GMCH STORIES

‘मंडला 2026’ में पॉश अधिनियम पर कार्यशाला

( Read 2281 Times)

13 Mar 26
Share |
Print This Page
‘मंडला 2026’ में पॉश अधिनियम पर कार्यशाला

उदयपुर। ‘मंडला 2026 : प्लेसेंटली इन्क्लूसिव’ के पाँचवें दिन मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा पॉश (पीओएसएच) अधिनियम, 2013- कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) पर केंद्रित कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जतन संस्थान, उदयपुर तथा आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी), मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संयुक्त सहभाग से आयोजित हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध महाविद्यालयों में सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी कार्य-पर्यावरण सुनिश्चित करने के कानूनी प्रावधानों, संस्थागत जिम्मेदारियों और व्यावहारिक प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा करना था।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार में महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्य मंत्री प्रो. मंजू बाघमार रहीं। प्रो मंजू बाघमार ने कानून की उत्पत्ति, इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला।  कहा कि कार्यस्थल हो या बाहर कहीं भी महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मुहैया करना हमारी जिम्मेदारी ।
कुलगुरु ने कहा कि छात्राओं को और महिलाओं को लैंगिक उत्पीड़न होने पर प्रथम बार में ही बोलना चाहिए , दो तीन बार चुप हों जाने से सामने वाले का मन बढ़ जाता है। लैंगिक असमानता मिटाने के लिए  प्रशासनिक दृढनिश्चय की आवश्यकता। मुख्य वक्ता के रूप में प्रो गायत्री तिवारी ने कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न न हो इस पर प्रकाश डाला। पॉश अधिनियम की न्यायिक व्याख्याओं और उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय के प्रमुख फैसलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया। कुलपति, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. सुधा चौधरी, आंतरिक शिकायत समिति के संयोजक प्रो. दिग्विजय भटनागर, अधिष्ठाता प्रो एम एस राठौर सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

सत्र के दौरान विस्तार से बताया गया कि किसी भी संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) किस प्रकार गठित की जाती है। समिति में आंतरिक व बाह्य सदस्यों की संरचना कैसी हो, लैंगिक संतुलन कैसे सुनिश्चित हो, और समिति के सदस्यों के लिए संवेदनशीलता एवं क्षमता-निर्माण का प्रशिक्षण क्यों अनिवार्य है। प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि आईसीसी की प्रमुख जिम्मेदारी केवल शिकायत प्राप्त कर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पूर्व-रोकथाम, जागरूकता कार्यक्रम, ओरिएंटेशन, पोस्टर/सर्कुलर के माध्यम से सूचना-प्रसार, तथा कार्यस्थल की संस्कृति को सम्मानजनक और सुरक्षित बनाना भी है।

कार्यशाला में सक्षम पोर्टल की प्रक्रिया पर विशेष सत्र रखा गया, जिसमें चरणबद्ध तरीके से बताया गया कि संस्थान कैसे पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करते हैं, वार्षिक अनुपालन रिपोर्ट किस प्रकार भरी जाती है, और यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों में पॉश अधिनियम के प्रावधानों का पालन हो रहा हो। प्रतिभागियों को यह दिखाया गया कि शिकायतों, जागरूकता कार्यक्रमों, आईसीसी बैठकों और प्रशिक्षण गतिविधियों का डाटा कैसे संकलित कर पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि कानूनी अनुपालन के साथ-साथ पारदर्शिता भी बनी रहे।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह सभी संकायों एवं संबद्ध महाविद्यालयों में आईसीसी का गठन, उसका सक्रिय होना, तथा समय-समय पर रिपोर्टिंग और समीक्षा सुनिश्चित करे। इस संदर्भ में सुझाव दिया गया कि हर कॉलेज में पॉश अधिनियम के बारे में सूचना-पट्ट, वेबसाइट लिंक, पोस्टर, हैंडबुक और जन-जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ, ताकि छात्र-छात्राएँ, शिक्षक और कर्मचारी अपने अधिकारों और प्रक्रियाओं से भली-भांति परिचित रहें।

इसी अवसर पर महिला अध्ययन केंद्र, उदयपुर द्वारा पॉश एक्ट पर तैयार की गई हैंडबुक का विमोचन भी किया गया। यह हैंडबुक हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे आसानी से समझ सकें। इसमें अधिनियम की मूल धाराएँ, ‘यौन उत्पीड़न’ की परिभाषा, शिकायत दर्ज करने के चरण, आईसीसी की कार्यवाही की रूपरेखा, सामान्य प्रश्नोत्तर (एफएक्यू) और उपयोगी संसाधन संक्षिप्त और व्यावहारिक शैली में संकलित हैं। हैंडबुक, एफएक्यू  तथा अन्य आवश्यक जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से अपलोड की गई है, ताकि विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध सभी महाविद्यालयों के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध हो सके।

प्रश्नोत्तर और केस-स्टडी आधारित संवाद के दौरान प्रतिभागियों ने वास्तविक परिस्थितियों से जुड़े सवाल रखे। जैसे अनाम शिकायत, गवाहों की सुरक्षा, झूठी शिकायत के प्रावधान, और ऑनलाइन/हाइब्रिड कार्यस्थल पर पॉश अधिनियम का लागू होना - जिन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से मार्गदर्शन दिया। आयोजकों ने बताया कि ‘मंडला 2026’ के अंतर्गत आयोजित यह कार्यशाला विश्वविद्यालय परिसर में लैंगिक न्याय, सुरक्षा और सम्मान की संस्कृति को न केवल संवैधानिक और कानूनी स्तर पर, बल्कि व्यवहार और दृष्टिकोण के स्तर पर भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यशाला में 140 शिक्षकों और विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन किया था।  


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like