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यात्रियों के लिए स्वच्छ और स्वास्थ्यकर चादरें उपलब्ध कराने हेतु मशीनीकृत लॉन्ड्री

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25 Apr 26
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यात्रियों के लिए स्वच्छ और स्वास्थ्यकर चादरें उपलब्ध कराने हेतु मशीनीकृत लॉन्ड्री

जयपूर। जयपुर मंडल, उत्तर पश्चिम रेलवे के सबसे बड़े मंडलों में से एक है, जहां से जयपुर स्टेशन से 30 से अधिक ट्रेनें चलती हैं और प्रतिदिन लगभग 128 ट्रेनें गुजरती हैं। जयपुर से चलने वाली ट्रेनों की संख्या को और बढ़ाने के लिए, खातीपुरा में अत्याधुनिक रखरखाव सुविधाओं के प्रावधान के साथ एक व्यापक योजना विकसित की गई है, जिसके शीघ्र ही चालू होने की संभावना है।
जयपुर मंडल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने में अग्रणी रहा है और इसमें स्वच्छ चादरें उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हाल ही में, जयपुर मंडल भारतीय रेलवे में पहला मंडल बना जिसने ट्रेन संख्या 12981/12982 (जयपुर-असारवा-जयपुर) के सभी एसी कोच यात्रियों के लिए कंबल कवर उपलब्ध कराए। इस पहल का उद्घाटन माननीय रेल मंत्री ने किया और यात्रियों से इसे बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इसी के आधार पर, हाल ही में शुरू की गई न्यू जलपाईगुड़ी से हावड़ा जाने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में भी सभी कोचों में कंबल कवर उपलब्ध कराए गए हैं।
प्रत्येक एसी कोच के यात्री को दो बेडशीट, एक फेस टॉवल, एक पिलो कवर, एक कंबल और एक तकिया वाला बेडरोल किट दिया जाता है। यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए, रेलवे प्रत्येक यात्रा के बाद बेडशीट, पिलो कवर, फेस टॉवल और कंबल कवर धोता है ताकि उन्हें साफ-सुथरा रखा जा सके। लॉन्ड्री में भाप आधारित धुलाई प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है, जो न केवल कपड़ों की पूरी तरह से सफाई सुनिश्चित करती है बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से कीटाणु रहित भी करती है, जिससे उच्चतम स्वच्छता मानकों के अनुसार रोगाणु और जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
इस सुविधा के लिए, रेलवे ने जयपुर के करतारपुरा में एक अत्याधुनिक मशीनीकृत लॉन्ड्री स्थापित की है, जिसकी क्षमता लगभग 15 टन प्रतिदिन है। लॉन्ड्री में 16 स्वचालित वाशिंग मशीन, स्वचालित फोल्डर वाली 5 स्वचालित कैलेंडरिंग मशीनें (धुले हुए कपड़ों को इस्त्री करने के लिए) और 5 ड्रायर के साथ-साथ वाटर सॉफ्टनर, एयर कंप्रेसर, बॉयलर और अन्य सहायक उपकरण जैसे आवश्यक सपोर्ट सिस्टम भी मौजूद हैं। इस लॉन्ड्री की सबसे अनूठी विशेषताओं में से एक यह है कि धुलाई के बाद, लिनेन को एआई आधारित लिनेन निरीक्षण और छँटाई सहायता प्रणाली (एलआईएसए) के माध्यम से संसाधित किया जाता है, जो स्वचालित रूप से गंदे और दागदार लिनेन का निरीक्षण और छँटाई करती है।
जयपुर मंडल की एक नई पहल के तहत, जयपुर से गुजरने वाली सभी ट्रेनों में एसी कोच के सभी यात्रियों को कंबल कवर की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है, जिससे लॉन्ड्री का काम बढ़ जाएगा।
सफाई, स्वच्छता और पर्यावरण के उच्च मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय लागू किए गए हैं। कपड़ों की गहन सफाई और प्रभावी कीटाणुशोधन के लिए भाप आधारित धुलाई प्रक्रिया का उपयोगए जिससे रोगाणु और जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। पर्यावरण के अनुकूल और जैव अपघटनीय डिटर्जेंट और रसायनों का उपयोग। अतिरिक्त उत्सर्जन को रोकने के लिए रसायनों का नियंत्रित और अनुकूलित उपयोग। उन्नत स्वचालित मशीनरी की स्थापना। चादरों की मशीनीकृत स्वचालित।
जयपुर मंडल ने पर्यावरण पर प्रभाव को कम करने और प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों का पालन करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसके तहत अपशिष्ट जल उपचार के लिए अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) की स्थापना, ताजे पानी की खपत कम करने के लिए उपचारित जल के पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग की योजना, ऊर्जा-कुशल बॉयलरों का नियमित रखरखाव, बॉयलर की चिमनी की ऊंचाई 100 फीट पर बनाए रखना और प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुसार उत्सर्जन, वायु की नियमित जांच वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए धूल संग्राहकों की स्थापना तथा लगभग 55 महिलाओं को लाभकारी रोजगार प्रदान करना, जिनमें से अधिकांश स्थानीय क्षेत्र से हैं, जिससे स्थानीय आजीविका और महिला सशक्तिकरण में योगदान मिलेगा।
जयपुर के करतारपुरा स्थित रेलवे लॉन्ड्री यात्रियों को स्वच्छ और स्वास्थ्यकर कपड़े उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारतीय रेलवे अपने यात्रियों के साथ-साथ अपने कर्मचारियों को भी कार्यस्थल पर स्वच्छ और स्वास्थ्यकर वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक प्रणालियों, भाप आधारित स्वच्छता और पर्यावरणीय स्थिरता पर विशेष ध्यान देने के साथ, यह सुविधा जिम्मेदार और यात्री.केंद्रित संचालन का एक आदर्श उदाहरण है। 


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