GMCH STORIES

भारत में मंजूरी पाने वाली डेंगू की पहली वैक्सीन बनी टाकेडा की क्यूडेंगा

( Read 1663 Times)

20 Jul 26
Share |
Print This Page
भारत में मंजूरी पाने वाली डेंगू की पहली वैक्सीन बनी टाकेडा की क्यूडेंगा

उदयपुर : टाकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने घोषणा की कि भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल (डीसीजीआई) ने न्यू ड्रग्स एंड क्लीनिकल ट्रायल्स (एनडीसीटी) नियम, 2019 के सीटी-20 प्रावधान के अंतर्गत 4 से 60 वर्ष आयु के लोगों में डेंगू की रोकथाम के लिए कंपनी की डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा को बाजार में उतारने की मंजूरी (मार्केट ऑथराइजेशन) प्रदान कर दी है। क्यूडेंगा भारत में मंजूरी पाने वाली पहली डेंगू वैक्सीन है। पहले डेंगू संक्रमण हो चुका हो या नहीं, दोनों ही परिस्थितियों में इसे लगाया जा सकता है और इसके लिए टीकाकरण से पहले किसी जांच की आवश्यकता नहीं होती। भारत में डेंगू अब भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है और क्यूडेंगा को मिली यह मंजूरी भारत में डेंगू की रोकथाम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इंटरकॉन्टिनेंटल मार्केट्स के प्रमुख डॉ. महेंद्र नायक ने कहा कि डेंगू एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, जो लगातार बढ़ती जा रही है और भारत को इससे निपटने के लिए रोकथाम की वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित और दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है। क्यूडेंगा के सात वर्षों के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि यह वैक्सीन डेंगू संक्रमण और डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम से लगातार सुरक्षा प्रदान करती है और यह डेंगू के सभी चारों वायरस सीरोटाइप पर प्रभावी है। यह समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 2022 में लॉन्चिंग के बाद से क्यूडेंगा को 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है और दुनियाभर में इसकी 3.2 करोड़ से अधिक डोज वितरित की जा चुकी हैं। भारत में मिली यह मंजूरी डेंगू की रोकथाम को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। अपनी 245 वर्षों की विरासत और वैक्सीन के विकास में 70 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ टाकेडा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राधिकरणों, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर इस वैक्सीन की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
साउथईस्ट एशिया एंड इंडिया क्लस्टर के जनरल मैनेजर पीटर स्ट्राइबल ने कहा कि डेंगू सिर्फ किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह इस पूरे क्षेत्र के सामने मौजूद एक साझा चुनौती है, जिससे निपटने के लिए सीमाओं से परे जाते हुए सहयोग की जरूरत है। टाकेडा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में सरकारों, सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य केवल क्यूडेंगा को मंजूरी दे चुके या इसे रिकमेंड कर चुके देशों में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि डेंगू की रोकथाम के लिए निगरानी प्रणाली (सर्विलांस), जन-जागरूकता, मच्छर नियंत्रण (वेक्टर कंट्रोल) और सामुदायिक भागीदारी जैसे व्यापक प्रयासों को भी मजबूत करना है। हमारा प्रयास प्रत्येक देश की जरूरतों के अनुरूप टिकाऊ और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित समाधान उपलब्ध कराने में योगदान देना है।
साउथ ईस्ट एशिया एंड इंडिया क्लस्टर के मेडिकल अफेयर्स प्रमुख डॉ. गोह चू बेंग ने कहा कि भारत में डेंगू का दबाव बहुत ज्यादा है और देश के कई क्षेत्रों में डेंगू वायरस के सभी चारों सीरोटाइप एक साथ सक्रिय पाए गए हैं। क्यूडेंगा को इन चारों सीरोटाइप से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। पहले डेंगू संक्रमण हुआ हो या नहीं, दोनों ही परिस्थितियों में इसे लगाया जा सकता है। इसकी मंजूरी भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए अपनाई जा रही समग्र रणनीति को और मजबूत करेगी। वेक्टर कंट्रोल, सर्विलांस, जागरूकता और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय इस रणनीति का हिस्सा हैं।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like