उदयपुर। न्यायपालिका में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में भारत सरकार की ओर से येाजना तैयार की गई है जिसके तहत सभी न्यायालयों के अभिलेखों का डिजिटलीकरण और क्लाउड आधारित डेटा रिपॉजिटरी का निर्माण किया जाएगा। जेलों और चयनित अस्पतालों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का विस्तार होगा व यातायात उल्लंघनों से परे ऑनलाइन न्यायालयों का विस्तार किया जाएगा। एआई और ओसीआर जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर मामलों का विश्लेषण और पूर्वानुमान होगा तथा भारतीय न्यायालयों को डिजिटल और पेपरलेस न्यायालयों में परिवर्तित करने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया द्वारा भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय न्याय विभाग न्यायालयों के डिजिटलीकरण के संबंध में राज्य सभा में पुछे गये अतारांकित प्रश्न पर अर्जुनराम मेघवाल विधि और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार न्यायिक प्रणाली में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी ) के उपयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है। वर्तमान में परियोजना चरण-3 (2023-2027) में है, जिसका वित्तीय परिव्यय ₹7,210 करोड है। 31 दिसम्बर 2025 तक 637.85 करोड़ से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण सभी न्यायालयों में पूरा हो चुका है। इस दौरान 29 आभासी न्यायालय स्थापित किए गए जिनमें 9.81 करोड़ चालान प्राप्त हुए और 8.74 करोड़ का निपटारा किया गया।
3, 240 न्यायालय परिसरों और 1,272 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा उपलब्ध करवाई गई जिससे 3.93 करोड़ से अधिक सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई। देश के 11 उच्च न्यायालयों में कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग प्रारंभ की गई तथा ई-फाइलिंग और ई-भुगतान प्रणाली के माध्यम से 1.03 करोड़ केस फाइल और ₹1.297 करोड़ से अधिक फीस जुर्माने का डिजिटल भुगतान हुआ।
उन्होंने बताया कि ई-न्यायालय सेवा मोबाइल ऐप के 3.5 करोड डाउनलो किए गए जिससे वकीलों और वादियों को वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध हो रही है। डिजिटल न्यायालय 2.1 में एआई आधारित अनुवाद और प्रतिलेखन सुविधा, पेपरलेस न्यायालय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उच्च न्यायालयों को हार्डवेयर, नेटवर्किंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई। जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के तहत अब तक ₹12,461.28 करोड़ जारी किए गए।
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सांसद गरासिया के प्रश्न पर जवाब: भारतीय न्यायालयों को डिजिटल और पेपरलेस न्यायालयों में परिवर्तित करने का लक्ष्य
-राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया के प्रश्न पर केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री ने दी जानकारी
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