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तेल बीज से सौंदर्य तक  - महिलाओं के लिए पाँच दिवसीय उद्यमिता प्रशिक्षण का हुआ आगाज  

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26 Feb 26
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तेल बीज से सौंदर्य तक  - महिलाओं के लिए पाँच दिवसीय उद्यमिता प्रशिक्षण का हुआ आगाज  

उदयपुर । राजस्थान विद्यापीठ के संघटक एग्रीकल्चर महाविद्यालय  के सभागार में महिलाओं के लिए “ऑयल-बेस्ड ब्यूटी एंड स्किन केयर प्रोडक्ट मेकिंग” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। महाविद्यालय द्वारा आयोजित चौथे प्रशिक्षण में 30 महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में व्यावहारिक कौशल अर्जित कर रही हैं।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आईआईओआर - आईसीएआर  के अनुसूचित जाति उपयोजना  परियोजना के अंतर्गत प्रायोजित है। कार्यक्रम का उद्देश्य तेल बीज आधारित कृषि उत्पादों को मूल्यवर्धित कर सौंदर्य एवं त्वचा देखभाल उत्पादों के रूप में विकसित करना है, ताकि महिलाएं घरेलू स्तर से उद्यम की शुरुआत कर सकें।

कुलपति प्रो शिव सिंह सारंगदेवोत के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा में आयोजित किया जा रहा है। कुलपति ने ’‘फार्म टू ब्यूटी’’ की अवधारणा को साकार करने की बात कही, जिसके माध्यम से खेतों की तकनीक और अनुसंधान को सीधे बाजारोन्मुख उत्पादों में बदला जा सके।

डॉ. रवि माथुर , निदेशक, आईआईओआर ने सभी प्रशिक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कृषि आधारित उद्यमिता, विशेषकर तिलहन क्षेत्र में, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बन सकती है। उन्होंने इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. गजेन्द्र कुमार माथुर ने कहा कि संस्थान मेवाड़ क्षेत्र के कृषक समुदाय को नवीनतम तकनीक से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं प्रशिक्षण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं कृषि सलाहकार प्रो. इन्द्रजीत माथुर ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम विश्वविद्यालय के उस दृष्टिकोण को साकार करते हैं, जिसके तहत समाज को ज्ञान और व्यावहारिक कौशल देकर दक्षिणी राजस्थान में आजीविका एवं करियर निर्माण के अवसर सृजित किए जा रहे हैं।

आगामी पाँच दिनों तक प्रतिभागी महिलाओं को ब्यूटी उद्योग के विशेषज्ञों द्वारा तेल आधारित सौंदर्य एवं स्किन केयर उत्पादों के निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और विपणन की बारीकियां सिखाई जाएंगी। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों को उद्यम स्थापना से संबंधित मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।

यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि कृषि नवाचार को नए आयाम देने का भी सशक्त प्रयास है।
 


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