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अरिहंत काव्य निशा कवि सम्मेलन में हंसी के ठहाकों के बीच सर्दी का अहसास हुआ कम,श्रोता ठहाकें लगाते रहें

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03 Jan 26
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अरिहंत काव्य निशा कवि सम्मेलन में हंसी के ठहाकों के बीच सर्दी का अहसास हुआ कम,श्रोता ठहाकें लगाते रहें

 उदयपुर।अरिहंत मित्र मंडल, सेक्टर 3, के तत्वावधान में साहित्य, संस्कृति एवं समाज को समर्पित एक भव्य कवि सम्मेलन “अरिहंत काव्य निशा” का आयोजन किया गया। इस कवि सम्मेलन में देश एवं प्रदेश से आयेे ख्यातिप्राप्त कवियों ने अपनी ओजस्वी, हास्यपूर्ण एवं भावप्रवण रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ रेणु सिंयाल, पिस्ता चोर्डिया, मंजू सिंघवी, किरण मेहता एवं निधि दक द्वारा नृत्य के रूप में मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों के स्वागत में कुसुम ओस्तवाल एवं नीलिमा तलेसरा द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। जिसनें पूरे वातावरण को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। अरिहंत कमेटी सदस्यों द्वारा मंचासीन अतिथियों का स्वागत उपरना, पगड़ी एवं स्मृतिचिन्ह द्वारा किया गया।

मंडल के अध्यक्ष हेमन्त सिंयाल ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि अरिहंत मित्र मंडल का उद्देश्य समाज में साहित्य, संस्कृति एवं संस्कारों को बढ़ावा देना है तथा भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का निरंतर आयोजन किया जाता रहेगा।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में मंडल के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं सहयोगकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा जिसमे विशेष रूप से कार्यक्रम संयोजक ललित लोढ़ा, अनिल सिंघवी कार्यक्रम संयोजिका रेणु सिंयाल, कुसुम ओस्तवाल एवं  मंजू सिंघवी का सहयोग रहा। इस आयोजन को सफल बनाने में मंडल के संरक्षक प्रकाश झगड़ावत, राजेश भानावत, ललित कोठारी, महामंत्री जयप्रकाश बाबेल कोषाध्यक्ष रमेश ओस्तवाल, संगठन मंत्री प्रकाश सेठ, भोपाल सिंह चव्हाण, कमल गलुण्डिया का भी विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम संयोजक ललित लोढ़ा ने कार्यक्रम आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।

कवि सम्मेलन में हास्य, वीर रस, श्रंृंगार, देशभक्ति एवं सामाजिक विषयों पर आधारित रचनाओं की सुंदर प्रस्तुति हुई। कवियों की प्रभावशाली कविताओं एवं तीखे व्यंग्य पर श्रोताओं ने बार-बार तालियों की गूंज से कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन में साहित्य प्रेमियों की भारी उपस्थिति रही।

कवि सम्मलेन में देश के विभिन्न अंचलों से प्रतिष्ठित, अनुभवी एवं लोकप्रिय कविगण जिसमें हास्य रस अरुण जेमिनी, दिनेश देसी घी, हेमन्त पांडे, कानू पण्डित वीर रस के विनीत चैहान श्रृंगार रस की कवियत्री पदमिनी शर्मा एवं राधिका मित्तल ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हास्य, वीर रस, शृंगार एवं सामाजिक सरोकारों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य नागरिकों, समाजजनों एवं मंडल के सदस्य भी उपस्तिथ दर्ज कराई ।

हास्य कवि अरुण जैमिनी ने अपनी हास्य रचना इक्कीसवीं सदी में ढूँढते रह जाओगे, भरत सा भाई, लक्ष्मण सा अनुयायी, आंखों में पानी, दादी की कहानी,गरीब को खोली, आंगन में रंगोली,परोपकारी बंदे और अर्थी को कंधे, ढूंढते रह जाओगे.... व्यंग्य रचना पर श्रोताओं ने तालियों के साथ उनका समर्थन किया।  

वीर रस  के कवि विनीत चैहान ने जब सिंदूर पर अपनी रचना 13 दिन में 13 राफेल जा कर सब मर्ज मिटा आएं,जो पहलगाम में गिरा खून,उसका सब कर्ज चुका अएं, है गर्व हमें निज सेना पर,जिसने ये विजय कथा बांची,इस बार बेटियां दुश्मन के सर चंडी बन कर नाची... सुनायी तो श्रोता देर तक तालियंा बजा कर दाद दी।

श्रृंगार रस की कवियित्री पद्मिनी शर्मा ने अपनी रचना भारत की संस्कृति परम पुनीता बचा लो, करमों की अदालत मे अपनी गीता बचा लो,मंदिर तो धूमधाम से बना लिया अब तो, कलयुग के रावणो से अपनी सीता बचा लो....रचना को श्रोताआंें का भरपूर समर्थन मिला।

कानपुर से आये कवि हेमन्त पाण्डेय ने आने वाली 14 फरवरी पर रचना सुनाते हुए एक फूल तुझे देने के लिये सस्ते में ले लिया,देखे न कोई इसलिए बस्ते में ले लिया.., फूल तुझे देने को निकले थे जानेमन, पर बजरंग दल वालो ने उसे रस्ते में ले लिया.... पर जोरदार हंसी के ठहाकें लगे। कवियित्री राधिका मित्तल ने उनकी नजरों से जिस दिन उतर जायेंगे,मोतियों की तरह हम बिखर जाएंगे,वो बराबर से हंसकर गुजर जाते है,जो ये कहते थे बिछड़े तो मर जाएंेगे...,वीर रस के कवि

ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कवि राव अजात शत्रु ने हाल ही में अरावली पर्वतमाला पर चले विवाद पर अपनी रचना सुनाते हुए यह अरावली शीश मुकुट है हर मेवाड़ी पानी का राणा कुंभा का मान, त्याग है पन्ना सी बलिदानी का एकलिंग दिवान जहां का भाग्य वीरता गाता है चित्तौड़ दुर्ग इस आड़ावत की शौर्य कथा दोहराता है..,यह अरावली दानवीर भामाशाहों की पूंजी है इस अरावली के पथ पर चेटक की टापें गूंजी है तुम इंच इंच से नाप रहे यह व्यापारी परिपाटी है... सुनाकर श्रोताओं की बाजुओं में दम भर दिया। इस रचना पर श्राताआंे ने अजात शत्रु को तालियों की भरपूर दाद दी।  

कानू पण्डित ने अपनी रचना जिंदगी में लाख उंची हो, भलंे उडान तेरी, परिवार के प्रति तू फर्ज मत भूलना,खुद की जवानी तेरी जिदंगी को दे दी,ऐसे बूढ़े पिताजी का कर्ज मत भलूना.. पर श्रोताओं का समर्थन मिला।

मध्यप्रदेश के शाजापुर से आये हास्य कवि दिनेश देसी घी ने अपनी रचना सारे विश्व गगन पर अब हम तिरंगा फहराएंगे, विश्व गुरु थे और रहेंगे आगे भी कहलाएंगे, जो न चाहें वो न बोले, लेकिन गरलता न घोलें, हम बोलेंगे जय भारत की, वन्देमातरम गाएंगे.. पर जनता ने उनकी बात का तालियों के साथ समर्थन किया।  

कवि सम्मेलन का सफल संचालन नगर के प्रसिद्ध कवि राव अजातशत्रु ने किया। उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में राजनैतिक कटाक्ष करते हुए श्रोताओं को खूब हंसाया। अरावली पर लिखी उनकी कविता काफी पसंद की गई।

कार्यक्रम के अंत में महामंत्री जय प्रकाश बाबेल द्वारा सभी कवियों, अतिथियों, श्रोताओं एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया गया।


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