यूथ मूवमेन्ट राजस्थान द्वारा दिनांक 25 से 27 फरवरी 2026 के मध्य चित्तोड़गढ़ में अयोजित किये जा रहे चित्तौड़गढ़ “साहित्य उत्सव 2026 ” के अर्न्तगत भारतीय लोक कला मंडल द्वारा कठपुतली के विविध कार्यक्रम जैसे बहरूपिया, नर्तकी, सर्कस, सांप-सपेरा आदि प्रस्तुत किये गए तो मण्डल के कलकारों ने भवाई नृत्य प्रस्तुत कर साहित्य उत्सव में चार चांद लगाए। इसी कड़ी में भारतीय लोक कला मण्डल द्वारा उदयपुर कि दि परफॉर्मेंस कल्चरल सोसाइटी के सहयोग से राष्ट्र भक्त पन्नाधाय के बलिदान पर अधारित नाटक “पन्नाधाय” का मंचन किया गया। चितौडगढ़ के किले में बनवीर की चालबाजी एवं सत्ता प्राप्ति की अभिलाषा एवं देषपूर्ण कृत्य को बहुत ही सुन्दर तरीके से प्रस्तुत किया गया। नाटक का प्रारम्भ बनवीर के दरबार में सोना और मोना के नृत्य से प्रारम्भ होता है तत्पश्चात सोना- मोना पन्नाधाय के कक्ष में आकर उदयसिंह को नृत्य के कार्यक्रम मे भैजने का अनुरोध करती है। पन्नाधाय द्वारा मना कर दिया जाता है। सामली (महल की नौकरानी) दौड़ते हुए आती है एवं सूचित करती है कि बनवीर ने महाराज विक्रमादित्य की हत्या कर दी है। पन्नाधाय राजकुमार को कीरत बारी की टोकरी में छिपाकर महल से बाहर निकालती है तथा दो सैनिक राय सिंह एवं विक्रम सिंह के साथ कुंभलगढ़ भेज देती है बनवरी अपनी तलवार लेकर पन्नाधाय के कक्ष में उदयसिंह की हत्या के करने प्रवेश करता है परन्तु उससे पहले ही पन्नाधाय ने उदयसिंह की शयया पर उसके पुत्र चंदन को सुला देती है और बनवरी उदयसिंह के स्थान पर चंदन की हत्या कर देता है।
नाटक दी परफॉर्मेंस के सचिव प्रबुद्ध पांडे द्वारा निर्देशित किया गया है तो नृत्य संरचना शिप्रा चर्टजी, वेशभूषा - अनुकम्पा लईक, रूप सज्जा गिताशा पांडे ने की तो नाटक में पन्नाधाय - ज्योति माली, सामली- रीना बागड़ी, सोना -सबा परवेज, मोना- महिमा शर्मा, राय सिंह -पियूश जैन, विक्रम सिंह - विक्रम सिंह, किरती बारी- दिव्यांशु नागदा, बनवीर - हुसैन आर.सी. ने अपने अभिनय से प्रभावित किया।
नाट्य प्रस्तुति को देखकर सभी साहित्यकार, संयोजक एवं दर्शक भाव विभोर हो गए तथा पन्नाधाय के बलिदान को यादकर स्वामी भक्ति एवं देश भक्ति की मिसाल को श्रद्धा से याद करने लगे।
यह सभी प्रस्तुतियां भारतीय लोक कलामंडल के 75 वें स्थापना दिवस के अवसर पर चित्तौड़गढ़ “साहित्य उत्सव 2026 ” में की गई।