राधे-राधे जपो चले आएंगे बिहारी, श्री रामजी की सेना चली, बाबा राम सीता राम सरीखे भजनों पर झूमते गाते श्रद्धालु, बग्गी में विराजमान महाराजश्री, सबसे आगे धर्म ध्वज लेकर चलते श्रद्धालु, भजन मंडलियां, कलश धारण किए हुए महिलाएं, ऐसा ही राजसी स्वरूप था गायत्री मंदिर खमेरा से निकली शोभायात्रा का । शोभायात्रा गायत्री मंदिर खमेरा, बस स्टेण्ड से होते हुए कथा स्थल उदाजी का गड़ा पहुंची । रास्ते में जगह-जगह पुष्पवर्षा से भव्य स्वागत किया गया । यात्रा मार्ग पर भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। रंग-बिरंगे प्रधानों में सुसज्जित श्रद्धालुओं ने भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। कलश यात्रा के सरस्वती विद्यालय में स्थित कथा स्थल पहुंचने पर विधि विधान के साथ पूजन अर्चन किया गया तथा राम कथा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए विशाल एवं सुव्यवस्थित पंडाल की व्यवस्था की गई थी जहां बैठने, पेयजल, छाया तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया। राम कथा के प्रथम दिवस पर कथा वाचक श्री श्री 1008 श्री लालीवाव पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर हरिओम दास जी महाराज ने अपने प्रेरणादाई प्रवचनों में भक्ति में शक्ति विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं संत महात्माओं का पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार चादर ओढ़ाकर,एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। सम्मान समारोह के दौरान आयोजक संस्था अध्यक्ष रामावतार पारीक, सीईओ राहुल पारीक, अंकित पारीक एवं समस्त विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।
आयोजन समिति ने बताया कि कथा स्थल पहुंचने पर संस्था निदेशक श्री महेन्द्रजी पुरोहित, संरक्षक श्री रामावतारजी पारीक एवं स्कूल परिवार द्वारा व्यासपीठ का पूजा अर्चना किया गया ।
अति हरि कृपा जाहि पर होई । पाऊँ देइ एहिं मारग सोई ।।
जिस पर श्री हरि की अत्यंत कृपा होती है, वही इस मार्ग पर पैर रखता है । व्यासपीठ पर वाचन करते हुए महाराजश्री ने कहा कि हरि भक्ति उस पारसमणि के समान है जो लोहे को स्पर्श करते ही सोने में बदल देती है । मनुष्य जब इस भक्ति रूपी पारसमणि को पा लेता है तो समस्त पापों से मुक्ति हो जाती है । ये बात गुरुवार को कथा वाचक महामण्डलेश्वर हरिओमदासजी महाराज ने सरस्वती विद्या मंदिर स्कल उदाजी का गड़ा में भक्तों को सम्बोधित करते हुए कही । वे 9 दिवसीय श्री राम कथा के पहले दिन दीप प्रज्जवलन, आरती और विश्व कल्याण की प्रार्थना के बाद प्रवचन दे रहे थे । आज कथा में मुख्यतः मंगलाचरण हुआ । कभी भी पाप में साथ नहीं देना चाहिए । बच्चों को भी स्पष्टवादी होना चाहिए । 6 वर्ष तक का बच्चा अगर कोई पाप करता है तो उसका फल पिता को भोगना पड़ता है और पत्नी जो पाप करती है उसका 50 फीसदी पाप भी पुरुष को ही लगता है लेकिन अगर पत्नी सदकर्म करती है तो उसका 1 फीसदी भी पुरुष को नहीं लगता । बच्चों का पाप, पत्नी का पाप 50 फीसदी और खुद का पाप ये है एक पुरुष की जिम्मेदारी ।
माँ-बाप की इज्जत करें - महाराज जी ने कहा कि धर्म की शुरुआत माँ बाप की इज्जत करने, संस्कृति की इज्जत करने से होती है । भक्ति का मतलब है कि आप अपने काम के प्रति ईमानदार रहे और भगवान की याद को हमेशा बनाए रखे यही सच्ची भक्ति है । महाराज जी ने कहा कि इस संसार में कितनी भी रिश्तेदारी जोड़ा लो श्मशान में जाने के बाद सब समाप्त हो जाता है, लेकिन कोई उसके बाद याद रखता है तो आपकी बुराई और नेकी को याद रखता है । उन्होंने बच्चों को सीख देते हुए कहा कि जीवन में अच्छी संगत तुम्हें महान बना देती है और बुरी संगत बेईमान बना देता है । महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य को हमेशा खुश रहना चाहिए । उसके मुख पर इस तरह की खुशी होनी चाहिए जैसे कि उस समय होती है जब वह अपना जन्मदिन मना रहा होता है । यह खुशी तभी हो सकती है जब मनुष्य सही काम करता हो, वह दूसरों की निंदा से दूर रहता हो ओर दूसरों की भलाई की ही सोचता हो । उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने दैनिक जीवनचर्या में श्री रामकथा और श्रीमद्भागवत गीता को अनुसरण करना चाहिए क्योंकि यह मनुष्य के हर क्षेत्र को प्रभावित करता है । इससे न केवल मन शांत और स्थिर होता है वरन् इससे शक्ति बढ़ती है । इसके साथ ही सायं भगवानजी को भोग एवं उसके बाद व्यासपीठ की आरती उतारी गई एवं प्रसाद वितरण किया गया ।
Banswara News
सरस्वती स्कूल में श्री रामकथा का शुभारंभ
लालीवाव मठ पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर श्री हरिओमदासजी महाराज की श्रीराम कथा गुरुवार को सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में प्रारंभ हुई
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