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जोशी के बांसुरी वादन का छाया जादू , गौरी के कथक ने बांधा समां

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20 Feb 26
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जोशी के बांसुरी वादन का छाया जादू , गौरी के कथक ने बांधा समां

उदयपुर। पंडित चेतन जोशी के बांसुरी वादन और गौरी दिवाकर के कथक ने शुक्रवार को शिल्पग्राम में शास्त्रीय संगीत और नृत्य का ऐसा जादू बिखेरा कि क्लासिकल के रसिक वाह-वाह कर उठे। ये प्रस्तुतियां पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से शुक्रवार से शिल्पग्राम में शुरू हुए तीन दिवसीय ‘ऋतु वसंत’ उत्सव के पहले दिन शिल्पग्राम में छा गईं। कार्यक्रम का शुभारंभ थिएटर विशेषज्ञ एनएसडी, नई दिल्ली और एनसीजेडसीसी के पूर्व निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा, कलाविद प्रेम भंडारी, केंद्र के निदेशक फुरकान खान, कलाकार चेतन जोशी और गौरी दिवाकर ने दीप प्रज्वलित करके किया। केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने सभी का स्वागत किया।
इस संगीतमयी शाम की शुरुआत केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी के बांसुरी वादन से हुई। उन्होंने बांसुरी की धुन का आगाज राग रागेश्वरी में आलाप, जोड़ तथा झाला से किया। इसमें उन्होंने अति मंद्र सप्तक का भी अद्वितीय प्रयोग किया, जिसके लिए उनका नाम कई शोध प्रबंधों में भी आया है। संक्षिप्त आलाप के बाद उन्होंने विलंबित रूपक ताल में एक गत रखी, जिसमें विभिन्न प्रकार की लयकारियों का अद्भुत समावेश दिखाई दिया। तीन ताल की मध्य लय की बंदिश “झननन बाजे मोरी पायलिया” तथा बाद में द्रुत लय की स्वरचित बंदिश बजाकर आपने श्रोताओं का मन मोह लिया। अंत में उन्होंने वसंत ऋतु की हृदय को छूने वाली धुन सुना कर श्रोताओं के स्मृति पटल पर अमिट छाप छोड़ी।
पंडित जोशी के साथ तबले पर इंदौर के वरिष्ठ तबला वादक पंडित हितेंद्र दीक्षित ने सधी हुई संगत की।
पंडित जोशी को उनके शिष्य तथा पुत्र आंजनेय जोशी की बांसुरी पर सहयोग दिया। बता दें, मात्र 14 वर्ष के आंजनेय ने इसी वर्ष बांसुरी वादन में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। इन्हें भारत सरकार से राष्ट्रीय छात्रवृत्ति भी मिली है।

गौरी दिवाकर के कथक ने मोहा मन-

कार्यक्रम में प्रसिद्ध नृत्यांगना गौरी दिवाकर ने कथक से सुधी दर्शकाें का मन मोह लिया। उन्होंने नृत्य की शुरुआत सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा रचित सरस्वती वंदना के करते हुए वसंत ऋतु का स्वागत किया। वहीं, उन्होंने पंडित बिन्दादीन महाराज द्वारा रचित एवं पंडित बिरजू महाराज द्वारा संगीत से शृंगारित लक्षण गीत (अष्टपदी) की प्रस्तुति में श्रीकृष्ण की नृत्य क्रियाओं के साथ कथक के विभिन्न अंगों को बहुत ही खूबसूरती से उकेरा। इस पेशकश में गौरी के संग तनुजा बोरा, मानसी मेहता, निकिता पाराशर, तरुश्री राजोरा, रिचा बलूनी और संस्तुति राय ने अपनी लयकारी और हाव-भाव से दर्शकों का मन मोह लिया।
इसके साथ ही बहुमुखी कथक नृत्यांगना गौरी दिवाकर ने सौंदर्य और नारीत्व के प्रतीक ‘मुग्धा’ की प्रस्तुति से दिलों को छू लिया। इसमें राधा के अनुपम सौंदर्य और श्रीकृष्ण के प्रति उनके शाश्वत प्रेम की अनुभव यात्रा को बहुत ही सुंदरता से दर्शाते हुए दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। लाल बलवीर लिखित इस प्रस्तुति की संकल्पना, नृत्य संरचना और वेषभूषा जहां गौरी दिवाकर की है, वहीं इसे शुभा मुद्गल और अनीश प्रधान ने संगीतबद्ध किया। इसके साथ ही गौरी एवं ग्रुप ने भैरवी वंदना में देवी भैरवी का श्रद्धापूर्वक आह्वान  किया।

शनिवार के आकर्षण-

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक फुरकान खान ने बताया कि उत्सव के दूसरे दिन शनिवार को जयपुर के वायलिन वादक गुलजार हुसैन और राजस्थान के एकमात्र ख्यातनाम दिलरुबा वादक मोहम्मद उमर की वायलिन व दिलरुबा की अनूठी जुगलबंदी संगीत प्रेमियों के लिए खास तोहफा होगी।  वहीं, विश्व प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना कविता द्विबेदी की प्रस्तुति समां बांधेगी। कविता ने ओडिसी नृत्य में मुक्ति, पहचान, करुणा और आध्यात्मिक शांति जैसे विषयों को आधुनिक संदर्भों से बखूबी जोड़ा है।
 


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