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मुख्यमंत्री का संकल्प है, प्रदेश को स्वच्छ, समृद्ध और विकसित राजस्थान बनाना : के के गुप्ता

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11 Mar 26
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मुख्यमंत्री का संकल्प है, प्रदेश को स्वच्छ, समृद्ध और विकसित राजस्थान बनाना : के के गुप्ता

जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (शहर)के लिए नियुक्त प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर के के गुप्ता ने मंगलवार को प्रदेश की सबसे बड़ी निकाय नगर निगम जयपुर सभागार में स्वच्छ भारत मिशन आमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित किया ।

बैठक को संबोधित करते हुए स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर गुप्ता ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन को अब एक जन आंदोलन बनाना है। इसके लिए जनता के साथ-साथ इस मिशन से जुड़े हुए अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आपकी शत प्रतिशत भागीदारी के बिना इसमें वांछनीय लक्ष्य प्राप्ति संभव नहीं है। 

गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संकल्प है कि राजस्थान समृद्ध और विकसित बने जिसके लिए स्वच्छ भारत मिशन अभियान की सफलता सबसे प्राथमिक कड़ी है। 
प्रदेश के मुख्यमंत्री शर्मा द्वारा समय-समय पर स्वच्छ भारत मिशन शहर के तहत विभिन्न निकायों में ली जा रही बैठकों के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा रही है और हमारे द्वारा प्रत्येक निकाय के अधिकारियों की कार्यशैली के संबंध में फीडबैक दिया जा रहा है। हमारे द्वारा पिछले 1 महीने के भीतर 17 जिलों की 90 निकायों में बैठके आयोजित की गई है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश है कि स्वच्छता के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और जीरो टॉलरेंस नीति के साथ में काम होगा। मुख्यमंत्री महोदय ने यह भी स्पष्ट आदेश दिए हैं कि स्वच्छ भारत मिशन में हमें उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करने हैं और राजस्थान प्रदेश को देश के सभी राज्यों में अव्वल स्थान पर देखना है। हमें सभी लक्ष्य प्राप्त करते हुए परिणाम प्राप्त करने हैं जिसमें किसी भी प्रकार की कोताही अथवा लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


गुप्ता ने कहा कि सुशासन अर्थात जनता को एक लोक कल्याणकारी शासन व्यवस्था का अनुभव होना चाहिए जिसके लिए स्वच्छ भारत मिशन पहली सीढ़ी का कार्य करता है। स्वच्छता आम जनता के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। जहां स्वच्छता होगी वहां पर गंदगी और बीमारियां नहीं रहेगी जिससे लोग भी स्वस्थ रहेंगे शासन व्यवस्था को भी मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना जैसी मेडिक्लेम योजनाएं संचालित करनी पड़ती है जिसमें सरकार का करोड़ों रुपया खर्च होता है। स्वच्छता होने पर लोग बीमार नहीं पढ़ेंगे तो ऐसी योजनाओं में खर्च होने वाली राशि अन्य आधारभूत विकास कार्यों में खर्च हो सकेगी। 


गुप्ता ने बताया कि 90 ए को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए है कि जब तक निर्माण की स्वीकृति जारी नहीं की जाए जब तक भूमि का पूरा डेवलपमेंट संबंधित भू मालिक द्वारा नहीं कर दिया जाए। जिसमें रोड लाइट, पानी, नाली, बगीचे तथा अगर कोई कॉलोनी नई बन रही है, उसका पानी बरसात के अंदर किसी झील या तालाब में जाने की संभावना हो तो उस जगह गंदे पानी का ट्रीटमेंट प्लांट अवश्य लगवाने के लिए पाबंद किया जाए अन्यथा झील तालाब प्रदूषित हो जाएंगे जैसे आवश्यक कार्यों को पूर्ण करने पश्चात ही उसे जो 12.5 परसेंट प्लॉट रोके गए हैं, उसको आवंटन किया जाए उससे पहले किसी भी सूरत में अगर आवंटन कर दिया तो उसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार रहेगा। जनता यह नहीं समझती की कॉलोनी में डेवलपमेंट संबंधित मालिक द्वारा किया जाएगा वह तो केवल निकायों को कोसती है तथा निकाय से उम्मीद करती है कि सभी तरह की सुविधा उन्हें उपलब्ध कराई जाए, जबकि यह स्पष्ट है कि जो भी व्यक्ति कॉलोनी काटेगा वही सारी व्यवस्थाओं सुविधाओं का संचालन करेगा।

 *स्वच्छ भारत मिशन के किसी भी मापदंड में लापरवाही नहीं रखी जाए, जन जागरूकता अभियान भी चलाए जाए* 

स्वच्छता के कार्यों के साथ आम जनता को भी जोड़ने के लिए जन जागरूकता और प्रचारात्मक गतिविधियां की जाए। घर-घर से कचरा 100 प्रतिशत घरों से कलेक्ट किया जाए तथा कचरा गीला और सुका अलग-अलग होना चाहिए कचरा नियमित 365 दिन उठना चाहिए तथा कचरा एक निश्चित समय पर हर घर से उठाना चाहिए निजी भूखंड जो खाली पड़े हुए हैं गंदगी के अड्डे बन गए उन हेतु एक विज्ञप्ति जारी की जाए भू मालिक तीन दिन में अपने भूखंड साफ कर ले अन्यथा निकाय अपने स्तर पर भूखंड साफ करके उस पर आए खर्च को मैं पेनल्टी वसूल करेगी विभिन्न वार्ड में खाली पड़े हुए भूखंड की साफ सफाई नगर परिषद द्वारा करते हुए उस पर बोर्ड लगाया जाए और भूखंड मालिक को नोटिस जारी करते हुए जुर्माना वसूला जाए। सड़कों के दोनों तरफ फैले हुए प्लास्टिक की थैलियां को संग्रहण कर उन्हें समाप्त करना होगा आंखों की निगाहें से जहां तक प्लास्टिक दिखे उसे हटाना होगा नहीं तो इस प्लास्टिक को गाय के खाने पर उसकी मृत्यु तक हो जाएगी प्लास्टिक रोकथाम के लिए धरपकड़ अभियान चलाया जाए तथा सड़कों पर खुले में गौ माता नहीं घूमे, इसके लिए उन्हें पड़कर गौशाला में छोड़ जाए। सार्वजनिक टॉयलेट एवं मूत्रालय की सफाई दिन में तीन बार निश्चित की जाए इनमें लाइट पानी रंग रोगन की व्यवस्था सुनिश्चित हो l रात्रि कॉलिंग कमर्शियल एरिया में नाइट स्टिंग का कार्य निरंतर 365 दिन चले तथा एक व्यक्ति को 400 मीटर की सफाई का टारगेट दिया जाए व्यापारी को कचरा पात्र रखने के लिए पाबंद किया जाए तथा दुकान बंद होने से 1 घंटे पहले दुकानों से कचरा एकत्रित किया जाए तथा नगर परिषद के सभी बाग बगीचों में बच्चों के लिए झूले, मॉर्निंग वॉक पाथवे, फाउंटेन, रंग रोगन एवं अच्छी घास अच्छे पेड़ और चौकीदार की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए। निर्धारित कचरा यार्ड की चारदीवारी बनाई जाए कचरा प्रोसेस का कार्य निरंतर चलना चाहिए जिससे लिगसी वेस्ट वापस एकत्रित नहीं हो और मुख्य मार्गो में डिवाइडर पर रंग रोगन किया जाए। 24 घंटे कार्यरत शिकायत नंबर जारी किया जाए जिस पर आम जनता अपनी शिकायत दर्ज कर सके। इलेक्ट्रिसिटी पोलो पर लाइट बंद नहीं होनी चाहिए। नगर में संचालित अवैध मांस और बूचड़खाने बंद किया जाए। नगर में विभिन्न जगह चल रहे निर्माण कार्यों पर भी निगरानी रखते हुए रेती गिट्टी आदि निर्माण सामग्री सड़क पर नहीं आनी चाहिए।

 *प्रदेश की पहली खुले में शौच मुक्त निकाय होने का गौरव डूंगरपुर को प्राप्त है* 

उन्होंने बताया कि जनजाति अंचल की डूंगरपुर निकाय ने स्वच्छता में सर्वश्रेष्ठ कीर्तिमान प्राप्त किए हैं। वर्ष 2015 में प्रदेश के सभी निकाय प्रमुखों की कार्यशाला जयपुर में आयोजित हुई थी जिसमें निर्देश दिए गए थे कि प्रदेश के सभी निकायों को खुले में शौच मुक्त बनाना है तब मेरे द्वारा सबसे पहले डूंगरपुर को खुले में शौच मुक्त बनाने और 5 करोड रुपए प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने का संकल्प लिया गया था। इसके बाद यहां अधिकारियों और जनता ने साथ में मिलकर स्वच्छता की लड़ाई लड़ी थी और आज तक भी डूंगरपुर निकाय का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्वच्छता में पहचाना जाता है तथा निकाय राजस्थान प्रदेश की प्रथम खुले में शौच मुक्त निकाय घोषित होने का भी गौरव रखती है। प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं है कि राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रतिवर्ष डूंगरपुर निकाय किसी न किसी श्रेणी में अव्वल स्थान प्राप्त कर रहा है।

 *वॉटर ट्रीटमेंट करके पेयजल आपूर्ति का प्रोजेक्ट है सीवरेज, इसके क्रियान्वयन में आम जनता को परेशानी नहीं हो* 

बैठक को संबोधित करते हुए गुप्ता ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न निकायों में सीवरेज लाइन का प्रोजेक्ट चल रहा है। इस प्रोजेक्ट में सरकार के करोड़ों रुपए का व्यय हो रहा है लेकिन यह जनता को मूलभूत आवश्यकताओं में सबसे प्रमुख शुद्ध पर जल उपलब्ध कराने का प्रोजेक्ट है। इसमें वॉटर ट्रीटमेंट करके घर-घर पेयजल आपूर्ति की जाएगी।
शहर में जहां-जहां सीवरेज के कार्य चल रहे हैं उसमें यह आवश्यक है कि जो खुदाई कर दी गई है जहां लाइन डाल दी गई है पहले उसकी रिपेयरिंग और मरमत का कार्य किया जाए। प्रायः यह देखने में आया है कि ठेकेदार द्वारा लाइन तो डाल दी जाती है, लेकिन रिपेयरिंग का कार्य नहीं करते जिससे आमजन सरकार को कोसता है तथा भारी परेशानी का सामना करता है। यहां सरकार की मंशा आमजन को राहत पहुंचाने की है जिसमें करोड़ों करोड़ों रुपया खर्च होता है परंतु कार्य में ध्यान न देने से सरकार को बदनामी का सामना करना पड़ता है, ऐसे में जहां भी सीवरेज की लाइन का कार्य चल रहा है उसमें 1 किलोमीटर से ज्यादा की लाइन खुली हुई नहीं होनी चाहिए तथा जहां-जहां सीवरेज मेंटेनेंस का कार्य चल रहा है उसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाए तथा जो भी शिकायत सिवरेज संबंधित है उसका निस्तारण तुरंत किया जाए तथा जहां भी सीवरेज का पानी खुले में आ रहा है उस पर सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है दंड प्रक्रिया को अपनाया जाए भुगतान पर रोक लगाया जाए।
 


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