उदयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चित्तौड़ प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग (महाविद्यालय विद्यार्थी) का शुभारंभ सोमवार को फतेहनगर स्थित विद्या निकेतन माध्यमिक विद्यालय परिसर में हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ खमनोर के पूज्य संत एवं प्रसिद्ध कथाकार ज्ञानानंद जी महाराज, राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ रमेश अग्रवाल, वर्ग सर्वाधिकारी महेश आमेटा तथा सह प्रांत प्रचारक डॉ. धर्मेंद्र सिंह द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ किया गया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पूज्य संत ज्ञानानंद जी महाराज ने कार्यकर्ता की परिभाषा बताते हुए कहा कि “कार्यकर्ता वह है जिसमें कार्य तो दिखे, परंतु कर्ता नहीं।”
उन्होंने कहा कि समाज की आवश्यकताओं को समझते हुए प्रत्येक व्यक्ति को गुणवान, चरित्रवान एवं सेवा भाव से युक्त जीवन जीना चाहिए। उन्नत जीवन मूल्यों और श्रेष्ठ विचारों से ही व्यक्ति एवं राष्ट्र का विकास संभव है।
मुख्य वक्ता राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ रमेश अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का मूल उद्देश्य हिंदू समाज का संगठन करना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए डॉ हेडगेवार ने शाखा जैसी अद्वितीय कार्यपद्धति दी। शाखा के माध्यम से व्यक्ति निर्माण होता है, व्यक्ति निर्माण से समाज परिवर्तन और समाज परिवर्तन से राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में बढ़ती व्यक्तिवादी प्रवृत्ति को समाप्त कर सामूहिकता के भाव का जागरण करना अत्यंत आवश्यक है। संघ शिक्षा वर्ग स्वयंसेवकों के लिए साधना स्थल के समान है, जहां वे अनुशासन, संगठन, सेवा और सामूहिक जीवन के संस्कार प्राप्त करते हैं।
डॉ अग्रवाल ने अनेक प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से स्वयंसेवकों का प्रबोधन किया।
वर्ग में प्रशिक्षण -
चित्तौड़ प्रांत के इस संघ शिक्षा वर्ग (महाविद्यालय श्रेणी) में प्रांत के 8 विभागों एवं 27 जिलों से आए शिक्षार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। आगामी 15 दिनों तक चलने वाले इस वर्ग में प्रतिदिन प्रातः से रात्रि तक निर्धारित समयानुसार शारीरिक, बौद्धिक एवं विविध प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। वर्ग के समापन अवसर पर प्रतिभा प्रकट कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें शिक्षार्थी अपने प्रशिक्षण, अनुशासन एवं विविध कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
पॉलिथिन मुक्त वर्ग -
विशेष बात यह है कि पूरे वर्ग की व्यवस्थाएं स्वयं संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा सेवा भाव से संभाली जा रही हैं। भोजन, आवास, स्वच्छता, चिकित्सा, सुरक्षा, जल प्रबंधन सहित सभी व्यवस्थाओं का प्रबंधन स्वयंसेवक अनुशासित एवं आत्मीय वातावरण में निभा रहे हैं, जो संघ की कार्यपद्धति एवं सामूहिक जीवन का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। पर्यावरण संरक्षण के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग भी नहीं किया जायेगा।
यज्ञ एवं मंत्रोच्चार -
प्रात: विद्यालय परिसर स्थित मां सरस्वती मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ आयोजित हुआ। जिसमें प्रमुखजन द्वारा आहूति दी गई।
प्रदर्शनियां -
साथ ही शास्त्रों एवं जनजाति नायकों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया। वर्ग परिसर में लगाई गई विशेष प्रदर्शनी में राष्ट्र जागरण, सेवा, सामाजिक समरसता, ग्राम विकास, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण तथा संगठन विस्तार से जुड़े विविध विषयों को चित्रों एवं जानकारी के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।