नए कानून में सालाना रोजगार की कानूनी गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया श्रीगंगानगर, 19 जनवरी। यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार विकसित भारत- रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 (वीबी-जी रामजी) लेकर आई है। यह अधिनियम लाने की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी देने के लिए लाया गया था, लेकिन मकसद में पूर्ण सफल नहीं हो पा रहा था। मनरेगा के तहत अधिकांश कार्य गांव या क्षेत्रीय विकास योजनाओं में एकीकरण के बिना अलग-थलग करके किए गए।
इसमें अस्थायी सड़कों, आधी-अधूरी जल संरचनाओं या बिना योजना के मिट्टी के कार्य होते थे, जिनका लंबी अवधि में कोई आर्थिक या सामाजिक लाभ नहीं होता था। जांच-पड़ताल की सुदृढ़ व्यवस्था नहीं होने के कारण नकली और डुप्लीकेट जॉब कार्ड, फर्जी लाभार्थी, मनगढ़ंत हाजिरी रजिस्टर और श्रमिकों को आंशिक भुगतान या पूरा वेतन न देने जैसी कमियां सामने आती थीं। जनता के पैसे का सही उपयोग नहीं हो पा रहा था। सोशल ऑडिट की प्रक्रिया भी प्रभावी नहीं थी। प्रशासनिक कार्यों के लिए केवल 6 प्रतिशत खर्च की अनुमति होने से योजना का बेहतर क्रियान्वयन संभव नहीं हो पाया। मनरेगा के काम खेती के मेन सीजन में भी चलने के कारण किसानों को मजदूर नहीं मिल पाते थे। कानून में बेरोजगारी भत्ते और देरी से मजदूरी भुगतान पर मुआवजे के प्रावधान केवल कागजी बनकर रह गए थे।
अब नए वीबी-जी राम जी अधिनियम-2025 में इन सब कमियों को दूर कर नई खूबियों से सुसज्जित बनाया गया है। नए कानून में सालाना रोजगार की कानूनी गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। फसल बुवाई और कटाई के समय श्रमिकों की कमी न हो, इसके लिए राज्य सरकार 60 दिनों का कार्य विराम घोषित कर सकती हैं। इससे किसान एवं श्रमिक हितों में संतुलन बना रहेगा। योजना के तहत जल संबंधी, मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा संबंधी, आजीविका अवसंरचना संबंधी और आपदाओं से निपटने संबंधी ठोस कार्य करवाए जा सकेंगे। इसमें जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल ऐप और एआई जैसी तकनीकों का उपयोग कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। हर छह महीने में कार्यों का डिजिटल तथ्यों के साथ सोशल ऑडिट अनिवार्य होगा।
इस अधिनियम में एक डिजिटल, बहुस्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली की व्यवस्था की गई है, जिसमें निश्चित समय सीमा और जिला लोकपालों की व्यवस्था भी की गई है। इस अधिनियम के तहत वेतन का भुगतान हर हफ्ते करना अनिवार्य होगा। दो हफ्ते से अधिक देरी होने पर स्वतः मुआवजा मिलेगा। प्रशासनिक व्यय की सीमा को बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है ताकि जमीनी स्तर पर पर्याप्त कर्मचारी, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और निगरानी क्षमता सुनिश्चित हो सके।
इस अधिनियम में एक टिकाऊ और जवाबदेह वित्तीय मॉडल का प्रावधान किया गया है। पहले श्रम बजट की कोई तय सीमा नहीं होती थी। अब उसकी जगह हर साल के लिए एक स्पष्ट और तय बजट निर्धारित किया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि काम सीमित कर दिया गया है। लोगों की मांग के अनुसार काम देने की व्यवस्था पहले की तरह बनी रहेगी। कुल आवंटन में वृद्धि की गई है, जिससे राज्यों को मनरेगा औसत की तुलना में लगभग 17 हजार करोड़ का अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद है। यह एक सहकारी संघवाद का मॉडल है। राज्यों की 40 प्रतिशत भागीदारी से जवाबदेही बढ़ेगी।
स्वास्थ्य मिशन जैसी कई सफल योजनाएं इसी मॉडल पर चल रही हैं। काम अब सप्लाई-आधारित और प्लान-आधारित होगा। पीएम गतिशक्ति से जुड़ने के कारण अब गांव में पानी और स्थायी सड़कों जैसे वही काम होंगे जिनकी वास्तव में आवश्यकता है। यह नया कानून सुनिश्चित और बेहतर आजीविका सुरक्षा देगा। टिकाऊ, उच्च-गुणवत्ता वाली ग्रामीण संपत्तियां सृजित करेगा। तकनीक आधारित पारदर्शिता से भ्रष्टाचार समाप्त करेगा। जवाबदेही के साथ सहकारी संघवाद मजबूत करेगा। इस योजना को राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा प्राथमिकताओं से जोड़ेगा। ग्रामीण रोजगार नीति को विकसित भारत के रोडमैप के साथ जोड़ने का माध्यम बनेगा। यह कानून ग्रामीण रोजगार की एक मजबूत गारंटी और विकसित भारत की एक मजबूत आधारशिला बनेगा। इससे राजस्थान को भी भरपूर लाभ मिलेगा।
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विकसित भारत- रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम 2025
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