जैसलमेर । अतिरिक्त जिला कलक्टर परसा राम ने जैसलमेर जिले के सभी उपखंड अधिाकारियों, पुलिस अधिकारियों, तहसीलदारों एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया एवं मई को पीपल पूर्णिमा पर होने वाले संम्भावित बाल विवाहों की प्रभावी एवं आवश्यक रोकथाम के लिए बेहतर ढंग से पुख्ता इन्तजाम किया जाना सुनिश्क्षित करें, इसमें किसी भी प्रकार की कोत्ताही नहीं बरतें। उन्होंनें बताया कि 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया आखातीज एवं 01 मई को पीपल पूर्णिमा पर्व पर विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अबूझ सावों के साथ बाल विवाहों के आयोजन की संभावनाएँ रहती हैं। उन्होंने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2000 के तहत बाल विवाह कानूनी अपराध है। जिसकी रोकथाम के लिए आवश्यक दण्डात्मक कार्यवाही किये जाने के प्रावधान हैं जिससे बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोका जा सकें।

        उन्होंने बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम के लिए ग्राम एवं तहसील स्तर पर पदस्थापित विभिन्न विभागों के कार्मिकों, वृत्ताधिकारी- थानाधिकारी, पटवारियों भूअभिलेख निरीक्षकों- ग्राम पंचायत सदस्यों- ग्राम विकास अधिकारियों कृषि पर्यवेक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं- महिला सुरक्षा सखीः शिक्षकों नगरीय निकाय के कर्मचारियों जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचो एवं वार्ड पंचों के माध्यम से बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2000 के प्रावधानों का व्यापक प्रचार प्रसार कर आमजन को जानकारी कराते हुए जन जागृति उत्पन्न करने के साथ जन सहभागिता और चेतना जागृत कर समाज की मानसिकता एवं सोच के सकारात्मक परिवर्तन के लिए कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए है। साथ ही उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों, उपखंड मजिस्ट्रेटों को निर्देशित किया कि बाल विवाहों की प्रभावी रोकथाम के लिए अपने अपने क्षेत्रों में समुचित कार्यवाही सुनिश्चित कर बाल विवाह की सूचना प्राप्त होने पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा-6 की उप धारा 16 के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करें।

       बाल विवाहों के आयोजन होने की स्थिति में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 200 की धारा 1 के तहत नियुक्त बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों उपखंड मजिस्ट्रेट की जबावदेही सुनिश्चित की गई है। जिनके क्षेत्र में बाल विवाह सम्पन्न होने की घटना होती है। उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

     संभावित बाल विवाहों की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्य योजना के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर गठित विभिन्न सहायता समूह, महिला समूह, स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, महिला सुरक्षा सखी, साथिन सहयोगिनी के ग्रुप को सक्रिय किया जाए। विवाह सम्पन्न कराने में ऐसे सहयोगी व्यक्ति या समुदाय यथा हलवाई, बैण्ड बाजा, पण्डित, बाराति, टेन्ट वालों एवं ट्रान्सपोर्ट्स इत्यादि से बाल विवाह में सहयोग नहीं करने का आश्वासन लेना एवं उन्हे कानून के बारे में जानकारी देना साथ ही इसी तरह जन प्रतिनिधियों एवं प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ चेतना बैठकों का आयोजन करना एवं ग्राम सभाओं में सामूहिक रूप से बाल विवाह के दुष्प्रभावों के बारे में चर्चा करना एवं रोकधाम की कार्यवाही करना।

     इसी प्रकार बाल विवाह की रोकथाम के लिए किशोरियों, महिला समूहों, स्वयं सहायता समूहों एवं विभिन्न विभागों के कार्यकर्ताओं जैसे स्वास्थ्य, वन, कृषि, समाज कल्याण, शिक्षा विभागों इत्यािद के साथ समन्वय बैठक आयोजित कर कार्मिकों को बाल विवाह होने पर निकट के पुलिस स्टेशन में सूचना देने के लिए पाबंद करना। वही विवाह के लिए छपने वाले निमन्त्रण पत्रों में वर वधु की आयु का प्रमाण प्रिन्टिंग प्रेस वालो के पास रहे अथवा निमन्त्रण पत्र पर वर वधु की जन्म तिथि प्रिन्ट करने के लिए प्रिन्टिंग प्रेसों को पाबन्द किया जाए।

      अक्षय तृतीया एवं पीपल पूर्णिमा जैसे अबूझ सावों पर जिला एवं उपखण्ड कार्यालयों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाए जो 24 घण्टे क्रियाशील रहेगें एवं नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर सार्वजनिक स्थानों पर चश्पा करने के निर्देश दिए गए है। वही बाल विवाह की रोकथाम के लिए 181 कॉल सेन्टर पर एवं  पुलिस नियंत्रण कक्ष 100 नम्बर पर कॉल कर कभी भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।

     इसी प्रकार विद्यालयों में बाल विवाह के दुष्परिणामों एवं इससे संबंधित विधिक प्रावधानो की जानकारी दिये जाने के लिए निर्देश दिये एवं सामूहिक चर्चा से मिली जानकारी के आधार पर गांव एवं मोहल्लों के उन परिवारों में जहां बाल विवाह होने की आशंका हो, समन्वित रूप से समझाईश का प्रयास करे एवं आवश्यक हो तो कानून द्वारा बाल विवाह को रोका जावे। 

Source: