कोटा। गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा में तुलसीदास जी का 529 वॉ दिवस तुलसीदास जयंती संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बौद्धिक गुरु श्री रोहित शर्मा ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष श्री राधेश्याम शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि इतिहासकार श्री सत्यनारायण शर्मा रहे, जबकि मंच संचालन श्री रविन्द्र श्रीवास्तव ने किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने गोस्वामी तुलसीदास के जीवन, साहित्य, रामचरितमानस की प्रासंगिकता तथा भारतीय संस्कृति, संस्कार और जीवन-मूल्यों पर विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि तुलसी साहित्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय संवेदना, मर्यादा, नैतिकता, लोकमंगल और सामाजिक समरसता का सशक्त संदेश निहित है, जो वर्तमान समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है।
इस अवसर पर संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि “गोस्वामी तुलसीदास का साहित्य भारतीय संस्कृति और जीवन-दर्शन की अमूल्य धरोहर है।
उनकी रचनाओं में निहित मर्यादा, करुणा, लोकमंगल और मानवीय मूल्यों का संदेश आज के बदलते सामाजिक परिवेश में और अधिक प्रासंगिक हो गया है। पुस्तकालय केवल पुस्तकों के संग्रह एवं वितरण के केंद्र नहीं, बल्कि विचार, संवाद और संस्कार निर्माण के जीवंत केंद्र हैं।
ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा और महान साहित्यकारों के विचारों से जोड़ना पुस्तकालयों की महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी है।”
कार्यक्रम के प्रबंधन एवं आयोजन में श्री रामनिवास धाकड़, श्री रोहित नामा एवं श्रीमती सीमा वर्मा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में पुस्तकालयकर्मियों, पाठकों एवं साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। संवाद के दौरान तुलसी साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर सार्थक चर्चा हुई तथा पठन-संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।