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विधानसभाध्यक्ष देवनानी के नवाचारों पर आधारित पुस्तक का शीर्षक है संसदीय संस्कृति का उत्कर्ष नवाचारों के दो वर्ष

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09 Mar 26
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विधानसभाध्यक्ष देवनानी के नवाचारों पर आधारित पुस्तक का शीर्षक है संसदीय संस्कृति का उत्कर्ष नवाचारों के दो वर्ष

जयपुर। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी के दो वर्ष के कार्यकाल पर आधारित पुस्तक  "संसदीय संस्कृति का उत्कर्षः नवाचारों के दो वर्ष” का मंगलवार को जयपुर  के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में आयोजित गरिमामय समारोह में लोकार्पण करेंगे।

राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल पर राजस्थान विधानसभा में गत दो वर्षों से विधानसभा में किए गए महत्वपूर्ण नवाचारों, सुधारों और संसदीय परंपराओं के सुदृढ़ीकरण को समर्पित पुस्तक प्रकाशित करने की परम्परा शुरू की गई है।। इस अवसर पर राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित प्रदेश की संवैधानिक, राजनीतिक और सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक विशिष्ट लोग उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में राज्य के विधायकगण, संसदीय कार्य से जुड़े विशेषज्ञ, शिक्षाविद् तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक भी भाग लेंगे।

विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक राजस्थान विधानसभा में अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा पिछले दो वर्षों के दौरान किए गए नवाचारों, संसदीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने के प्रयासों तथा संसदीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाए गए कदमों का विस्तृत दस्तावेज है। पुस्तक में विधानसभा की कार्य संस्कृति को अधिक समृद्ध और सशक्त बनाने के लिए की गई नई पहलों को बताया गया है। देवनानी ने बताया कि यह प्रकाशन न केवल राजस्थान विधानसभा की कार्यप्रणाली के विकास की एक महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करता है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण तथा संसदीय परंपराओं के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस मौके पर संसदीय संस्कृति के महत्व, लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रासंगिकता तथा विधानमंडल की भूमिका पर भी विचार व्यक्त किए जाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पुस्तक  सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि पर भी चर्चा होगी। इस पुस्तक का पिछले दिनों नई दिल्ली में उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने लोकार्पण किया था। ये पुस्तके शोधार्थियों, विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों तथा संसदीय कार्यप्रणाली में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी।


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