भारतीय संस्कृति विश्व की पहली और सम्पूर्ण संसार द्वारा वरण करने योग्य है, आदरणीय वंदनीय संस्कृति है। जो सारे संसार को अपना परिवार कुटुम्ब मानती है। भारतीय धर्म, अध्यात्म, ज्ञान, योग, कला, संस्कृति, नृत्य, संगीत, परम्परा की प्रतिष्ठा सम्पूर्ण संसार में है।

संगीत आदि काल से ही मनुष्य के साथ जुड़ा हुआ है हमारे तत्व दर्शी ऋषि, महर्षि संगीत के लाभों से संसार को भलीभांति परिचित करा गये। उन्होंने साम वेद की ऋचाओं को गाया और जाना कि संगीत विद्या भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में निःसंदेह सरसता उत्पन्न करने वाली है।

वास्तव में भारत नाम ही संगीत मय है भा (भाव, नृत्य) र (राग गायन) त (ताल वादन) से परिपूर्ण भारत.... इसलिए भारत का संगीत देश विदेश के पर्यटकों को बहुत प्रभावित करता है।

दक्षिण भारत के प्रमुख संगीत समारोह :. दक्षिण भारत में कर्नाटक संगीत की पारम्परिक कला संस्कृति की समृद्ध विरासत का प्रदर्शन देखने समझने व आनंद लेने के लिए कला प्रेमी पर्यटक यहां आते हैं।

तिरूवैयारू (तंजौर) तमिलनाडु में लोकप्रिय संत संगीतज्ञ त्यागराज की स्मृति में कर्नाटक संगीत समारोह आयोजित किया जाता है तथा मद्रास संगीत समारोह मार्गा जी महोत्सव चैन्नई में आयोजित किया जाता है। कर्नाटक संगीत गायन के साथ घटम, मृदंगम, खंजरी व अन्य वाद्ययंत्रों की जुगल बंदी देखने सुनने बड़ी संख्या में कला प्रेमी पर्यटक उपस्थित होते हैं।

शब्द सीमा स्थान अभाव के कारण केवल पर्यटन की दृष्टि से कुछ ही प्रांतों के प्रमुख संगीत समारोह के नाम दे रहा हूँ... उत्तर भारत में संगीत समारोह : हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रमुख संत स्वामी हरिदास जी की स्मृति में स्वामी हरिदास संगीत समारोह वृद्धावन, संगीत सम्राट की स्मृति में तानसेन समारोह ग्वालियर में , खजूराहो नृत्य व संगीत समारोह छतरपुर में , संकट मोचन संगीत समारोह वाराणसी , डोवर लेन संगीत समारोह कलकत्ता , सप्तक संगीत समारोह अहमदाबाद, श्रावण महोत्सव उज्जैन, महाकाल संगीत समारोह उज्जैन, मैहर संगीत समारोह, जालंधर के हरवल्लभ संगीत समारोह में संगीत का आनंद लेने अनगिनत पर्यटक आते हैं।

मध्यप्रदेश संगीत समारोह में सबसे अग्रणी राज्यो में से एक है यहां समय समय पर भारत भवन,उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत नाटक अकादमी, मधुकली, अभिनव कला परिषद, कला समय, गुंदेचा बंधुओं द्वारा ,संस्कार भारती व अन्य संस्थाओं द्वारा रविन्द्र भवन हिन्दी भवन, मानस भवन में अनेक संगीत समारोह आयोजित होते हैं।

ग्वालियर में तानसेन समारोह : खजूराहो नृत्य समारोह, मैहर का उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत समारोह, उज्जैन में कालीदास समारोह, श्रावण मास में आयोजित संगीत समारोह श्रावण महोत्सव, कुमार गंधर्व संगीत समारोह, अभिनव कला परिषद, मधुवन द्वारा आयोजित गुरु वंदना महोत्सव, बसंतोत्सव, बरखा महोत्सव, महाकाल उत्सव पंडित ओम प्रकाश चौरसिया द्वारा स्थापित तथा भारत रत्न पंडित रविशंकर जी द्वारा संरक्षित मधुकली का लाल मणि मिश्र संगीत समारोह व षोडशी संगीत समारोह मध्य प्रदेश में उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत नाटक अकादमी द्वारा समय समय पर विशेष आकर्षक समारोह जैसे दुर्लभ वाद्ययंत्र पर दुर्लभ वाद्य विनोदआदि।

उल्लेखनीय है कि पंडित ओम प्रकाश चौरसिया के निर्देशन में भारत रत्न पंडित रविशंकर जी के संरक्षण में स्थापित संस्था मधुकली द्वारा पंडित लालमणि मिश्र संगीत समारोह, भारत की सोलह वर्ष की प्रतिभा शाली संगीत साधक बेटियों पर आधारित षोडशी संगीत समारोह तथा उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत नाटक अकादमी भोपाल व सर रतन टाटा ट्रस्ट मुम्बई द्वारा छिंदवाड़ा में आयोजित समागम संगीत समारोह में कोटा की शास्त्रीय गायिका आस्था सक्सेना को तथा भारत भवन भोपाल में आरंभ संगीत समारोह, तथा मधुकली द्वारा आयोजित लालमणि मिश्र संगीत समारोह में कोटा की शास्त्रीय गायिका डॉ 0 संगीता सक्सेना शास्त्रीय गायन के साथ मुझे तबला वादन के लिए मंचासीन होने का अवसर प्राप्त हुआ।

जहां स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में पर्यटकों से हमारा संवाद हुआ।

ताज महोत्सव : धार्मिक सांस्कृतिक प्रदेश उत्तर प्रदेश में पर्यटकों के आकर्षण के लिए बनारस का संकट मोचन संगीत समारोह , गंगा महोत्सव, ध्रुपद मेला वाराणसी, ताज महोत्सव, वृद्धावन का स्वामी हरिदास संगीत समारोह, अयोध्या में मृदंग महर्षि स्वामी भगवान दास डॉ, स्वामी पागलदास स्मृति संगीत समारोह मेरठ में नौचंदी मेले में संगीत समारोह आदि प्रमुख हैं।

महाराष्ट्र गोवा : महाराष्ट्र में सवाई गंधर्व भीम सेन संगीत महोत्सव पूना, वाणगंगा महोत्सव मुम्बई, एलोरा अजंता महोत्सव, छत्रपति संभाजी नगर, पुणे महोत्सव, संगीत शंकर दरबार, नांदेड़, इंटरनेशनल जैज फेस्टिवल मुम्बई, सनबर्न फेस्टिवल मुम्बई, गोवा, पंडित दीनानाथ मंगेशकर फेस्टिवल गोवा, पंडित किशन महाराज स्मृति संगीत समारोह पूना आदि प्रमुख हैं।

पर्यटन की दृष्टि से राजस्थान एक अग्रणी राज्य है यहां के महल हवेलियां, नाथद्वारा के प्रभु श्रीनाथ जी कोटा के मथुरेश जी, पुष्कर तीर्थ, लोक देवता श्री रामदेव जी, खाटू श्याम जी, मेहदींपुर बालाजी, कोटा में गोदावरी धाम, चम्बल, श्री मेहरानगढ़ म्युजियम ट्रस्ट, श्री राव माधोसिंह म्युजियम ट्रस्ट राष्ट्रीय दशहरा मेला कोटा, बूँदी महोत्सव, कोटा महोत्सव, थार महोत्सव आदि में आयोजित संगीत समारोह पर्यटकों के लिए अत्यन्त आकर्षक होते हैं।

पर्यटन की दृष्टि से राजस्थान की लोक कला मांड , जोधपुर लोक कला महोत्सव, घूमर महोत्सव, गवरी, सहरिया नृत्य व शास्त्रीय संगीत के समारोह अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। शास्त्रीय संगीत की दृष्टि से राजस्थान संगीत नाटक अकादमी मेहरानगढ़ म्युजियम ट्रस्ट, स्वर सुधा जोधपुर, श्री राव माधोसिंह म्युजियम ट्रस्ट द्वारा आयोजित महाराव बृजराज सिंह स्मृति संगीत समारोह पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

संगीत समारोह में मुझे भी कलाकार एवं कहीं कहीं पर्यटक के रूप में शामिल होने के अवसर मिले लास एंजेल्स, कनाडा,इंग्लैंड,नेपाल, मुम्बई, वृद्धावन, भोपाल, उज्जैन,शुजालपुर, छिंदवाड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, सिंहस्थ महाकुंभ,जयपुर, जोधपुर, अयोध्या,उदयपुर, लखनऊ,हरिद्वार आगरा, दिल्ली ,हल्द्वानी, नैनीताल, इंदौर सहित अनेक समारोह में प्रस्तुति देने के लिए तथा वरिष्ठ कलाकारों को सुनने के लिए पर्यटक रूप में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। जहां दूर दूर से लोग लाइव कार्यक्रम सुनने देखने आते थे।

भारतीय संगीत की प्राचीन गायन विधा ध्रुपद के संरक्षण एवं प्रचार प्रसार हेतु प्रसिद्ध ध्रुपद गायक द्वय गुंदेचा बंधुओं (उमाकांत और रमाकांत गुंदेचा) द्वारा स्थापित ध्रुपद संस्थान मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय आवासीय गुरुकुल है ।राजस्थान में प्रख्यात ध्रुपद गायक पंडित लक्ष्मण भट्ट तैलंग द्वारा सन् 2001 में इंटरनेशनल ध्रुवपद-धाम ट्रस्ट (ध्रुपद धाम) की जयपुर में स्थापना की गई ।इस संस्था द्वारा आयोजित समारोह, पद्म भूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट की संस्था द्वारा पंडित मनमोहन भट्ट संगीत समारोह जयपुर में आयोजित किया जाता है जहां बड़ी संख्या में रसिक दर्शक पहुंचते हैं।

पर्यटन के दौरान अनेकानेक संगीत रत्नों से मुलाकात हुई जिनमें भारत रत्न एवं पद्म पुरस्कारों से अलंकृत हैं - पंडित रविशंकर जी, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां,पंडित शंकर राव कृष्ण, पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर, पंडित कुमार गंधर्व, विदुषी किशोरी अमोणकर, गिरिजा देवी, पंडित रामाश्रय झा रामरंग, पंडित किशन महाराज,पंडित सामता प्रसाद गुदई महाराज, मृदंग महर्षि डॉ रामशंकर दास उर्फ पागलदास जी, पंडित बिरजू महाराज,उस्ताद विलायत खान,हरिप्रसाद चौरसिया, शिव कुमार शर्मा, पंडित छन्नूलाल मिश्र, पंडित रामनारायण, हेमामालिनी, उस्ताद अमजद अली,रघुनाथ सेठ,रोनू मजूमदार, जितेंद्र महाराज,पंडित लक्षमण भट्ट तैलंग, डागर बन्धु,पंडित विश्व मोहन भट्ट, डॉ 0 एन राजन, सुनील दत्त, सुधा मल्होत्रा, कुमार सानू, उदित नारायण, पंडित कुमार बोस,मंजू नंदन मेहता, डॉ 0 मधु भट्ट तैलंग, सुखविंदर सिंह नामधारी, हुसैन बंधु, मेहमूद धौलपुरी,पंडित सुरेश तातेड, मोइनुद्दीन खान सहित बड़ी संख्या में कलाकार हैं जिन्हें मैं किशोर व युवा अवस्था में संगीत समारोह में कला रसिक व पर्यटक के रूप में मिला हूँ ।

कुछ तो इस संसार में नहीं हैं जो जीवित है उनसे मैं प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ हूं।इसी सितम्बर माह में भोपाल में बरखा महोत्सव संगीत समारोह में भाग लेने जा रहा हूं।

सुझाव : सरकार भारतीय शास्त्रीय एवं लोक संगीत की विरासत को संरक्षण दे, संगीत समारोह को बढ़ावा दे ताकि पर्यटकों द्वारा प्रदेश व भारत की अर्थव्यवस्था को सहयोग मिले ।आयोजकों से अनुरोध है कि रात भर चलने वाले संगीत समारोह, मेले आदि में आयोजित संगीत समारोह में आमंत्रित अतिथियों श्रोताओं, पर्यटकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते लोकल चीजों जैसे भारतीय , कुल्लड , मौसम अनुकूल खाद्य पदार्थ, व्यंजन आदि रखना चाहिए।

स्वास्थ्य को हानि पहुंचाने वाले प्लास्टिक की थैलियों, बोतल,डिब्बा बंद सामग्री और जंक फ़ूड आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए।