जैसलमेर । राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार ट्रांसफार्मेटिव ट्यूजडे के अन्तर्गत माह नवम्बर, 2026 की थीम ‘‘ अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाओ, अपनी सुरक्षा के लिए मजबूती से खड़े रहो।
जहां शिक्षा होती है, वहां कोई बच्चा असुरक्षित नहीं होना चाहिए।’’ विषय पर जिला एवं तालुका स्तर पर विभिन्न विद्यालयों में सचिव श्री ललित पुरोहित, चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अधिवक्तागण मदनसिंह, मयंक व्यास, तथा पीएलवी विक्की, अनिल कुमार, कैलाश कुमार, पदमसिंह, गुलाब कंवर, अभिषेक, मनीषा, पुष्पा तथा प्रेमी आदि ने जिले भर के विद्यालयों में विधिक जागरूकता कार्यक्रम व विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किये।
कार्यक्रम में बालक- बालिकाओं को सम्बोधित करते हुए संदेश प्रसारित किया कि बच्चे एक सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला हैं और उनके अधिकारों तथा सुरक्षा के प्रति जागरूकता उनके समग्र विकास और कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बच्चों को सरल भाषा में जानकारी देते हुए बताया कि बच्चों का अपनी सुरक्षा हेतु सतर्क रहते हुए शिक्षा हेतु प्रवेश का अधिकार, निःशुल्क शिक्षा का अधिकार, सुरक्षित विद्यालय अवसंरचना का अधिकार, योग्य शिक्षकों का अधिकार, भेदभाव और उत्पीड़न से संरक्षण, विद्यालय प्रबंधन समिति की भूमिका, आपातकाल में क्या करें? पोक्सो एक्ट, आदि कानूनी प्रावधानों के बारे में बताया गया।
निष्कर्ष रूप में रालसा सुरक्षित स्कूलों के लिए पीआईएल, कानूनी नोटिस और बच्चों की शिकायतों के माध्यम से लड़ता है, सहायता करता है तथा अधिकारों की रक्षा करता है।
आपका जीवन महत्वपूर्ण है - सुरक्षित स्कूल की मांग कीजिए। निःशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, सुरक्षित स्कूल भवन, शौचालय, पेयजल और खेल मैदान उपलब्ध कराने का प्रावधान करता है।
यदि स्कूल सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हैं, तो राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण / जिला विधिक सेवा प्राधिकरण निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराते हैं।
बालकों को हर प्रकार के नशों से दूर रहने तथा सामाजिक बुराइयां यथा मृत्यु भोज, बाल विवाह, दहेज प्रथा आदि से सतर्क व जागरूक रहने का आह्वान किया।
इसके बावजूद भी कभी दुर्घटना या ऐसी किसी भी तरह की अप्रिय घटना होने पर बच्चे कभी भी 1098 चाईल्ड लाईन अथवा नालसा 15100 हेल्पलाईन पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
किसी बालक से बाल श्रम लिया जा रहा हो तो इसकी जानकारी अपने अध्यापक, पुलिस से कर सकते हैं या विद्यालयों में स्थापित दीदी का बक्सा में बच्चे अपनी शिकायत गुप्त रूप से डाल सकते हैं जिनमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आवश्यक कार्यवाही एवं सहायता की जाएगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बाल दुर्व्यवहार रोकने और उसका समाधान करने तथा पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम प्राधिकरण पूर्व में भी आयोजित करता रहा है तथा सतत् जागृति के क्रम में भविष्य में भी विधिक जागरूकता कार्यक्रम विभिन्न विषयों को लेकर आयोजित किये जाते रहेंगे।