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वल्लभ यूथ आर्गेनाइजेशन द्वारा होली रसिया फूल फाग महोत्सव में आज ब्रज में होली रे रसिया पर झूमे भक्त

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28 Feb 26
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वल्लभ यूथ आर्गेनाइजेशन द्वारा होली रसिया फूल फाग महोत्सव में आज ब्रज में होली रे रसिया पर झूमे भक्त

उदयपुर। वल्लभकुलभूषण वैष्णवाचार्य पूज्य पाद गोस्वामी 108 श्री व्रजराज कुमार जी महाराजश्री के सानिध्य में वल्लभ यूथ आर्गेनाइजेशन द्वारा होली के पावन अवसर से पूर्व शनिवार को कृष्णा वाटिका में भक्ति एवं उत्साह से ओतप्रोत ’’होली रसिया फूल फाग महोत्सव’’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर समस्त वैष्णव समाज एवं श्रद्धालुजनों ने होली के पारंपरिक रसिया, फूलों की होली और भक्ति संगीत के साथ ठाकुरजी की सेवा कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
महोत्सव का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें शहर के गणमान्य नागरिक लीलाधर पटेल, हरीश राजानी, सुनील व्यास, कुंदन सोनी एवं हेमंत चौहान ने पूज्य महाराजश्री का माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में उपस्थित भक्तों ने ‘श्याम रंग में रंगी होली’, ‘आज ब्रज में होली रे रसिया’ जैसे पारंपरिक भक्तिगीतों की कड़ी जोड़ते हुए सामूहिक कीर्तन किया, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।
संगठन मंत्री राकेश मूंदड़ा ने बताया कि इस महा-महोत्सव में नाथद्वारा से पधारे विशेष रसिया गान समूह ने अपनी मधुर प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। रसिया गान के साथ श्रीकृष्ण-राधा की मनोहारी नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसने ब्रज की होली की सजीव अनुभूति कराई। इसके पश्चात पुष्प वर्षा के साथ फूलों की होली खेली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के चरणों में प्रेम एवं भक्ति अर्पित की।
पूज्य व्रजराज कुमार जी महाराजश्री ने अपने आशीर्वचन में कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रभु श्रीकृष्ण के प्रेम, स्नेह और समर्पण का प्रतीक है। वैष्णव परंपरा में होली रसिया एवं फूल फाग का विशेष महत्व है, जो भक्त और भगवान के मधुर संबंध को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने युवाओं को संस्कृति, सेवा और सत्संग से जुड़े रहने का संदेश दिया।
इस धार्मिक आयोजन में वल्लभ यूथ आर्गेनाइजेशन के मनीष सोनी, मुकेश पारीख, राजेश मेहता, राकेश मूंदड़ा, यशवंत पारीख, विनोद दीक्षित, राजकुमार नागदा, टेकचंद एवं रमेश शर्मा सहित महिला शक्ति से राधा सोनी, मंजू मूंदड़ा, रचना, भूमिका, मीनाक्षी एवं निशा धाबाई ने सक्रिय सेवाएं प्रदान कर कार्यक्रम को सफल बनाया।
महोत्सव के अंत में ठाकुरजी की आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ समस्त श्रद्धालुओं ने आगामी होली पर्व को भक्ति, प्रेम और सद्भाव के साथ मनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि समाज में एकता, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना को भी सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।
 


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