विश्व जल दिवस के दिन जल पर हम संगोष्ठी,वाद विवाद ,नृत्य, गीत इत्यादि कार्यक्रम कर मनाते आए हैं। इस बार इस पूजन कार्यक्रम को 22 मार्च से पुरे सप्ताह मना रे हैं |(22 मार्च से 28 मार्च )ताकि अधिक से अधिक जल स्त्रोतों का पूजन हो सके | 2021 से इस दिवस को हम हमारे जल दाता अर्थात जल स्रोत कुआ, बावड़ी, हैंडपंप, ट्यूबवेल, नदी , तालाब, समुद्र,जलपात्र,मटकी,नल ,लोटा इत्यादि का पूजन इस दिवस पर करते आए हैं। मैंने मेरे बचपन में मेरे मामा स्वर्गीय श्री धर्मचंद जी बाफना को अपने खेत के कुएं की दीवार में स्थित छोटे से मंदिर की पूजा करते देखा है और उसके बाद एक रोठ अर्थात मोटी रोटी को प्रसाद रूप में वितरण करते देखा है। इस पूजन में जो हमारा जल दाता कुआ है उसके प्रति सम्मान और उसके संरक्षण का भाव प्रकट होता था। समय के साथ जब से घर-घर में नल आ गया है हमने इन जल स्रोतों का सम्मान करना और उनका संरक्षण करना बंद कर दिया है परिणाम स्वरूप वे कचरा पात्र के रूप में परिवर्तित हो रहे हैं या सदैव के लिए जमीदोज हो गए हैं । सभी में इन जल स्रोतों के प्रति सम्मान और संरक्षण का भाव को जागृत करने हेतु इस दिन को जल स्रोत सम्मान दिवस के रूप में मैंने प्रारंभ कराया है।अब पुरे सप्ताह मनाया जावेगा |
कैसे मनाए जल स्रोत सम्मान दिवस
1. हर वर्ष यह दिवस 22 मार्च को आता है|
2 . सबसे पहले अपने घर की छत की टंकी और जमीन की पानी की टंकी साफ करें, अपने स्कूल
घर के आसपास के जल स्रोतों की साफ सफाई पूजन से पूर्व अवश्य करें।
3. जल स्रोत जैसे हैंडपंप को साफ कर उसके चारों तरफ रंगोली बनाएं और उसे सजाये।
4. स्कूल की चार-पांच छात्राओं को पारंपरिक पनिहारिन बनाए तथा उन्हें मटकी या चरवी चर्बी
देवे।
5. एक छात्र या छात्रा को पूजा की थाली देवें ।
6. जल स्रोत पर स्वास्तिक का निशान लगाकर पत्र, ,पुष्प, फल इत्यादि से उसका पूजन करें ।
7. पूजन के अंत में कहें जल दाता आप हमें जीवन शुद्ध जल देते रहें, हम आपका सदैव संरक्षण करते रहेंगे। हम प्रतिदिन जल का सीमित उपयोग करने का भी आज के दिन संकल्प लेते हैं।
8. जल स्रोत के पास जाते समय या वहीं पर कोई भी पारंपरिक या कोई ,जल मंत्र , जल गीत अवश्य सामूहिक रूप से सब मिलकर गावें।
9. कार्यक्रम के वीडियो एवं फोटो अवश्य ले वे और उन्हें समाचार पत्र एवं टीवी चैनल में प्रसारण हेतु अवश्य भेजें।
10. इस हेतु आप मेरी यूट्यूब चैनल बूंद बूंद भूजल में विश्व जल दिवस अर्थात जल स्रोत पूजन दिवस गत वर्षो में कैसे मनाया गया उसे भी देख सकते हैं ।
11. इस कार्यक्रम हेतु किसी जनप्रतिनिधि सांसद ,विधायक ,पार्षद अथवा किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को अवश्य बुलाए और उनका आशीर्वचन अवश्य लेवे | इस कार्यक्रम का उद्देश्य हमारे जल स्रोतों को जो धीमे-धीमे समाप्त हो रहे हैं उन्हें पुनरस्थापित और पुनर्जीवित तथा संरक्षण करना है ताकि आने वाली पीढ़ी को जल संकट का सामना न करना पड़े है | इस हेतु अभी से आवश्यक निर्देश जारी करावें |