उदयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राहडा फाउंडेशन की ओर से गोकाष्ठ को लेकर चलाए जा रहे अभियान की सराहना की और इसे वृहद् स्तर पर चलाने का सुझाव दिया। फाउंडेशन ने अब आदिवासी महिलाओं को प्रेरित कर होलिका दहन में उपयोग होने वाली प्राकृतिक गाय के गोबर से बनी मालाओं का स्थानीय स्तर पर निर्माण करवाने की पहल की है।
उल्लेखनीय है कि जयपुर में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से आयोजित कार्यक्रम में राहडा फाउंडेशन ने गोकाष्ठ से पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्टॉल लगाई, जहां मुख्यमंत्री ने अवलोकन के दौरान गोकाष्ठ देखकर फाउंडेशन की संस्थापक अर्चनासिंह चारण की पहल को सराहा और कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कारगर साबित होगा। उन्होंने इसे वृहद् व अभिनव रुप में करने का सुझाव दिया।
फाउंडेशन की संस्थापक अर्चनासिंह चारण ने बताया कि मुख्यमंत्री की सलाह पर अब जिले के आदिवासी इलाकों में गोबर से बनी मालाओं का निर्माण करवाया जा रहा है जो होली दहन के दौरान होलिका को अर्पण की जाती है। इससे कई महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया होगा। यह प्रयास न केवल हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी प्रभावी संदेश है।
इस कार्य में स्थानीय आदिवासी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाया जा रहा है, जिससे उन्हें घर बैठे रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो रही है। श्रीमती चारण ने कहा कि ’‘लोकल फॉर वोकल’’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों, कौशल और श्रम को सम्मान देने का माध्यम है।
गोबर की माला का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
गोबर की माला शुद्धता और सात्त्विकता का प्रतीक मानी जाती है। भारतीय परंपरा में गाय को पूजनीय माना गया है और उसका गोबर पवित्र माना जाता है। होलिका दहन से पूर्व गोबर की माला अर्पित करना श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक मूल्यों से जुड़ा कर्मकांड है, जो हमारी सनातन संस्कृति की निरंतरता को दर्शाता है।
होली पर गौ-कास्ट अपनाने की अपील
राहड़ा फाउंडेशन ने नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं ग्रामवासियों से अपील की है कि आगामी होली पर्व पर होलिका दहन में वन की लकड़ी का उपयोग न करते हुए, पर्यावरण-अनुकूल गौ-काष्ठ (गाय के गोबर से निर्मित प्राकृतिक माला एवं सामग्री) का ही प्रयोग करें।
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मुख्यमंत्री ने राहडा फाउंडेशन के गोकाष्ठ अभियान को सराहा, कहा-पर्यावरण बचाने के लिए यह पहल महत्वपूर्ण
-अब होली से पूर्व गोबर की माला बनाकर आदिवासी महिलाओं को मिल रहा रोजगार
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