श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर शहर से संग्रहित ठोस कचरे का प्रबंधन संयंत्र(सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट) पूर्व में मंजूरशुदा गांव नेतेवाला से नरसिंहपुरा बारनी गांव में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के खिलाफ आज से खुला विरोध शुरू हो गया है। नरसिंहपुर बारनी तथा आसपास के लगभग आधा दर्जन गांवों, ढाणियों और चक आबादियों केग्रामीणों ने नरसिंहपुरा में गो-गोविंद गौशाला से प्रस्तावित संयंत्र स्थल की ओर जाने वाले मार्ग पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
धरना स्थल पर आज दोपहर महापंचायत हुई, जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि किसी भी सूरत में नरसिंहपुर बारनी गांव में यह संयंत्र नहीं लगने दिया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि संयंत्र लगने से ठीक वही खतरे यहां भी आम लोगों के जीवन और स्वास्थ्य को होंगे, जिनके खिलाफ नेतेवाला के लोग पिछले कई वर्षों से लगातार विरोध कर रहे थे।
महापंचायत के बाद लगभग दो दर्जन लोगों का प्रतिनिधिमंडल दोपहर को जिला मुख्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को बिंदुवार विस्तृत ज्ञापन सौंपा और संयंत्र स्थानांतरण के पीछे चल रहे “षड्यंत्र” का खुलासा किया। ज्ञापन देने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने साफ चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने चार दिन के अंदर नरसिंहपुर बारनी में संयंत्र लगाने का प्रस्ताव वापस नहीं लिया, तो 20 अप्रैल को नरसिंहपुर बारनी गांव से जिला मुख्यालय की ओर पैदल मार्च निकाला जाएगा और संयंत्र स्थल तक जाने वाला पूरा मार्ग बंद कर दिया जाएगा। साथ ही इसी मार्ग पर आज से अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू कर दिया गया है।
महापंचायत को गौ रक्षक दल नरसिंहपुर बारनी के संयोजक मैसी चौधरी हरिराम गोदारा, राकेश गोरा सरपंच, रामप्रताप मांझू पूर्व सरपंच, राजाराम बेनीवाल, महेंद्र खोथ, हंसराज बामनिया, मदन सोनी डायरेक्टर,राकेश ज्यानी, विनोद मांझू, कृष्णलाल बुरडक, काशीराम, पूर्व सरपंच श्रीराम बुरडक, सुनील रेवाड़, गौतम मांझू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जनप्रतिनिधियों और प्रतिष्ठित नागरिकों ने संबोधित किया।
षड्यंत्र का खुलासा
प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित षड्यंत्र है। वर्ष 2016 में ही नेतेवाला में संयंत्र लगाने की सरकारी मंजूरी मिल चुकी थी। केंद्र सरकार ने इसके लिए 78 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया था। अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), अन्य सभी स्वीकृतियां और दिल्ली की एक कंपनी को वर्क ऑर्डर भी जारी हो चुका था। मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने भी यहीं संयंत्र लगाने के आदेश दिए। पिछले 10 वर्षों से सरकारी स्तर पर सारी प्रक्रिया नेतेवाला में ही चल रही थी।इसी दौरान नेतेवाला में संयंत्र के लिए प्रस्तावित स्थल केसमीप नजदीक एक आवासीय कॉलोनी विकसित हो गई। इसके बाद अचानक वहां विरोध शुरू हुआ, जिस पर शासन-प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।विगत 5 मार्च को हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद जब निर्माण शुरू होने वाला था, तभी पिछले सप्ताह अचानक संयंत्र को नरसिंहपुर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव सामने आ गया।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि ग्राम चक 1-जी (छोटी) नेतेवाला के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने नरसिंहपुर बारनी की ग्राम पंचायत में लगभग 13 बीघा जमीन खरीदी। इसके बाद इस जमीन को ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र के लिए राज्य सरकार को समर्पित करने का प्रस्ताव पेश किया गया। साथ ही इन व्यक्तियों ने मांग की है कि नेतेवाला में पहले स्वीकृत और आवंटित जमीन उन्हें सौंप दी जाए।
नरसिंहपुर बारनी के ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया न केवल संदिग्ध है बल्कि इससे साफ संकेत मिलता है कि संयंत्र को अनावश्यक रूप से लंबित रखकर व्यक्तिगत लाभ कमाने के मकसद से यह प्रस्ताव जानबूझकर आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन के एक उच्च अधिकारी और नगर परिषद के एक अधिकारी के भी इस षड्यंत्र में शामिल होने का संकेत दिया गया है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा-हम किसी भी कीमत पर अपने गांव में यह संयंत्र नहीं लगने देंगे। स्वास्थ्य और पर्यावरण का सवाल है। अगर प्रशासन नहीं माना तो आंदोलन और तेज होगा।