उदयपुर। मनोरोग के प्रति लोगों में जागरुकता नहीं होने से यह रोग निरंतर बढ रहा है।
मानसिक बीमारी को सामान्य बीमारी समझना सबसे बडी गलती है इसलिए इसके प्रति गंभीर रहना जरुरी है।आशाधाम आश्रम प्रांगण में विश्व मानसिक स्वास्थ्य पखवाडा के तहत आयोजित कार्यक्रम में डाक्टर सुरेश गोचर ने यह बात कही।डॉ गोचर ने कहा कि आज के समय में मनोचिकित्सा के क्षेत्र में लोगों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है, जिसका सबसे बड़ा कारण मानसिक बीमारी के प्रति लोगों को जानकारी नहीं होना है।
लोग मानसिक बीमारी को एक सामान्य बीमारी समझते हैं व अन्य भ्रांति के रुप में लेते हैं।
बीमारी को छुपाने के कारण मानसिक रोगी को समय पर इलाज नहीं मिलता है, जिसके कारण यह बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप धारण कर लेती है जो सालों तक दवाई लेने पर भी ठीक नहीं होती है इसलिए हमें समाज में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता लाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति में मानसिक बीमारी से संबंधित लक्षण दिखने पर तुरंत मनोचिकित्सा विभाग में डॉक्टर से संपर्क कर इलाज चालू करना चाहिए।
परिवार वालों को भी मानसिक रोगी के प्रति सहानुभूति रखना अति आवश्यक है।विशिष्ट अतिथि एडवोकेट निर्मल पंडित ने कहा कि आश्रम में रहने वाले लाभार्थियों की अच्छी सेवा हो रही है और इलाज भी मिल रहा है।
सिस्टर डेमियन के जाने के बाद भी आश्रम का संचालन विधिवत रूप से और अच्छे से चल रहा है जो खुशी की बात है।
यहां पर जो भी लाभार्थी निवास कर रहा है उन सभी का समय पर इलाज होकर ठीक होने के बाद उनको पुनः वापस घर भेजा जा रहा है जो एक नेक कार्य है।यह कार्यक्रम आश्रम में निवासरत बेसहारा लावारिस मानसिक लाभार्थियों के साथ सिस्टर डेनिसा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर तथा संस्थापिका स्वर्गीय सिस्टर डेमियन की मूर्ति पर माल्यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम में आश्रम में निवासरत लाभार्थियों और स्टाफ ने मिलकर डांस और गीत प्रस्तुत किया तथा प्रश्नोत्तरी भी हुआ।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के तौर पर एके गौड़, सोशल हेल्थ वर्कर अंकित सोलंकी, गजेंद्र सिंह राठौड़ तथा अक्षय श्रीमाली ने अपने विचार व्यक्त किए। आश्रम में होने वाली विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले लाभार्थियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार वितरित किए गए।
कार्यक्रम के अंत में भेरुलाल जी ने सभी का धन्यवाद अर्पित किया। संचालन मोहनगिरी गोस्वामी द्वारा किया गया।