उदयपुर के सुखाड़िया विश्वविद्यालय स्थित बप्पा रावल सभागार में आयोजित नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह ने पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया। विश्व संवाद केंद्र, चित्तौड़ प्रांत द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में समाज और राष्ट्र निर्माण में पत्रकारों की भूमिका को गंभीरता से रेखांकित किया गया।

मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का दायित्व भी निभाती है। उन्होंने कहा कि पत्रकार को कभी भी सत्ता या किसी विचारधारा का “दरबारी” नहीं बनना चाहिए, बल्कि उसे निष्पक्ष रहकर सत्य को निर्भीकता से प्रस्तुत करना चाहिए।
उन्होंने भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि देश ने आर्थिक, तकनीकी और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। सड़कों, हवाई अड्डों, रेलवे और ऊर्जा के क्षेत्र में हुए विस्तार ने आम नागरिक के जीवन को सरल बनाया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना भारत की विशेषता रही है, जिसे पत्रकारों को उजागर करना चाहिए।

कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और प्रकृति के गहरे संबंध को भी प्रमुखता से रखा गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय जीवन दर्शन में नदियाँ, वृक्ष और प्राकृतिक तत्व केवल संसाधन नहीं, बल्कि आस्था का विषय हैं। ऐसे में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
मुख्य अतिथि प्रो. सुरेश अग्रवाल ने नारद मुनि के उदाहरण के माध्यम से पत्रकारों को बेबाक और स्पष्ट वक्ता बनने का संदेश दिया। वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. महावीर कुमावत ने समाज में व्याप्त भिन्नताओं को समाप्त कर एकता स्थापित करने में मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
समारोह का एक प्रमुख आकर्षण विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट पत्रकारों का सम्मान रहा, जिसमें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, छायांकन और स्तंभ लेखन के क्षेत्र में कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके कार्य की सराहना के साथ-साथ समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भी प्रतीक था।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, साहित्य प्रदर्शनी और संविधान आधारित चित्रों की प्रदर्शनी ने आयोजन को और भी समृद्ध बनाया। विशेष रूप से देवर्षि नारद के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र ने यह संदेश दिया कि संवाद, संतुलन और सत्यनिष्ठा ही आदर्श पत्रकारिता की पहचान है।
समापन में यह स्पष्ट हुआ कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक समारोह नहीं था, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों—निष्पक्षता, साहस और सामाजिक उत्तरदायित्व—को पुनः जागृत करने का एक प्रेरणादायी प्रयास था।