उदयपुर, वर्षीतप जैसी कठिन तपस्या पूर्ण होने की खुशी को गौसेवा से जोड़ते हुए बड़ोदरा-सूरत (गुजरात) की आराधिका सोनिका,सुजय खिवेसरा ने गौमाता के सातवें छप्पन भोग का लाभ लेकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। गुरु कमल चंद्र रोशन गौ सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित 108 गौशालाओं में चल रही छप्पन भोग श्रृंखला के तहत छठवां और सातवां भोग श्रद्धा, समर्पण और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
संस्थापक संजय जैन के अनुसार, छठवां छप्पन भोग सेमल (हल्दीघाटी) स्थित प्रेमराज विजया गौशाला में प्रातः 11 बजे आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान गौरव डॉ. जिनेंद्र शास्त्री ने की, जबकि मुख्य अतिथि मोतीलाल सेठिया एवं विशिष्ट अतिथि अशोक सेठिया रहे। इस दौरान अशोक सेठिया ने करधर गौशाला, वागोल (नाथद्वारा) में आयोजित होने वाले आगामी छप्पन भोग के लिए 51,000 रुपये की घोषणा भी की।
इसके पश्चात सातवां छप्पन भोग कदमाल स्थित श्री पार्श्वनाथ गौशाला में आयोजित किया गया, जिसमें सरपंच कालूलाल मेहता मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में भंवरलाल रांका, फतेहलाल रांका, मुकेश गुंदेचा सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. जिनेंद्र शास्त्री ने कहा कि “छप्पन भोग केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि गौमाता के प्रति हमारी सेवा, संवेदना और कर्तव्य का प्रतीक है। 108 गौशालाओं तक इस व्यवस्था को पहुंचाना समाज को जोड़ने वाला एक बड़ा अभियान है।” उन्होंने गौ आधारित कृषि, जैविक खेती और पर्यावरण संतुलन में गौसेवा की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।
दोनों आयोजनों में ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गौभक्तों ने भाग लिया। कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कदमाल के गौभक्तों ने 1500 से अधिक गौमाताओं वाली मिराज गौशाला में आगामी छप्पन भोग के लिए 1,71,000 रुपये का संकल्प लिया, जबकि वागोल की करधर गौशाला में 51,000 रुपये का योगदान घोषित किया गया।
कार्यक्रम संयोजन में जुड़े कार्यकर्ताओंकृतरुण भारद्वाज, राजू चारण, गजेंद्र सिंह, राजेंद्र प्रजापत, हेमंत गर्ग, तनिष जैन, दक्ष जैन, अमित भास्कर, आशीष मीणा सहित अनेक गौसेवकों ने तीन दिनों तक लगातार सेवा देकर आयोजन को सफल बनाया।
अंत में ट्रस्ट के अध्यक्ष मुकेश जैन ने सभी भामाशाहों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया, वहीं स्वीटी जैन ने सभी लाभार्थियों की अनुमोदना करते हुए इसे सेवा, संस्कार और आस्था का अद्भुत संगम बताया।