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स्वर साधना का नवम उत्सवः सुरों की सरिता में सराबोर हुआ कुंभा कला केंद्र

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30 Apr 26
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स्वर साधना का नवम उत्सवः सुरों की सरिता में सराबोर हुआ कुंभा कला केंद्र

उदयपुर। संगीत साधना और नारी शक्ति के समन्वय का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करते हुए स्वर लहरी का नवम स्थापना दिवस कुंभा कला केंद्र में गरिमामय एवं हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। सुर, ताल और भाव की अनुपम प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को संगीतमय रस में डुबो दिया।
संस्था की अध्यक्षा श्रीमती पुष्पा कोठारी ने बताया कि स्वर लहरी की स्थापना 7 फरवरी 2017 को स्वर्गीय यशवंत कोठारी की प्रेरणा से महिलाओं में संगीत के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उन्हें सशक्त मंच प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। वर्तमान में संस्था से 130 महिला सदस्य सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं, जो प्रत्येक माह की 7 तारीख को जनाब फैयाज एवं महेश के मार्गदर्शन में नियमित रियाज करती हैं।
संयोजिका श्रीमती रेखा मेहता ने जानकारी दी कि इस वर्ष का स्थापना दिवस 30 अप्रैल 2026 को संगीत जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों,डॉ. प्रेम भंडारी, डॉ. पामिल मोदी, श्रीमती रीना राठौड़, डॉ. निधि सक्सेना एवं मुकेश वाधवानी की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षका श्रीमती चेतना भाटी रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, गणपति वंदना रेखा मेहता एवं सरस्वती वंदना मंजु भाणावत  द्वारा प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात ममता कोठारी ग्रुप द्वारा प्रस्तुत थीम गीत ने कार्यक्रम की भावभूमि तैयार की। विभिन्न समूहों द्वारा प्रस्तुत “रूणीजी रा धणिया”, “गर्जत बरसत सावन”, “मेरे ढोलना सुन”, “मैं तो तुम संग नैन मिलाके”, “नाम गुम जाएगा”, “आओ हुजूर तुमको”, “मेरा रंग दे बसंती चोला”, “एक प्यार का नगमा”, “सांसों की माला पे सिमरूं” एवं “मोह मोह के धागे” जैसे गीतों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन पुष्पा लोढ़ा एवं उर्वशी सिंघवी ने प्रभावी ढंग से किया। आयोजन की सफलता में रेखा मेहता, मंजु भाणावत, पुष्पा लोढ़ा, कान्ता जोधावत, मधु मुणेत, मंजु सरूपरिया, निरोज जोशी, रेणु जैन, सविता कोठारी एवं रीता मेहता सहित पूरी टीम का सराहनीय योगदान रहा।
समारोह के अंत में विजयलक्ष्मी गलुंडिया ग्रुप द्वारा “वंदे मातरम्” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई तथा धन्यवाद ज्ञापन मंजु भाणावत ने किया। कार्यक्रम का समापन स्नेह भोज एवं पुनर्मिलन के संकल्प के साथ हुआ।


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