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दूधवाखारा-सादुलपुर रेलखंड के दोहरीकरण कार्य पूर्ण होने के साथ ही चूरू-सादुलपुर रेलमार्ग पूरी तरह दोहरीकृत

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30 Apr 26
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दूधवाखारा-सादुलपुर रेलखंड के दोहरीकरण कार्य पूर्ण होने के साथ ही चूरू-सादुलपुर रेलमार्ग पूरी तरह दोहरीकृत

जयपुर। रेल यात्रियों की संख्या तथा व्यस्त मार्गाे को ध्यान में रखते हुए रेलवे पर महत्वपूर्ण मार्गाे के दोहरीकरण का कार्य किया जा रहा है, जिससे अधिक रेलसेवाओं का संचालन किया जा सके ताकि यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा प्राप्त हो, अधिक ट्रेनों का संचालन सुनिश्चित हो एवं समय की बचत हो। राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और विलक्षण स्थापत्य के साथ धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चूरू-सादुलपुर (58 किलोमीटर) रेलमार्ग के मध्य दोहरीकरण कार्य पूरा किया गया है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन ने बताया कि उत्तर पश्चित रेलवे के महाप्रबन्धक श्री अमिताभ के निर्देशानुसार दूधवाखारा-सादुलपुर (30 किलोमीटर) रेलमार्ग के दोहरीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है। रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा 28 अप्रैल 2026 को इस रेलखड़ को रेल संचालन के लिए अनुमोदित किया गया है। इस दोहरीकरण कार्य के साथ ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और विद्युतीकरण कार्य भी सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए है। इसके साथ ही 58 किलोमीटर लंबे चूरू-सादुलपुर खंड का संपूर्ण दोहरीकरण कार्य, ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और विद्युतीकरण कार्य सहितए मात्र 2 वर्ष 3 महीने में पूरा कर लिया गया है। इस मार्ग के दोहरीकरण से लाइन केपसिटी और मोबिलिटी में वृद्वि होगी एवं परिचालन और अधिक सुगम होगा।
इस दोहरीकरण परियोजना के अंतर्गत पांच स्टेशनों पर हाई लेवल प्लेटफॉर्म तथा 3 सब-वे का भी निर्माण किया गया है। इस रेलमार्ग पर ट्रैक को 130 किमी प्रति घंटे की गति क्षमता के अनुसार तैयार किया गया है।
चूरू.सादुलपुर (58 किलोमीटर) रेलमार्ग के दोहरीकरण का कार्य 2023-24 में 469 करोड़ रूपए की लागत के साथ स्वीकृत किया गया था जिसे लगभग 2 वर्ष के रिकार्ड समय में पूरा किया गया है। इसके साथ ही यह उल्लेखनीय है कि चूरू-रतनगढ़ (43 किलोमीटर) रेलमार्ग के दोहरीकरण कार्य को भी 2 वर्ष में ही पूरा किया गया था। इस प्रकार उत्तर पश्चिम रेलवे के 2 महत्वूपर्ण रेलमार्गों के दोहरीकरण का कार्य लगातार 2 वर्षों में पूरा किया गया है। रतनगढ़ से चूरू होकर सादुलपुर तक रेलमार्ग के दोहरीकृत होने के बाद यह रेलमार्ग, राजस्थान, हरियाणा व अन्य उत्तर भारतीय राज्यों के साथ तीव्र रेल संचालन वाला महत्वपूर्ण रेल मार्ग बन जाएगा। दोहरीकरण के कार्य से इस क्षेत्र में व्यापारिक व सामाजिक सम्बन्ध प्रगाढ़ होगे।
रतनगढ़-चूरू-सादुलपुर दोहरीकरण के लाभ
चूरू, रतनगढ़ क्षेत्र का सीकर, बीकानेर रेवाडी, हिसार व अन्य राज्यों के साथ तीव्र व सुगम सम्पर्क का विस्तार होगा। जिससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा और रोज़गार के नये अवसर उत्पन्न होंगे। रोजगार व अन्य कार्यों के लिये प्रतिदिन आवागमन करने वालांे के लिये तीव्र व सुगम रेल सुविधा उपलब्ध होगी। आसपास स्थापित विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी। बीकानेर संभाग में होने वाले जिप्सम/लाइम स्टोन तथा फुड ग्रेन और फर्टिलाइजर के लदान हेतु सुगम रेल परिवहन उपलब्ध होगा। धार्मिक स्थल सालासर बालाजी, खाटूश्यामजी आने वाले श्रद्धालुओ की आसान यात्रा के लिये रेल नेटवर्क का विस्तार मिलेगा। क्षेत्र में सामाजिक व व्यापारिक सम्बंधों को मजबूती प्राप्त होगी तथा भारतीय सेना में कार्य कर रहे सैनिकों सहित सभी नागरिकों को आवागमन की सुविधा मिलेगी।
रेलवे द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ कर यात्रियों को अधिकाधिक सुविधाएं प्रदान करने तथा क्षेत्र में विकास के लिए निरंतर लक्ष्यानुसार कार्य किए जा रहे हैं। 


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