उदयपुर। लोकमंथन यात्रा के उदयपुर प्रवास के दौरान भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और ज्ञान-परंपरा से जुड़े विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर सीटीएई (CTAE) कॉलेज के एवीपी हॉल में ‘हम भारत के लोग’ विषय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ।

राजसमंद होते हुए उदयपुर पहुँची लोकमंथन यात्रा के इन आयोजनों में संस्कृत भारती की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने संस्कृत भाषा की गरिमा और भारतीय सांस्कृतिक चेतना को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।

संस्कृत समूहगीत से अभिव्यक्त हुआ राष्ट्रप्रेम कार्यक्रम में संस्कृत भारती के सहयोग से आलोक पंचवटी के विद्यार्थियों ने ‘जय भारत जननी…’ विषय पर संस्कृत समूहगीत प्रस्तुत किया।

गीत के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारतभूमि के प्रति गौरव, समर्पण, राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक एकात्मता के भावों को स्वर प्रदान किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा और राष्ट्र के प्रति आत्मीय भाव को प्रभावी रूप से सामने रखा।

संस्कृत संवाद ने प्रस्तुत की भाषा की समकालीन प्रासंगिकता इस अवसर पर डॉ. कुलदीप एवं श्रीयांश कंसारा ने संस्कृत संवाद प्रस्तुत किया।

संवाद के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि संस्कृत केवल प्राचीन ज्ञान-विज्ञान और साहित्य की भाषा ही नहीं, बल्कि वर्तमान समय में भी सहज संवाद, विचारों की अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त माध्यम है।

इस प्रस्तुति ने संस्कृत भाषा की जीवंतता और आधुनिक संदर्भों में उसकी उपयोगिता को रेखांकित किया।

संस्कृत प्रदर्शनी बनी विशेष आकर्षण लोकमंथन यात्रा के अंतर्गत संस्कृत भारती की ओर से संस्कृत विषयक प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में प्रदर्शित सामग्री को दर्शकों ने उत्साह एवं रुचि के साथ देखा।

प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को संस्कृत भाषा, भारतीय ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिला। दर्शकों की जिज्ञासा और सहभागिता ने संस्कृत के प्रति जनरुचि तथा सांस्कृतिक विषयों के प्रति आत्मीयता को अभिव्यक्त किया।

संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं की रही सहभागिता इन कार्यक्रमों में संस्कृत भारती की ओर से डॉ. रेनू पालीवाल, मंगल कुमार जैन, सत्यप्रिय, संजय शांडिल्य एवं गौरव साहू की सहभागिता रही।