बांसवाड़ा | राष्ट्रवादी साहित्य चिन्तक, राष्ट्रीय ख्याति के ओजस्वी कवि एवं गौ साहित्य सर्जक मुकेश मोलवा(इन्दौर) ने वर्तमान समय में राष्ट्रीय चिन्तन एवं भारतीय मूल्यों पर केन्द्रित लोक जागरणमूलक साहित्य सृजन पर सर्वाधिक जोर देते हुए कहा है कि भारतवर्ष नए युग में प्रवेश करने लगा है, ऐसे में साहित्य जगत से जुड़े लोगों की भूमिका अत्यधिक प्रासंगिक है।
मुकेश मोलवा ने यह बात गुरुवार शाम बांसवाड़ा के श्री पीताम्बरा आश्रम में प्राच्यविद्या शोध एवं साहित्य संस्थान की ओर से आयोजित संवाद में कही। उन्होंने गौ संरक्षण एवं संवर्धन के व्यापक प्रयासों को तेज करने का आह्वान करते हुए साहित्यकारों को गौ महिमा पर आधारित साहित्य सृजन की दिशा में आगे आने के लिए कहा।
इस अवसर पर मोलवा ने अपनी पुस्तक ‘धेनु ही धर्म’ में गौ की दिव्य और दैवीय महिमा पर आधारित कविता सुनाते हुए गौ आराधना मंत्र एवं स्तोत्र का गायन किया।
संवाद में जीजीटीयू के कुलगीत रचयिता एवं जाने-माने प्रयोगधर्मा कवि हरीश आचार्य, राष्ट्रीय मंच संचालक विपुल ‘विद्रोही’(धम्बोला-डूंगरपुर), वागड़ी गीतकार महेश देव (नन्दौड़), उजास परिवार के संयोजक भंवर गर्ग ‘मधुकर’ एवं साहित्यकार राम पंचाल ‘भारतीय’, गायत्री मण्डल के कोषाध्यक्ष अनन्त जोशी, शिक्षाविद् पं. मनोहर एच. जोशी आदि ने विचार व्यक्त किए।
साहित्यकारों का अभिनन्दन
इस अवसर पर गायत्री मण्डल के कोषाध्यक्ष पं. अनन्त जोशी एवं कार्यकर्ता पं. मनोहर एच. जोशी ने सभी साहित्यकारों का उपरणा पहना कर अभिनन्दन किया।
आश्रम परिसर पर ग्रंथालय का अवलोकन
साहित्यकारों के दल ने श्री पीताम्बरा आश्रम के विभिन्न परिसरों का अवलोकन किया तथा पं. पन्नालाल जोशी प्राच्यविद्या साहित्य ग्रंथालय का अवलोकन किया और दुर्लभ ग्रंथों के संरक्षण तथा उपयोग के लिए गायत्री मण्डल की सराहना की।