उदयपुर, पेसिफिक मेडिकल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए ‘मदर्स डे’ पर आर्ट एंड क्राफ्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया,जिसमें भावी डॉक्टरों और स्वास्थय कर्मियों ने पढ़ाई के तनाव से दूर होकर कैनवास पर अपनी भावनाओं को उकेरा। पिडिलाइट इंडस्ट्रीज के सहयोग से आयोजित इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी व्यस्त जीवनशैली के बीच माँ की महत्ता, उनके त्याग और निस्वार्थ प्रेम के प्रति जागरूक करना था।
प्रतियोगिता की को-ऑर्डिनेटर डॉ. राहीला घोड़च ने बताया कि इस आयोजन की थीम मदरहुड, लव एंड केयर (मातृत्व, प्यार और देखभाल) रखी गई थी। इसमें मेडिकल, डेंटल, फिजियोथेरेपी, नर्सिंग,ऑक्युपेशनल और एलाइड हैल्थ (पैरामेडिकल) कॉलेज के लगभग 30 छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
विद्यार्थियों ने अपनी कला के माध्यम से दिखाया कि एक माँ किस प्रकार अपने बच्चों के जीवन को संवारती है। किसी ने पेंटिंग के जरिए माँ की ममता को दर्शाया, तो किसी ने वेस्ट मटेरियल का उपयोग कर सुंदर क्राफ्ट वर्क तैयार किया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर एमबीबीएस के अश्विन पाटीदार,द्वितीय स्थान पर डेन्टल की भव्या राठौड एवं तृतीय स्थान एमबीबीएस की वंशिका माथुर रही।
कार्यक्रम के अन्त में प्रतिभागियों को पीएमयू के प्रेसिडेन्ट डॉ.यू.एस.परिहार,डीन पीजी डॉ.आर.के. पालीवाल,पीएमसीएच की वाइस प्रिंसिपल डॉ. मोनाली सोनावणे, बायोकैमिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.नीता साही एवं डॉ. प्रेरणा हर्ष ने प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर डॉ.यू.एस.परिहार ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में छात्र हमेशा व्यस्त रहते हैं, लेकिन इस तरह के आयोजन उन्हें अपनी जड़ों और भावनाओं से जोड़े रखते हैं। माँ के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए कला से बेहतर कोई माध्यम नहीं हो सकता।
इस दौरान पिडिलाइट इंडस्ट्रीज से राजस्थान के सीएमडीआई गोपाल माथुर ने बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों का अवलोकन किया एवं विधार्थीयों की कला की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया।
इस दौरान प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का कहना था कि कॉलेज परिसर में इस तरह के रचनात्मक आयोजनों से मानसिक शांति मिलती है। उन्होंने पिडिलाइट इंडस्ट्रीज और कॉलेज प्रबंधन का आभार व्यक्त किया कि उन्हें अपनी कला के प्रदर्शन का अवसर दिया गया।
इस प्रतियोगिता को सफल बनाने में पीएमसीएच के एचआर विभाग से प्रवीण डांगी, हेमंत सैन एवं लक्ष्मण गमेती का विशेष योगदान रहा।