उदयपुर, भीलो का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के थोरेसिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की अत्यंत जटिल और जानलेवा स्थिति में न्यूनतम इनवेसिव तकनीक के जरिए सफल ऑपरेशन कर उन्हें नया जीवन दिया है। यह मामला न केवल उम्र के लिहाज से, बल्कि मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री के कारण भी चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती था।
दरअसल उदयपुर निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग हाल ही में एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे। चोट लगने के कारण उनके फेफड़ों और छाती की दीवार के बीच खून जमा हो गया, जिसे मेडिकल भाषा में ट्रॉमेटिक हीमोथोरैक्स कहा जाता है। समय पर उपचार न मिल पाने के कारण यह जमा हुआ रक्त धीरे-धीरे सख्त थक्कों में बदल गया। इन थक्कों ने फेफड़ों को दबाना शुरू कर दिया था, जिससे मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी और जान का खतरा पैदा हो गया था।
कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ.अनुज मेहता ने बताया कि मरीज की स्थिति इसलिए भी गंभीर थी क्योंकि उनके हृदय की पंपिंग क्षमता महज 40 प्रतिशत थी और मरीज लगभग 9 वर्ष पूर्व हार्ट की बाईपास सर्जरी करवा चुका था, साथ ही खून पतला करने की दवाओं पर थे जिससे सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा था।
डॉ. अनुज मेहता ने बताया कि पूर्व में हुई बाईपास सर्जरी और उम्र को देखते हुए पारंपरिक तरीके से छाती को पूरा खोलकर ऑपरेशन करना मरीज के लिए घातक हो सकता था। ऐसे में टीम ने वीडियो-असिस्टेड थोराकोस्कोपिक सर्जरी का निर्णय लिया। इस अत्याधुनिक तकनीक में मात्र 2 सेमी का एक छोटा चीरा लगाया गया और दूरबीन की मदद से मॉनीटर पर देखते हुए फेफड़ों में जमे थक्कों को पूरी सटीकता के साथ बाहर निकाल दिया गया। मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुँचाने और त्वरित विशेषज्ञ परामर्श दिलाने में डॉ. आमिर शौकत की भूमिका महत्वपूर्ण रही,जिससे इलाज में देरी नहीं हुई।
कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. समीर गोयल ने बताया कि सर्जरी के बाद का प्रबंधन भी उतना ही चुनौतीपूर्ण था। एनेस्थीसिया टीम ने मरीज की स्थिति पर कड़ी नजर रखी। जिसके चलते मरीज को सर्जरी के तुरंत बाद सफलतापूर्वक एक्सट्यूबेट कर दिया गया। महज 24 घंटे के भीतर मरीज को आईसीयू से वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया, जो कि इस उम्र में एक बड़ी उपलब्धि है। इस सफल ऑपरेशन में डॉ. पार्थ सारथी,डॉ.निहार, कुलदीप, ललित और संजय की टीम का विशेष सहयोग रहा।
पीएमसीएच के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने टीम को बधाई देते हुए कहा हमारा उद्देश्य दक्षिण राजस्थान के मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना है। थोरेसिक सर्जरी विभाग द्वारा लगातार जटिल मामलों को न्यूनतम इनवेसिव तकनीक से हल करना क्षेत्र के मरीजों के लिए आशा की किरण है।
मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य है और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।