जैसलमेर। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बेहतरीन ढंग से सशक्त बनाने की दिशा में देश ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से अब लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी। यह विधेयक लंबे समय से लंबित था एवं इसके पारित होने से देश में लैंगिक समानता को नई मजबूती मिली है। विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित रखने का प्रावधान इसे और अधिक समावेशी बनाता है।
इसी उपलक्ष्य में ”पंचायत से पार्लियामेंट तक- निर्णय में नारी, नव भारत की तैयारी” थीम पर सोमवार को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देशभर की मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि यह कानून महिलाओं को नीति-निर्माण की मुख्यधारा में लाकर भारत के लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाएगा।
इस क्रम में जैसलमेर जिले में भी नगर परिषद सभागार में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपनिदेशक, महिला अधिकारिता अशोक कुमार गोयल ने कहा कि यह कानून महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का सशक्त मंच प्रदान करेगा एवं समाज में समानता की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय महिला शक्ति की उल्लेखनीय भागीदारी रही। सामाजिक कार्यकर्ता मेघना सिंह, अध्यापिका रश्मि बालानी, कविता, पटवारी नीतू, ब्लॉक सुपरवाइजर मोनिका सहित सूर्या व्यास, गरिमा भाटिया एवं मनीषा व्यास सहित अनेक महिलाओं ने बढ़चढ़ कर उत्साहपूर्वक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर महिलाओं में जागरूकता, नेतृत्व क्षमता और निर्णयात्मक भूमिका को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि नारी शक्ति अब केवल सहभागिता तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में खड़ी है।
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