उदयपुर। देवेंद्र धाम में मेवाड़ के गोगुंदा निकट सेमटाल में जन्मे विश्व संत उपाध्याय पुष्कर गुरु की जयंती श्रद्धा और धूमधाम से मनाई गई।
इस अवसर पर मेवाड़-मारवाड़ के अलावा सूरत, अहमदाबाद, मुम्बई, , गुरुग्राम, दिल्ली, चंडीगढ़, लुधियाना सहित देश के कोने-कोने से सैकड़ों की संख्या में गुरु भक्त उपस्थित हुए।समारोह का शुभारंभ भक्तामर जाप एवं मंगलाचरण के साथ हुआ।
इसके बाद श्राविका संघ, सोहन कुंवर महिला संघ, पुष्प भक्ति ग्रुप , जैन दिवाकर महिला मंडल , गुरु अंबेश महिला मंडल, आचार्य देवेंद्र महिला मंडल, एवं युवा संघ द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी गईं।कार्यक्रम डॉ. सुरेंद्र मुनि के संयोजन में संपन्न हुआ, जिसमें शहर के प्रतिष्ठित नागरिकों, पार्षदों के साथ लोकप्रिय विधायक ताराचंद जैन, महापौर पारस सिंघवी, पूर्व महापौर रजनी डांगी, पूर्व जिला प्रमुख मधु मेहता, श्रावक संघ के रोशनलाल जैन, दिनेश हिंगड़, हिम्मत बडाला, दिनेश चोरड़िया, रमेश खोखावत, संतोष मेहता, समारोह अध्यक्ष सुकनराज धारिवाल, समारोह के गौरव डी.सी. छाजेड, अनिल जैन देवीचंद भंडारी उपस्थित रहे।साध्वीवृंद डॉ. दिव्यप्रभा, महासती शीतलजी, प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि आदि संतों ने गुरु पुष्कर के जीवन-दर्शन पर प्रकाश डालते हुए उनके बाल्यकाल से अंतिम समय के संथारा तप, अलौकिक मांगलिक, ध्यान-साधना, विचरण क्षेत्र, प्रवचन शैली एवं समाधि का विस्तार से वर्णन कर वंदनाएं समर्पित कीं।समारोह में उपस्थित हजारों की संख्या में जैन समुदाय ने जयकारों से समूचे प्रांगण को गुंजायमान कर दिया।
उदयपुर स्थित सभी सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संभाला।वक्ताओं ने बताया कि गुरु पुष्कर ने अपने शिष्य समुदाय को सशक्त रूप से तैयार किया, जिनके शिष्य आज भी भारत भर में धर्म प्रचार-प्रसार में संलग्न हैं।
उनका रचित साहित्य सर्व समाज में प्रचलित और प्रेरणादायी है। उनके आशीर्वाद से उनके शिष्य आचार्य देवेंद्र मुनि जी जैन समाज में अत्यंत प्रतिष्ठित रहे हैं।