्रिमंडल द्वारा हाल ही में अनुमोदन किया गया है। इस नीति से राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी। साथ ही, इससे निवेश को प्रोत्साहन, रोजगार सृजन तथा सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास भी सुनिश्चित होगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को गति देने के लिए औद्योगिक पार्क की स्थापना महत्वपूर्ण है। औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति प्रधानमंत्री के राइजिंग, रिलायबल एण्ड रिसेप्टिव राजस्थान के दृष्टिकोण के अनुरूप प्रदेश में औद्योगिक निवेश के इको-सिस्टम को मजबूत करने का प्रयास है। ये प्रदेश की विकास यात्रा के इंजन साबित होंगे।

*औद्योगिक पार्कों के विकास हेतु चार मॉडल*
इस नीति के तहत निजी क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए चार विकास मॉडल निर्धारित किए गए हैं। मॉडल-ए के तहत पूर्णतः रीको द्वारा आवंटित भूमि पर विकास किया जाएगा। वहीं, मॉडल-बी के अंतर्गत औद्योगिक पार्क के लिए 80 प्रतिशत भूमि विकासकर्ता द्वारा अधिग्रहण की जाएगी एवं शेष 20 प्रतिशत भूमि रीको द्वारा निर्धारित दरों पर उपलब्ध होगी। इसी तरह, मॉडल-सी के तहत पार्क के लिए संपूर्ण भूमि की विकासकर्ता द्वारा व्यवस्था की जाएगी तथा मॉडल-डी पीपीपी मॉडल पर आधारित होगा। नीति के तहत निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्कों के लिए कम से कम 50 एकड़ क्षेत्रफल तथा न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी।

*नीति के तहत औद्योगिक प्रदूषण में होगी कमी*
इस नीति के अंतर्गत प्रथम 10 औद्योगिक पार्क डवलपर्स को सामान्य अवसंरचना विकास पर 20 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 100 एकड़ तक के पार्क हेतु 20 करोड़ रुपए, 100 से 250 एकड़ हेतु 30 करोड़ तथा 250 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल हेतु 40 करोड़ रुपए होगी। इस नीति के तहत हरित विकास को बढ़ावा तथा औद्योगिक प्रदूषण को भी कम किया जाएगा, इस हेतु सीईटीपी पर व्यय का 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति (अधिकतम 12.5 करोड़ रुपए प्रति पार्क) का प्रावधान किया गया है।

*औद्योगिक पार्क तक मिलेगी सड़क, पानी और बिजली की सुविधा*
औद्योगिक पार्कों की अवसंरचना के प्रोत्साहन हेतु सरकार द्वारा पार्क की सीमा तक जल एवं विद्युत की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, औद्योगिक पार्क तक सड़क एवं सम्पर्क मार्ग का निर्माण करवाया जाएगा। इस हेतु 60 प्रतिशत राज्य सरकार एवं 40 प्रतिशत व्यय विकासकर्ता द्वारा वहन किया जाएगा तथा इसमें राज्य सरकार का अधिकतम अंशदान 3 करोड़ तक होगा।

*राज निवेश पोर्टल से होगा औद्योगिक पार्क का अनुमोदन*
राज निवेश पोर्टल पर औद्योगिक पार्क स्थापना के लिए प्रस्तावित भूमि की जानकारी सभी के लिए उपलब्ध होगी। जिससे पारदर्शिता बढ़े एवं पात्र विकासकर्ता आवेदन कर सके। इस पोर्टल के माध्यम से आवेदकों को सिंगल विंडो क्लीयरेंस मिलेगी। जिससे आवेदन प्रक्रिया का समयबद्ध निस्तारण हो सके। इस नीति के तहत कैप्टिव नवीकरणीय ऊर्जा पर 7 वर्ष तक सौ प्रतिशत विद्युत शुल्क छूट, स्टाम्प शुल्क एवं कन्वर्जन शुल्क में 25 प्रतिशत छूट या प्रतिपूर्ति तथा प्लग-एंड-प्ले ऑफिस कॉम्प्लेक्स एवं कॉमन यूटिलिटी सेंटर हेतु रिप्स-2024 के अंतर्गत अतिरिक्त प्रोत्साहन भी सम्मिलित हैं।

*पीपीपी मॉडल से निजी क्षेत्र की बढ़ेगी भागीदारी*
इस नीति से प्रदेश के औद्योगिक अवसंरचना विकास में पीपीपी मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के सहयोग से निवेश बढ़ेगा तथा निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए उद्योगों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी। नीति के तहत विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्कों का विकास, भूमि-जल-ऊर्जा संसाधनों का वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग तथा लॉजिस्टिक्स सुविधाएं को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा उद्योगों के क्षेत्र में लिए जा रहे निर्णयों से प्रदेश में औद्योगिक क्रांति का नया युग शुरू हुआ है। सरकार द्वारा राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी, राजस्थान मिनरल पॉलिसी, रीको प्रत्यक्ष आवंटन नीति, डेटा सेंटर नीति, वस्त्र एवं परिधान नीति, राजस्थान पर्यटन इकाई नीति, एक जिला-एक उत्पाद नीति, एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति, नवीन खनिज जैसी अनेक नीतियां जारी की गई। साथ ही, राइजिंग राजस्थान के आयोजन से हुए 35 लाख करोड़ रूपये के एमओयू में से 8 लाख करोड़ रूपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में निरंतर हो रहे ये नवाचार ‘समृद्ध एवं सशक्त राजस्थान’ के संकल्प को गति दे रहे हैं।
 


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