भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान,
इंदौर
(आईआईटी
इंदौर)
और
सर
पदमपत
सिंघानिया
विश्वविद्यालय
(एसपीएसयू),
उदयपुर
ने
संयुक्त
रूप
से
11–12 सितंबर,
2026 को
एसपीएसयू,
उदयपुर
में
“एग्रीएक्सचेंज:
स्टार्टअप,
प्रौद्योगिकी
हस्तांतरण
एवं
व्यावसायीकरण
को
गति
प्रदान
करना”
विषय
पर
दो
दिवसीय
कार्यशाला
का
आयोजन
किया।
आईआईटी इंदौर के एग्रीहब द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय
सोयाबीन
अनुसंधान
संस्थान,
इंदौर
(आईसीएआर-एनएसआरआई),
भारतीय
कृषि
अनुसंधान
परिषद–केंद्रीय
कृषि
अभियांत्रिकी
संस्थान,
भोपाल
(आईसीएआर-सीआईएई)
तथा
उन्नत
कंप्यूटिंग
विकास
केंद्र,
पुणे
(सी-डैक)
के
सहयोग
से
आयोजित
इस
कार्यशाला
में
किसान
उत्पादक
संगठनों,
कृषि-तकनीकी
नवउद्यमों,
नवोन्मेषकों,
उद्योग
प्रतिनिधियों,
शिक्षाविदों,
सरकारी
हितधारकों
तथा
निवेशकों
ने
भाग
लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवीन कृषि समाधानों के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण,
खेत
स्तर
पर
उनके
क्रियान्वयन
तथा
व्यावसायीकरण
को
गति
प्रदान
करना
था।
साथ
ही,
वास्तविक
कृषि
चुनौतियों
के
समाधान
के
लिए
उद्यमिता
और
विभिन्न
क्षेत्रों
के
बीच
साझेदारी
को
प्रोत्साहित
करना
भी
इसका
प्रमुख
उद्देश्य
रहा।
कार्यशाला में मुख्य वक्तव्य भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय
कृषि
अनुसंधान
संस्थान,
हैदराबाद
की
प्रधान
वैज्ञानिक
डॉ.
चुंदुरी
शारदा
ने
दिया।
इस
अवसर
पर
इलेक्ट्रॉनिक्स
एवं
सूचना
प्रौद्योगिकी
मंत्रालय
के
संयुक्त
सचिव
श्री
के.
के.
सिंह,
कृषि
एवं
किसान
कल्याण
मंत्रालय
के
निदेशक
(डिजिटल
कृषि)
श्री
रवि
रंजन
सिंह,
एसपीएसयू,
उदयपुर
के
माननीय
अध्यक्ष
डॉ.
संजय
सिन्हा,
एफआरएसए,
एसपीएसयू
के
प्रो-प्रेसिडेंट
प्रो.
(डॉ.)
प्रसून
चक्रवर्ती
तथा
आईआईटी
इंदौर
के
एग्रीहब
की
प्रधान
अन्वेषक
प्रो.
अरुणा
तिवारी
सहित
अनेक
प्रतिष्ठित
वक्ताओं
ने
अपने
विचार
साझा
किए।
कृषि क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकियों पर प्रकाश डालते हुए श्री के.
के.
सिंह
ने
बड़े
पैमाने
पर
अपनाए
जाने
से
पहले
स्वदेशी
कृषि
नवाचारों
को
बौद्धिक
संपदा
अधिकारों
के
माध्यम
से
संरक्षित
करने
की
आवश्यकता
पर
बल
दिया।
उन्होंने
कहा,
“हमें
बड़े
पैमाने
पर
विस्तार
से
पहले
स्वदेशी
कृषि
नवाचारों
को
भारतीय
और
अंतरराष्ट्रीय
पेटेंट
व्यवस्थाओं
के
माध्यम
से
संरक्षित
करने
की
आवश्यकता
है।”
डॉ.
संजय
सिन्हा,
एफआरएसए
ने
जमीनी
स्तर
से
जुड़े
कृषि
हितधारकों
के
लिए
समान
और
न्यायसंगत
लाभ
सुनिश्चित
करने
के
महत्व
पर
बल
देते
हुए
कहा,
“हमें
कृषि
के
जमीनी
आधार—किसानों,
प्राथमिक
उत्पादकों
और
प्रजनकों—के
लिए
मूल्य
का
समान
और
न्यायसंगत
वितरण
सुनिश्चित
करना
होगा।”
उन्होंने
एसपीएसयू
के
शिक्षकों
और
विद्यार्थियों
को
कृषि
क्षेत्र
में
रोबोटिक्स,
जैव-प्रौद्योगिकी
तथा
कृत्रिम
बुद्धिमत्ता
और
मशीन
लर्निंग
के
अनुप्रयोगों
की
संभावनाओं
का
पता
लगाने
के
लिए
भी
प्रोत्साहित
किया।
प्रो.
प्रसून
चक्रवर्ती
ने
कृत्रिम
बुद्धिमत्ता
की
परिवर्तनकारी
भूमिका
पर
जोर
देते
हुए
कहा,
“कृत्रिम
बुद्धिमत्ता
का
उपयोग
उन्नत
कृत्रिम
बुद्धिमत्ता
एवं
मशीन
लर्निंग
अनुसंधान
को
व्यावहारिक
क्षेत्रीय
अनुप्रयोगों
से
जोड़कर
कृषि-तकनीकी
नवउद्यमों
को
गति
प्रदान
करेगा।”
‘एग्रीएक्सचेंज’ के माध्यम से आईआईटी इंदौर और एसपीएसयू का उद्देश्य अनुसंधान,
नवाचार,
उद्यमिता,
उद्योग
तथा
जमीनी
स्तर
के
हितधारकों
के
बीच
संबंधों
को
और
सुदृढ़
करना
है,
ताकि
संभावनाशील
कृषि-तकनीकी
समाधानों
को
प्रयोगशाला
से
खेत
और
बाजार
तक
पहुंचाने
की
प्रक्रिया
को
गति
दी
जा
सके।