कोटा। राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी के पेट्रोलियम ब्लॉक में आज इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रथम वर्ष के नवप्रवेशी छात्रों के लिए इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम में एक्सपर्ट लेक्चर कमेटी के मार्गदर्शक श्री शिवलाल मीणा जी के मार्गदर्शन एवं कार्यक्रम समन्वयक श्री हर्ष उपाध्याय के सहयोग से नेत्रदान-अंगदान जागरूकता विषय पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।कार्यशाला में शाइन इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक और और आरटीयू के एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्य *डॉ. कुलवंत गौड़ ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्रों को संबोधित किया।डॉ गौड़,ने बताया कि एक सफ़ल और कार्य कुशल इंजीनियर कभी भी अपने मशीन के काम नहीं आने वाले पार्ट्स को फेंकता नहीं है,बल्कि प्रयास करता है कि,वह बेकार ,नहीं काम आने वाला पार्ट भी,किसी मशीन में लगकर उसकी उम्र, तकनीकी को और बढ़ा सकता है ।इसी को आधार बनाते हुए डॉ गौड़ ने भावी इंजीनियरिंग छात्रों को कहा कि,वह अपने जीवन में मृत हुए लोगों के कॉर्निया दान करके एवं ब्रेन डेथ मरीजों के अंगों का दान करके,जरूरतमंद मरीजों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं ।डॉ. कुलवंत गौड़ ने छात्रों को बताया कि एक इंजीनियर का दायित्व सिर्फ तकनीक बनाना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है।

उन्होंने नेत्रदान और अंगदान के महत्व को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि एक व्यक्ति के मृत्यु के बाद लिए गए नेत्रदान से 2 लोगों को रोशनी और अंगदान से 8 लोगों को नया जीवन मिल सकता है।उन्होंने कहा, _"आप भविष्य के इंजीनियर हैं।

आप पुल, बिल्डिंग और मशीनें बनाएंगे। लेकिन सबसे बड़ा निर्माण तब होगा,जब आप किसी के जीवन में नेत्रदान अंगदान की माध्यम से जीवन में बदलाव लाएंगे ।

डॉ. गौड़ ने छात्रों की शंकाओं का समाधान भी किया और नेत्रदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर किया।एक्सपर्ट लेक्चर कमेटी के मार्गदर्शक श्री शिवलाल मीणा जी ने शाइन इंडिया फाउंडेशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि,ऐसे कार्यक्रम छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

कार्यक्रम के समन्वयक श्री हर्ष उपाध्याय ने सभी अतिथियों और छात्रों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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